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जिले में 25 फीसदी बढ़ी डॉल्फिन की आबादी
अशोक निगम/लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 19 Oct 2015 05:49 PM IST
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जिले की नदियों में दुर्लभ डॉल्फिन की आबादी में पिछले तीन साल के अंदर करीब 25 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। इस माह पांच से सात अक्तूबर के बीच गेरुआ, घाघरा और कौडिय़ाला नदियों में डॉल्फिन की गणना में यह बात सामने आई है। गंगा का चीता कही जाने वाली गैंगेज डाल्फिन की आबादी बढ़ना जिले की जलीय जैव विविधता के समृद्ध होने का अच्छा संकेत है। डाल्फिन को स्थानीय भाषा में सूस कहते हैं।
मेरी गंगा मेरी डॉल्फिन अभियान 2015 के तहत पूरे प्रदेश में पांच से नौ अक्तूबर तक गंगा और उसकी सहायक नदियों में डॉल्फिन की गणना की गई। खीरी और बहराइच जिले में कतर्निया घाट के डीएफओ आशीष तिवारी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने सेंटर फार इनवायरमेंट एजूकेशन और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के लोगों के साथ गेरुआ, घाघरा, कौडिय़ाला नदियों में डॉल्फिन की गणना की। यह गणना पांच से सात अक्तूबर तक चली।
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गेरुआ, घाघरा और कौड़ियाला में मिली 94 डॉल्फिन
कर्तनिया घाट से कोठिया घाट होते हुए गिरजा बैराज तक गेरुआ नदी में, और बंदरिया गौढ़ी से गेरुआ नदी के संगम तक कौड़ियाला नदी में कुल 54 डॉल्फिन मिली हैं। जबकि गिरजापुरी से जालिमनगर पुल तक घाघरा नदी में कुल 21 डॉल्फिन पाई गई हैं। इसी तरह जालिमनगर पुल से मिलिकगौढ़ी शारदा नदी के संगम तक घाघरा नदी में 19 डॉल्फिन मिली हैं। कुल मिला कर जिले की गेरुआ, घाघरा और कौड़ियाला नदी में 94 डॉल्फिन पाई गई हैं जबकि तीन साल पहले हुई गणना में इनकी संख्या महज 71 थी। इस तरह इनकी संख्या में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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कम हो रहा डॉल्फिन का वितरण क्षेत्र
पिछले कुछ वर्षों में स्तनधारी जलीय जीव डॉल्फिन के वितरण क्षेत्र में काफी कमी आई है, जिसके कारण इनकी संख्या में कमी आ रही है। इसके कई कारण है।
-बांध, बैराज निर्माण, नदी की धार का पतली होना, अव्यवस्थित रूप से मछली का शिकार, नदियों में बढ़ता प्रदूषण, प्राकृतिक आवास में आ रही कमी, फसलों में कीटनाशकों का प्रयोग,
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डॉल्फिन की गणना में शामिल रहे ये लोग
डॉल्फिन की गणना में कतर्निया घाट के डीएफओ आशीष तिवारी, रेंजर कतिर्निया घाट, डिप्टी रेंजर शारदानगर अशोक कश्यप, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के शहनवाज खान, सेंटर फार इनवायरमेंट एजूकेशन के विपिन वर्मा वनरक्षक दयाराम, और स्टीमर चालक राम रूप और लाल बहादुर आदि लोग शामिल रहे।
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खीरी और बहराइच जिले की गेरुआ, कौड़ियाला और घाघरा नदियों में पांच से सात अक्तूबर तक हुई डॉल्फिन गणना के जो परिणाम आए हैं वह संतोषजनक है। इनकी संख्या में 25 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
-आशीष तिवारी, डीएफओ कतर्नियाघाट
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मेरी गंगा मेरी डॉल्फिन अभियान 2015 के तहत पूरे प्रदेश में पांच से नौ अक्तूबर तक गंगा और उसकी सहायक नदियों में डॉल्फिन की गणना की गई। खीरी और बहराइच जिले में कतर्निया घाट के डीएफओ आशीष तिवारी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने सेंटर फार इनवायरमेंट एजूकेशन और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के लोगों के साथ गेरुआ, घाघरा, कौडिय़ाला नदियों में डॉल्फिन की गणना की। यह गणना पांच से सात अक्तूबर तक चली।
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गेरुआ, घाघरा और कौड़ियाला में मिली 94 डॉल्फिन
कर्तनिया घाट से कोठिया घाट होते हुए गिरजा बैराज तक गेरुआ नदी में, और बंदरिया गौढ़ी से गेरुआ नदी के संगम तक कौड़ियाला नदी में कुल 54 डॉल्फिन मिली हैं। जबकि गिरजापुरी से जालिमनगर पुल तक घाघरा नदी में कुल 21 डॉल्फिन पाई गई हैं। इसी तरह जालिमनगर पुल से मिलिकगौढ़ी शारदा नदी के संगम तक घाघरा नदी में 19 डॉल्फिन मिली हैं। कुल मिला कर जिले की गेरुआ, घाघरा और कौड़ियाला नदी में 94 डॉल्फिन पाई गई हैं जबकि तीन साल पहले हुई गणना में इनकी संख्या महज 71 थी। इस तरह इनकी संख्या में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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कम हो रहा डॉल्फिन का वितरण क्षेत्र
पिछले कुछ वर्षों में स्तनधारी जलीय जीव डॉल्फिन के वितरण क्षेत्र में काफी कमी आई है, जिसके कारण इनकी संख्या में कमी आ रही है। इसके कई कारण है।
-बांध, बैराज निर्माण, नदी की धार का पतली होना, अव्यवस्थित रूप से मछली का शिकार, नदियों में बढ़ता प्रदूषण, प्राकृतिक आवास में आ रही कमी, फसलों में कीटनाशकों का प्रयोग,
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डॉल्फिन की गणना में शामिल रहे ये लोग
डॉल्फिन की गणना में कतर्निया घाट के डीएफओ आशीष तिवारी, रेंजर कतिर्निया घाट, डिप्टी रेंजर शारदानगर अशोक कश्यप, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के शहनवाज खान, सेंटर फार इनवायरमेंट एजूकेशन के विपिन वर्मा वनरक्षक दयाराम, और स्टीमर चालक राम रूप और लाल बहादुर आदि लोग शामिल रहे।
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खीरी और बहराइच जिले की गेरुआ, कौड़ियाला और घाघरा नदियों में पांच से सात अक्तूबर तक हुई डॉल्फिन गणना के जो परिणाम आए हैं वह संतोषजनक है। इनकी संख्या में 25 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
-आशीष तिवारी, डीएफओ कतर्नियाघाट