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वनकर्मियों ने हाथी के संग की कांबिंग
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ममरी। वन रेंज मोहम्मदी महेशपुर क्षेत्र के गांव सुंदरपुर, परबस्तनगर, घमहाघाट के आसपास दहशत का पर्याय बने बाघ की लोकेशन ट्रेस करने के लिए शनिवार सुबह अधिकारियों के निर्देश पर गंगाकली हथनी के साथ एसटीपीएफ जवानों, वन कर्मियों द्वारा की गई कांबिंग में वहां के जंगल में दो बाघ मौजूद होने की पुष्टि हुई है।
सुंदरपुर गांव और घमहाघाट निवासी सरदार लाल सिंह झाला के बीच एक सप्ताह में एक गाय और एक सांड़ को निवाला बना चुका बाघ सात बार परबस्तनगर गांव की आबादी में घुसकर उत्पात मचा चुका है। जिससे वहां दहशत का माहौल देख डीएफओ समीर कुमार, एसडीओ रविशंकर शुक्ल ने कांबिंग कराने का निर्देश रेंजर को दिया था। शनिवार सुबह रेंजर मोहम्मद आरिफ के निर्देशन में वन कर्मियों की टीम एसटीपीएफ के जवानों ने गंगाकली हथिनी के जरिए सुंदरपुर, परबस्तनगर, कठिना नदी, घमहाघाट और जंगल के आसपास जब कांबिंग की तो वहां दो बाघों के पगचिह्न बने मिले, जो दोनों बाघ एक दिन पहले गाय के शव को एक साथ खाते देखे जा चुके थे। सुंदरपुर के ग्रामीणों और फॉरेस्टर रामप्रसाद का कहना है कि जंगल में दो बार मौजूद होने की लोकेशन मिल रही है। उधर, रेंजर ने एक बाघ होने की पुष्टि की है। रेंजर ने बताया कि यह कांबिंग भी ग्रामीणों की मांग पर कराई गई है।
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सुंदरपुर गांव और घमहाघाट निवासी सरदार लाल सिंह झाला के बीच एक सप्ताह में एक गाय और एक सांड़ को निवाला बना चुका बाघ सात बार परबस्तनगर गांव की आबादी में घुसकर उत्पात मचा चुका है। जिससे वहां दहशत का माहौल देख डीएफओ समीर कुमार, एसडीओ रविशंकर शुक्ल ने कांबिंग कराने का निर्देश रेंजर को दिया था। शनिवार सुबह रेंजर मोहम्मद आरिफ के निर्देशन में वन कर्मियों की टीम एसटीपीएफ के जवानों ने गंगाकली हथिनी के जरिए सुंदरपुर, परबस्तनगर, कठिना नदी, घमहाघाट और जंगल के आसपास जब कांबिंग की तो वहां दो बाघों के पगचिह्न बने मिले, जो दोनों बाघ एक दिन पहले गाय के शव को एक साथ खाते देखे जा चुके थे। सुंदरपुर के ग्रामीणों और फॉरेस्टर रामप्रसाद का कहना है कि जंगल में दो बार मौजूद होने की लोकेशन मिल रही है। उधर, रेंजर ने एक बाघ होने की पुष्टि की है। रेंजर ने बताया कि यह कांबिंग भी ग्रामीणों की मांग पर कराई गई है।
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