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धूप में बधीं छह गायों की तड़प-तड़पकर मौत
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निघासन (लखीमपुर खीरी)। प्रदेश सरकार के आदेश पर छुट्टा घूम रहे पशुओं को आश्रय देने के लिए थाना निघासन क्षेत्र के गांव चखरा में गोशाला बनाई गई है। आसमान से बरस रही आग से नीचे भुलभुली बालू और ऊपर से खुला आसमान और अव्यवस्थाएं पशुओं की जान पर बन आई है। धूप में बांधी गईं गायों में सोमवार से मंगलवार सुबह तक छह पशुओं की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। इससे गोशाला व्यवस्थापकों में हड़कंप मचा है। मृत गायों को गुुपचुप तरीके से दफन कर दिया गया। डॉक्टर ने इससे पहले सात गाय मरने की पुष्टि की है। एसडीएम ने गोशाला का औचक निरीक्षण किया और व्यवस्था सुधारने के निर्देश ग्राम प्रधान को दिए हैं।
ग्राम पंचायत चखरा में खाली पड़ी ग्राम सभा की करीब दो एकड़ भूमि पर नौ अप्रैल को गोशाला का निर्माण हुआ था। किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष बद्री प्रसाद मौर्य और अविनाश दीक्षित ने बताया कि 369 गायों को गोशाला में रखा गया। उसके बाद 281 गाय बची हैं। शेष गाय कहां गईं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। उधर सोमवार और मंगलवार की सुबह तक गोशाला की बिना टैग लगी गायों की मौत हो चुकी है। इन गायों को गुपचुप तरीके से गोशाला के सामने और मुंशीगढ़ गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर पश्चिम तरफ पुलिया के नीचे दफनाया गया है। आरोप है कि खाने और पीने की व्यवस्था के अलावा खुले आसमान के नीचे चिलचिलती धूप में गाय बांधी जाती हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है। गोशाला में दो गाय बीमार हैं, जिनका इलाज निघासन के मवेशी डॉक्टर अवधेश कुमार वर्मा कर रहे हैं। गायों की हो रही लगातार मौतों के मामले की सूचना पर एसडीएम ओपी गुप्ता गोशाला पहुंचे। उन्होंने अव्यवस्थाओं पर कड़ी नाराजगी जताई और व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उधर पशु चिकित्सक डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि इससे पहले टैग लगी करीब सात गायों की मौत हो चुकी है। गोशाला में करीब 281 गायों की टैगिंग हुई है। करीब 48 गाय पकड़ में नहीं आईं थीं, जिसकी वजह से टैग नहीं लग पाए। गोशाला में करीब 369 गायों के होने की सूचना थी। उधर ग्राम प्रधान इस्लामु्दीन ने चार गायों के मरने की पुष्टि की है।
चखरा गोशाला में सुविधाएं नदारद
निघासन। चखरा में बनीं गोशाला में सारी सुविधाएं नदारद हैं। ऊपर से खुला आसमान, नीचे रतीली बालू में गाय और बैल खड़े होने को मजबूर हैं। लगातार हो रही गायों की मौत के मामले में प्रशासन भी संजीदा नहीं दिख रहा है। किसान संगठन के पदाधिकारियों ने इस मामले का मुद्दा उठाते हुए मामले की सूचना डीएम को दी। डीएम ने एसडीएम को जांच के लिए भेजा। जांच के दौरान एसडीएम ने गोशाला में मिली कमियों को दूर करने का आदेश दिया है।
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चखरा गांव में ग्राम सभा की भूमि पर गोशाला खोला गया था। प्रशासन से गोशाला खोलने के लिए दो लाख रुपये भी मिल गए। गोशाला में चारों तरफ से कटीले तार लगाकर एक मेनगेट बनाया गया। पानी पीने की व्यवस्था के लिए गड्ढे आदि खोदे गए। टिनशेड करीब 105 फुट बनाया गया है, जिसमें बूढी गायों को रखा गया है। उसके बाद छोटे-छोटे छप्पर आदि दो स्थानों पर डाले गए हैं। गायों की संख्या करीब साढे तीन सौ के ऊपर होने के कारण सबसे अधिक गायें खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं।
