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जंगल में इंसानी दखलंदाजी, बाघों का बदल रहा मिजाज

Mon, 18 Jun 2018 11:52 PM IST
Updated Mon, 18 Jun 2018 11:52 PM IST
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जंगल में इंसानी दखलंदाजी, बाघों का बदल रहा मिजाज
जंगल में इंसानी दखलंदाजी, बाघों का बदल रहा मिजाज
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बढ़ती बाघ आबादी के लिहाज से छोटे पड़ने लगे जंगल
बाघ इंसान टकराव ही नहीं कानून व्यवस्था के लिए खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। सीमित वन क्षेत्र में बाघों की बढ़ती आबादी और जंगल तक इंसानों की दखलंदाजी से बाघों के मिजाज में बदलाव आ रहा है। बाघों को जंगल की अपेक्षा खेत ज्यादा रास आने लगे हैं। कारण यह है कि जंगल से ज्यादा भोजन पानी बाघों को जंगल से बाहर मिल रहा है। इससे बाघ जंगल से निकलकर खेतों को अपना ठिकाना बना रहे हैं। ऐसी हालत में बाघ और इंसानों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस टकराव में यदि इंसानों ने जान गंवाई है तो बाघों के मारे जाने की घटनाएं भी कम नहीं हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय का कहना है कि बाघ तीन कारणों से जंगल से बाहर आते हैं। एक तो बाघों की आबादी बढ़ने से उन्हें टेरेटरी बनाने के लिए और जगह की जरूरत पड़ रही है। बाघ को अपनी टेरेटरी बनाने के लिए कम से कम 10 वर्ग किलोमीटर की जरूरत होती है। जब कोई नया और ताकतवर बाघ तैयार होता है तो वह पुराने बाघ की टेरेटरी छीनकर उसे बाहर निकाल देता है। ऐसे में पुराना बाघ अपने लिए नई टेरेटरी तलाशता है। जंगल का क्षेत्र छोटा होने से यह बाघ खेतों की ओर रुख कर रहे हैं।
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दूसरा कारण जंगल में भोजन की कमी होने के कारण बाघों को अपना होम रेंज बढ़ाना पड़ रहा है। तीसरा कारण जंगल में बढ़ता इंसानी हस्तक्षेप है। जंगल के आसपास रहने वाले लोग लकड़ी, घासफूस लेने, कटरुआ बीनने, मवेशी चराने और छोटे-मोटे जानवरों का शिकार करने के लिए जंगल में जाते हैं। इस इंसानी दखलंदाजी से बाघों के प्राकृतिक आवास में खलल पड़ता है। मजबूरन बाघों को जंगल से बाहर निकलना पड़ता है। इससे इंसानों और बाघों के बीच टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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इंसेट......
बाघ-इंसानों के बीच टकराव की घटनाएं हो रहीं आम
बाघ और इंसानों के बीच टकराव की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। दो माह पहले 13 जून को निघासन क्षेत्र के सहतेपुरवा गांव में एक बाघिन ने कामता प्रसाद नामक ग्रामीण को अपना निवाला बना लिया। अगले ही दिन गुस्साए ग्रामीणों ने बाघिन को घेरकर उसे लाठी डंडों से पीटकर अधमरा कर दिया। इससे पहले करीब 12 साल पहले धौरहरा क्षेत्र में कई लोगों पर हमला करने वाले तेंदुए को ग्रामीणों ने पहले पीटा बाद में उसे जिंदा जला दिया था।

इंसेट.....
जिले में अब तक चार बाघ हो चुके आदमखोर
दो साल पहले मैलानी थाना क्षेत्र के छेदीपुर इलाके में छह लोगों को निवाला बनाने वाले बाघ को वन विभाग ने आदमखोर घोषित किया। बाद में उसे ट्रैंकुलाइज कर लखनऊ प्राणि उद्यान में ले जाया गया जहां वह छेदी सिंह के नाम से उम्रकैद की सजा काट रहा है। इससे पहले किशनपुर क्षेत्र से एक आदमखोर बाघ को ट्रैंकुलाइज कर लखनऊ प्राणि उद्यान ले जाया गया था। वर्ष 2006 में संपूर्णानगर रेंज के कांपटांडा में करीब 10 लोगों को निवाला बनाने वाले बाघ को भी आदमखोर घोषित किया गया था। उसे गोली मार दी गई थी। वर्ष 2008 में संपूर्णानगर रेंज में एक बूढ़ी बाघिन आदमखोर हो गई जिसे वन विभाग के अफसरों ने गोली मार दी।
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