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रेवडी की तरह बटी सरकारी इमदाद, नहीं निकला बाढ़ का स्थाई समाधान
Updated Tue, 21 Aug 2018 11:49 PM IST
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21एलकेएच451
22 करोड़ खर्च फिर भी नहीं निकला बाढ़ का स्थाई समाधान
सब कुछ गंवाकर सड़क के किनारे पड़े हैं बाढ़ पीड़ित
जनप्रतिनिधियों ने भी बाढ़ के प्रति दिखाई उदासीनता
निघासन। नदियों से चारों ओर घिरे इस तराई इलाके में बीते 10 सालों में बाढ़ से एक दर्जन से अधिक गांव के लोग घर से बेघर हो चुके हैं। सरकार ने बाढ़ पीड़ितों पर मरहम लगाने के लिए 22 करोड़ रुपये तो खर्च किए, लेकिन हालात जस की तस बनें हुए हैं। बाढ़ को लेकर जनप्रतिनिधि भी उदासीन रहे। यही वजह है क्षेत्र में बाढ़ को लेकर प्रति वर्ष हाहाकार मचा रहता है।
इंडो नेेपाल बार्डर स्थित यह तहसील नेपाल की मोहाना के अलावा घाघरा, सरयू, सुहेली, जौरहा, शारदा आदि नदियों के बीच में है। नेपाल बार्डर पर मोहाना और निघासन के दक्षिण की तरफ शारदा नदी से होने वाले बाढ़ और कटान से तबाही का खौफनाक मंजर प्रत्येक साल देखने को मिलता है। अब तक शारदा नदी ने महादेव, रसाल टांडा, टांडा, श्रीराम पुरवा आदि गांवों का वजूद शारदा ने मिटा दिया। इसके अलावा मोहाना नदी ने नई बस्ती, रामनगर, संकल्पा, बदरहिया, सूरत नगर, अनूप नगर को मिटाने के बाद अब उसका रुख जनकपुर, नयापिंड, रघुनंदन पुरवा, टांडा, खजुआ, रननगर आदि गांवों की ओर है। इन गांवों के लोगों को घर से बेघर करने के बाद उनकी भूूमि आदि भी कटान की जद में आ गई और वह लोग मजदूरों की जिंदगी गुजर बसर करने को मजबूर हो गए हैं। हालांकि सूरतनगर के लोगों को बसाने के लिए प्रशासन ने करीब एक एकड़ भूूमि खरीदी, लेकिन अन्य गांव के लोग सड़क किनारे झुग्गी झोपड़ी आदि डालकर रहने को मजबूर हैं। महादेव, टांडा आदि के ग्रामीण सिंगाही रोड स्थित नहर के किनारे बसे हुए हैं। महादेव के ग्रामीणों को बैलहा करीब आठ किलोमीटर दूर राशन आदि लेने जाना पड़ता है। सरकार से आश्वाशन के बाद भी जब बसाने के लिए कोई हल नहीं निकला तो उन लोगों ने सीलिंग की विवादित भूमि पर रातों रात आशियाना बना लिया।
एक हजार हेक्टेयर से अधिक फसल का होता है नुकसान
नदियों से आने वाली बाढ़ से क्षेत्र में गन्ना, धान की फसल का भारी नुकसान होता है। तहसील के आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक साल करीब एक हजार हेक्टेयर से अधिक फसलों के नुकसान का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ता है। तराई क्षेत्र में खेती बाड़ी करने वाला किसान कभी संपन्न रहता था। बाढ़ के कारण किसान आज दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए मजदूरी करने को मजबूर है।
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सरकार ने 10 सालों में यह खर्च की धनराशि
नदियों के किनारे बसे गांवों में बाढ़ तो काफी लंबे अर्से से आ रही है, लेकिन वर्ष 2008 शारदा नदी ने इस कदर कहर बरपाया कि जिन लोगों ने कभी बाढ़ की कल्पना नहीं की थी। वहां भी बाढ़ आने लगी। प्रति वर्ष कृषि निवेश, कच्चे और पक्के मकानों के लिए, फसल नुकसान, लंच पैकेट, लइया, दाना, नाव, मोमबत्ती, मिट्टी का तेल, बिस्कुट, तिरपाल, राशन, टार्च आदि सामग्री पर राजस्व विभाग ने करीब 22 करोड़ रुपये खर्च किया।
अधिकारियों की भी रहती है मौज
करीब पांच साल पहले बाढ़ में फसल मुआवजे के लिए किसानों को चेक मिले थे। किसानों के नाम बनें चेकों का भुगतान कुछ तथाकथित लोगों ने करा लिया था। मामला सुर्खियों में आने के बाद एसबीआई के मैनेजर रजनीश श्रीवास्तव ने तत्कालीन तहसीलदार रामऔतार और लेखपाल छत्रपाल यादव समेत चार अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें चार आरोपी जेल भी गए थे। इसी कड़ी में पलिया तहसील में भी बाढ़ राहत घोटाले में कई दिग्गज फंस चुके हैं।
