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पिता की तलाश में कोतवाली पहुंचे तीन बच्चे
Updated Sun, 21 Jan 2018 11:57 PM IST
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बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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गोला गोकर्णनाथ। पढ़ने लिखने की उम्र में जीतोड़ काम और भरपेट भोजन न मिलने से तीन बच्चे रविवार को कोतवाली पहुंचे, उन्होंने पुलिस से अपने पिता की तलाश करने की गुहार लगाई है। पिता के मिलने तक बच्चों ने कोतवाली में ही ठहरने का मन बनाया है।
कोतवाली के ग्राम लघुचा निवासी 11 वर्षीय अंकित ने बताया कि कई वर्ष पूर्व उसके पिता हरद्वारी लाल रैदास जेल चले गए थे। पिता के जेल जाने के बाद उसकी मां गांव के ही कुर्मी जाति के एक व्यक्ति के साथ रहने लगी। वह और उसका बड़ा भाई सूरज मां के साथ, बाद में गोला नगर के मोहल्ला कुम्हारन टोला में रहने लगे। तीन साल पहले उनकी माता का स्वर्गवास हो गया, तो मां के साथ रहने वाले व्यक्ति ने उसे और उसके छोटे भाई पांच वर्षीय अजय को अपने रिश्ते की बहन के घर जलालपुर भेज दिया, जबकि 13 वर्षीय सूरज गोला में ही काम पर लग गया। अंकित को जलालपुर में गन्ना कोल्हू पर काम पर लगा दिया गया। जी तोड़ मेहनत करने के बावजूद उसे खाने के लिए भरपेट भोजन नहीं दिया जाता था। महिला द्वारा मारपीट भी की जाती रही। उधर, उसे पता चला कि उसके पिता की रिहाई जेल से हो चुकी है, वह गोला में ही कहीं रिक्शा चलाते हैं। रविवार की सुबह वह अपने भाई अजय के साथ मौका पाकर गांव जलालपुर से भाग निकला। यहां उसका बड़ा भाई सूरज भी मिल गया। तब तीनों कोतवाली पहुंचे और पुलिस से मिलकर अपने उत्पीड़न की दास्तान सुनाई। साथ ही पिता को खोज निकालने की गुहार लगाई है।
अभी मैं थाना हैदराबाद के गांव महेशपुर में चल रहे धरनास्थल पर हूं। कोतवाली पहुंचने पर बच्चों के पिता की खोज के लिए प्रयास किया जाएगा और उनके उत्पीड़न की भी जांच की जाएगी।
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- यदुवीर सिंह प्रभारी कोतवाल गोला
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कोतवाली के ग्राम लघुचा निवासी 11 वर्षीय अंकित ने बताया कि कई वर्ष पूर्व उसके पिता हरद्वारी लाल रैदास जेल चले गए थे। पिता के जेल जाने के बाद उसकी मां गांव के ही कुर्मी जाति के एक व्यक्ति के साथ रहने लगी। वह और उसका बड़ा भाई सूरज मां के साथ, बाद में गोला नगर के मोहल्ला कुम्हारन टोला में रहने लगे। तीन साल पहले उनकी माता का स्वर्गवास हो गया, तो मां के साथ रहने वाले व्यक्ति ने उसे और उसके छोटे भाई पांच वर्षीय अजय को अपने रिश्ते की बहन के घर जलालपुर भेज दिया, जबकि 13 वर्षीय सूरज गोला में ही काम पर लग गया। अंकित को जलालपुर में गन्ना कोल्हू पर काम पर लगा दिया गया। जी तोड़ मेहनत करने के बावजूद उसे खाने के लिए भरपेट भोजन नहीं दिया जाता था। महिला द्वारा मारपीट भी की जाती रही। उधर, उसे पता चला कि उसके पिता की रिहाई जेल से हो चुकी है, वह गोला में ही कहीं रिक्शा चलाते हैं। रविवार की सुबह वह अपने भाई अजय के साथ मौका पाकर गांव जलालपुर से भाग निकला। यहां उसका बड़ा भाई सूरज भी मिल गया। तब तीनों कोतवाली पहुंचे और पुलिस से मिलकर अपने उत्पीड़न की दास्तान सुनाई। साथ ही पिता को खोज निकालने की गुहार लगाई है।
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अभी मैं थाना हैदराबाद के गांव महेशपुर में चल रहे धरनास्थल पर हूं। कोतवाली पहुंचने पर बच्चों के पिता की खोज के लिए प्रयास किया जाएगा और उनके उत्पीड़न की भी जांच की जाएगी।
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- यदुवीर सिंह प्रभारी कोतवाल गोला