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पांच साल पहले मरे व्यक्ति के नाम निकल गया तीन लाख का ऋण
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मृतक नाम निकल गया तीन लाख का ऋण
निघासन। लखाही स्थित पंजाब नेशनल बैंक ने पांच साल पहले मरे हुए व्यक्ति के नाम पर करीब तीन लाख रुपये का कर्ज निकाल दिया। ऋण निकलने की जानकारी जब उसके परिवार वालों को हुई तो वह लोग बैंक पहुंचे। वहां उन्होंने तहसील से मृतक का डेथ सार्टीफिकेट बनवाकर बैंक में जमा किया। प्रमाणपत्र देखकर बैंक कर्मियों के हांथ पांव फूल गए। फील्ड आफीसर ने आनन-फानन में तीन लाख रुपये जमा कर खाता बंद कर दिया। पीड़ित परिवार ने पंजाब नेशनल बैंक अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
बस्ती जिले के साउघाट गांव पुर्सिया निवासी मेवाती देवी ने बताया कि उनके पति जय सिंह के नाम करीब तीन एकड़ जमीन जिला खीरी में धौरहरा कोतवाली क्षेत्र के गांव गुलरिहा में है। जय सिंह की बीमारी के चलते 21 दिसंबर को 2012 पुर्सिया में मौत हो गई थी। आरोप है कि मृतक जय सिंह के नाम भूमि पर दलालों के माध्यम से 22 मई 2017 को तीन एकड़ भूमि पर तीन लाख रुपये का ऋण ढखेरवा स्थित लखाही के शाखा पंजाब नेशनल बैंक से निकल गया। परिवार वालों को इसका पता तब चला जब चार माह पहले उनके परिवार वालों को ऋण संबंधी नोटिस मिली। परिवार वालों के हाथ पांव फूल गए। मेवाती देवी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बैंक पहुंची। वहां उन्होंने एक जनवरी 2018 को तहसील का बना हुआ मृत प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। मैनेजर शगुन द्विवेदी ने फाइल निकलवाई, जिसमें सेमरी निवासी जगदीश और कामता ने उस फाइल में गवाही दी थी। मैनेजर ने फील्ड आफीसर अमरीश अवस्थी को जमकर फटकार लगाते हुए फाइल मंगवाई। उस फाइल में जय सिंह का फोटो और पहचान पत्र आदि फर्जी पाया गया। अपनी गर्दन फंसते हुए देखकर फील्ड ऑफीसर से ऋण की धनराशि जमा कराकर फाइल बंद कर दी।
उधर किसानों जगदीश, मनोहर, श्याम लाल आदि ने बताया कि काफी लंबे अर्से से कर्ज लेने के लिए वह बैंक के चक्कर काट रहे हें। आरोप है कि कमीशन न मिलने के कारण कर्ज नहीं मिल पा रहा है। वहीं दलालों के माध्यम से मरे हुए व्यक्ति के नाम कर्ज निकल जाता है। किसानों ने उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है।
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तत्कालीन मैनेजर केपी मिश्रा और फील्ड ऑफीसर अमरीश अवस्थी के माध्यम से मृतक जय सिंह के नाम कर्ज निकला था। छानबीन के बाद ऋण की धनराशि तीन लाख रुपये जमा करा दी गई है। ऋण संबंधी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है।
- शगुन द्विवेदी, बैंक मैनेजर
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मृत व्यक्ति के नाम कर्ज निकालना बैंक की सबसे बड़ी लापरवाही है। मामले की जानकारी मिली है। बैंक मैनेजर और फील्ड आफीसर के खिलाफ जांच के बाद शख्त कार्रवाई की जाएगी।
एनके दास, आरएम, पंजाब नेशनल बैंक
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निघासन। लखाही स्थित पंजाब नेशनल बैंक ने पांच साल पहले मरे हुए व्यक्ति के नाम पर करीब तीन लाख रुपये का कर्ज निकाल दिया। ऋण निकलने की जानकारी जब उसके परिवार वालों को हुई तो वह लोग बैंक पहुंचे। वहां उन्होंने तहसील से मृतक का डेथ सार्टीफिकेट बनवाकर बैंक में जमा किया। प्रमाणपत्र देखकर बैंक कर्मियों के हांथ पांव फूल गए। फील्ड आफीसर ने आनन-फानन में तीन लाख रुपये जमा कर खाता बंद कर दिया। पीड़ित परिवार ने पंजाब नेशनल बैंक अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
बस्ती जिले के साउघाट गांव पुर्सिया निवासी मेवाती देवी ने बताया कि उनके पति जय सिंह के नाम करीब तीन एकड़ जमीन जिला खीरी में धौरहरा कोतवाली क्षेत्र के गांव गुलरिहा में है। जय सिंह की बीमारी के चलते 21 दिसंबर को 2012 पुर्सिया में मौत हो गई थी। आरोप है कि मृतक जय सिंह के नाम भूमि पर दलालों के माध्यम से 22 मई 2017 को तीन एकड़ भूमि पर तीन लाख रुपये का ऋण ढखेरवा स्थित लखाही के शाखा पंजाब नेशनल बैंक से निकल गया। परिवार वालों को इसका पता तब चला जब चार माह पहले उनके परिवार वालों को ऋण संबंधी नोटिस मिली। परिवार वालों के हाथ पांव फूल गए। मेवाती देवी अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बैंक पहुंची। वहां उन्होंने एक जनवरी 2018 को तहसील का बना हुआ मृत प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। मैनेजर शगुन द्विवेदी ने फाइल निकलवाई, जिसमें सेमरी निवासी जगदीश और कामता ने उस फाइल में गवाही दी थी। मैनेजर ने फील्ड आफीसर अमरीश अवस्थी को जमकर फटकार लगाते हुए फाइल मंगवाई। उस फाइल में जय सिंह का फोटो और पहचान पत्र आदि फर्जी पाया गया। अपनी गर्दन फंसते हुए देखकर फील्ड ऑफीसर से ऋण की धनराशि जमा कराकर फाइल बंद कर दी।
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उधर किसानों जगदीश, मनोहर, श्याम लाल आदि ने बताया कि काफी लंबे अर्से से कर्ज लेने के लिए वह बैंक के चक्कर काट रहे हें। आरोप है कि कमीशन न मिलने के कारण कर्ज नहीं मिल पा रहा है। वहीं दलालों के माध्यम से मरे हुए व्यक्ति के नाम कर्ज निकल जाता है। किसानों ने उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है।
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तत्कालीन मैनेजर केपी मिश्रा और फील्ड ऑफीसर अमरीश अवस्थी के माध्यम से मृतक जय सिंह के नाम कर्ज निकला था। छानबीन के बाद ऋण की धनराशि तीन लाख रुपये जमा करा दी गई है। ऋण संबंधी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है।
- शगुन द्विवेदी, बैंक मैनेजर
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मृत व्यक्ति के नाम कर्ज निकालना बैंक की सबसे बड़ी लापरवाही है। मामले की जानकारी मिली है। बैंक मैनेजर और फील्ड आफीसर के खिलाफ जांच के बाद शख्त कार्रवाई की जाएगी।
एनके दास, आरएम, पंजाब नेशनल बैंक