क्या कहते हैं लोग
1
21एलकेएच452
स्थाई हल चाहिए भीख नहीं
प्रत्येक साल बाढ़ के नाम पर बटने वाली धनराशि का सदुपयोग होता तो शायद यह समस्या खत्म हो गई होती। सरकार को बाढ़ का स्थाई हल करना चाहिए, सरकार की भीख नहीं चाहिए।
श्रीप्रकाश शुक्ला, व्यापारी
2
21एलकेएच453
ऐसे ही आती रही बाढ़ तो समाप्त हो जाएगा क्षेत्र का वजूद
बाढ़ के कारण यह क्षेत्र काफी पीछे हो गया है। यदि ऐसे ही बाढ़ का दंश यहां के लोगों को झेलना पड़ा तो इस क्षेत्र का वजूद समाप्त हो जाएगा। इस बाढ़ के हल को लेकर किसी भी सरकार का ध्यान नहीं जा रहा है किसान अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है।
चेतराम यादव, पूर्व प्रधान
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बोले जनप्रतिनिधि
1
21एलकेएच454
प्रस्ताव पास होने के बाद चालू होगा काम
बाढ़ से क्षेत्र को बचाने के लिए मोहाना नदी पर करोड़ों की लागत से ठोकरों का निर्माण कराया गया है। शारदा नदी से आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए अदलाबाद से बल्लीपुर तक बांध बनवाने का प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव पास होने के बाद कार्य किया जाएगा।
अजय मिश्र टेनी, सांसद
2
21एलकेएच455
बाढ़ के हल के लिए सीएम से मिलेंगे विधायक
विधानसभा को बाढ़ से बचाने और उसके स्थाई हल के लिए सीएम से मिलकर समस्या का हल निकाला जाएगा। सरकार बाढ़ में बर्बाद हुए किसानों की भरपाई तो नहीं कर सकती, लेकिन इमदाद देकर उनके आंसू पोंछने का कार्य जरूर कर रही है। रामकुमार वर्मा, विधायक
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22 करोड़ खर्च फिर भी नहीं निकला बाढ़ का स्थाई समाधान
सब कुछ गंवाकर सड़क के किनारे पड़े हैं बाढ़ पीड़ित
जनप्रतिनिधियों ने भी बाढ़ के प्रति दिखाई उदासीनता
निघासन। नदियों से चारों ओर घिरे इस तराई इलाके में बीते 10 सालों में बाढ़ से एक दर्जन से अधिक गांव के लोग घर से बेघर हो चुके हैं। सरकार ने बाढ़ पीड़ितों पर मरहम लगाने के लिए 22 करोड़ रुपये तो खर्च किए, लेकिन हालात जस की तस बनें हुए हैं। बाढ़ को लेकर जनप्रतिनिधि भी उदासीन रहे। यही वजह है क्षेत्र में बाढ़ को लेकर प्रति वर्ष हाहाकार मचा रहता है।
इंडो नेेपाल बार्डर स्थित यह तहसील नेपाल की मोहाना के अलावा घाघरा, सरयू, सुहेली, जौरहा, शारदा आदि नदियों के बीच में है। नेपाल बार्डर पर मोहाना और निघासन के दक्षिण की तरफ शारदा नदी से होने वाले बाढ़ और कटान से तबाही का खौफनाक मंजर प्रत्येक साल देखने को मिलता है। अब तक शारदा नदी ने महादेव, रसाल टांडा, टांडा, श्रीराम पुरवा आदि गांवों का वजूद शारदा ने मिटा दिया। इसके अलावा मोहाना नदी ने नई बस्ती, रामनगर, संकल्पा, बदरहिया, सूरत नगर, अनूप नगर को मिटाने के बाद अब उसका रुख जनकपुर, नयापिंड, रघुनंदन पुरवा, टांडा, खजुआ, रननगर आदि गांवों की ओर है। इन गांवों के लोगों को घर से बेघर करने के बाद उनकी भूूमि आदि भी कटान की जद में आ गई और वह लोग मजदूरों की जिंदगी गुजर बसर करने को मजबूर हो गए हैं। हालांकि सूरतनगर के लोगों को बसाने के लिए प्रशासन ने करीब एक एकड़ भूूमि खरीदी, लेकिन अन्य गांव के लोग सड़क किनारे झुग्गी झोपड़ी आदि डालकर रहने को मजबूर हैं। महादेव, टांडा आदि के ग्रामीण सिंगाही रोड स्थित नहर के किनारे बसे हुए हैं। महादेव के ग्रामीणों को बैलहा करीब आठ किलोमीटर दूर राशन आदि लेने जाना पड़ता है। सरकार से आश्वाशन के बाद भी जब बसाने के लिए कोई हल नहीं निकला तो उन लोगों ने सीलिंग की विवादित भूमि पर रातों रात आशियाना बना लिया।
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एक हजार हेक्टेयर से अधिक फसल का होता है नुकसान
नदियों से आने वाली बाढ़ से क्षेत्र में गन्ना, धान की फसल का भारी नुकसान होता है। तहसील के आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक साल करीब एक हजार हेक्टेयर से अधिक फसलों के नुकसान का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ता है। तराई क्षेत्र में खेती बाड़ी करने वाला किसान कभी संपन्न रहता था। बाढ़ के कारण किसान आज दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए मजदूरी करने को मजबूर है।
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सरकार ने 10 सालों में यह खर्च की धनराशि
नदियों के किनारे बसे गांवों में बाढ़ तो काफी लंबे अर्से से आ रही है, लेकिन वर्ष 2008 शारदा नदी ने इस कदर कहर बरपाया कि जिन लोगों ने कभी बाढ़ की कल्पना नहीं की थी। वहां भी बाढ़ आने लगी। प्रति वर्ष कृषि निवेश, कच्चे और पक्के मकानों के लिए, फसल नुकसान, लंच पैकेट, लइया, दाना, नाव, मोमबत्ती, मिट्टी का तेल, बिस्कुट, तिरपाल, राशन, टार्च आदि सामग्री पर राजस्व विभाग ने करीब 22 करोड़ रुपये खर्च किया।
अधिकारियों की भी रहती है मौज
करीब पांच साल पहले बाढ़ में फसल मुआवजे के लिए किसानों को चेक मिले थे। किसानों के नाम बनें चेकों का भुगतान कुछ तथाकथित लोगों ने करा लिया था। मामला सुर्खियों में आने के बाद एसबीआई के मैनेजर रजनीश श्रीवास्तव ने तत्कालीन तहसीलदार रामऔतार और लेखपाल छत्रपाल यादव समेत चार अन्य लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें चार आरोपी जेल भी गए थे। इसी कड़ी में पलिया तहसील में भी बाढ़ राहत घोटाले में कई दिग्गज फंस चुके हैं।
क्या कहते हैं लोग
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21एलकेएच452
स्थाई हल चाहिए भीख नहीं
प्रत्येक साल बाढ़ के नाम पर बटने वाली धनराशि का सदुपयोग होता तो शायद यह समस्या खत्म हो गई होती। सरकार को बाढ़ का स्थाई हल करना चाहिए, सरकार की भीख नहीं चाहिए।
श्रीप्रकाश शुक्ला, व्यापारी
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21एलकेएच453
ऐसे ही आती रही बाढ़ तो समाप्त हो जाएगा क्षेत्र का वजूद
बाढ़ के कारण यह क्षेत्र काफी पीछे हो गया है। यदि ऐसे ही बाढ़ का दंश यहां के लोगों को झेलना पड़ा तो इस क्षेत्र का वजूद समाप्त हो जाएगा। इस बाढ़ के हल को लेकर किसी भी सरकार का ध्यान नहीं जा रहा है किसान अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा है।
चेतराम यादव, पूर्व प्रधान
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बोले जनप्रतिनिधि
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21एलकेएच454
प्रस्ताव पास होने के बाद चालू होगा काम
बाढ़ से क्षेत्र को बचाने के लिए मोहाना नदी पर करोड़ों की लागत से ठोकरों का निर्माण कराया गया है। शारदा नदी से आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए अदलाबाद से बल्लीपुर तक बांध बनवाने का प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव पास होने के बाद कार्य किया जाएगा।
अजय मिश्र टेनी, सांसद
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बाढ़ के हल के लिए सीएम से मिलेंगे विधायक
विधानसभा को बाढ़ से बचाने और उसके स्थाई हल के लिए सीएम से मिलकर समस्या का हल निकाला जाएगा। सरकार बाढ़ में बर्बाद हुए किसानों की भरपाई तो नहीं कर सकती, लेकिन इमदाद देकर उनके आंसू पोंछने का कार्य जरूर कर रही है। रामकुमार वर्मा, विधायक