व्यवस्था न सुधरने पर किसान संगठन करेगा आंदोलन
गोशाला में व्यवस्था न सुधरने पर किसान संगठन अध्यक्ष पूर्व प्रधान बद्रीप्रसाद मौर्य, अविनाश दीक्षित आदि ने आरोप लगाया है कि गोशाला में गायों को भर लिया गया, लेकिन उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके चलते करीब एक दर्जन से अधिक गाय मौत के मुंह में समा चुकी हैं। कई गायें बीमार हैं। यदि व्यवस्था नहीं सुधरी तो किसान संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा।
चारे के लिए प्रतिदिन आता है एक मवेशी का 30 रुपये
गोशाला में रखी गई गाय, बैल और बछड़े को खिलाने के लिए प्रतिदिन 30 रुपये आता है। आलम यह है कि सूखा भूसा खुली भूमि पर डाल दिया जाता है, जिसे मवेशी खाने में कतराते हैं। उनको हरा चारा नसीब नहीं हो रहा है। गौशाला में लगी लाइट खराब होने के कारण पशुओं को रात्रि में चारा आदि देने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है।
दो दिन में छह गायों की मौत होने की जानकारी मिली थी। मैं मौके पर गया था। कमजोर होने के कारण गायें मरी हैं। गायों के चारे के लिए ईंट भट्ठा मालिकों की बैठक की गई थी। भट्ठा मालिकों ने दो ट्रॉली भूसा देने को कहा है। ग्राम प्रधान और सामाजिक संगठनों से भी गोशाला के लिए सहयोग मांगा गया है। ग्राम प्रधान से छाया आदि के लिए छप्पर डालने के लिए कहा गया है।
- ओपी गुप्ता एसडीएम, निघासन
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ग्राम पंचायत चखरा में खाली पड़ी ग्राम सभा की करीब दो एकड़ भूमि पर नौ अप्रैल को गोशाला का निर्माण हुआ था। किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष बद्री प्रसाद मौर्य और अविनाश दीक्षित ने बताया कि 369 गायों को गोशाला में रखा गया। उसके बाद 281 गाय बची हैं। शेष गाय कहां गईं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। उधर सोमवार और मंगलवार की सुबह तक गोशाला की बिना टैग लगी गायों की मौत हो चुकी है। इन गायों को गुपचुप तरीके से गोशाला के सामने और मुंशीगढ़ गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर पश्चिम तरफ पुलिया के नीचे दफनाया गया है। आरोप है कि खाने और पीने की व्यवस्था के अलावा खुले आसमान के नीचे चिलचिलती धूप में गाय बांधी जाती हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है। गोशाला में दो गाय बीमार हैं, जिनका इलाज निघासन के मवेशी डॉक्टर अवधेश कुमार वर्मा कर रहे हैं। गायों की हो रही लगातार मौतों के मामले की सूचना पर एसडीएम ओपी गुप्ता गोशाला पहुंचे। उन्होंने अव्यवस्थाओं पर कड़ी नाराजगी जताई और व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उधर पशु चिकित्सक डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि इससे पहले टैग लगी करीब सात गायों की मौत हो चुकी है। गोशाला में करीब 281 गायों की टैगिंग हुई है। करीब 48 गाय पकड़ में नहीं आईं थीं, जिसकी वजह से टैग नहीं लग पाए। गोशाला में करीब 369 गायों के होने की सूचना थी। उधर ग्राम प्रधान इस्लामु्दीन ने चार गायों के मरने की पुष्टि की है।
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चखरा गोशाला में सुविधाएं नदारद
निघासन। चखरा में बनीं गोशाला में सारी सुविधाएं नदारद हैं। ऊपर से खुला आसमान, नीचे रतीली बालू में गाय और बैल खड़े होने को मजबूर हैं। लगातार हो रही गायों की मौत के मामले में प्रशासन भी संजीदा नहीं दिख रहा है। किसान संगठन के पदाधिकारियों ने इस मामले का मुद्दा उठाते हुए मामले की सूचना डीएम को दी। डीएम ने एसडीएम को जांच के लिए भेजा। जांच के दौरान एसडीएम ने गोशाला में मिली कमियों को दूर करने का आदेश दिया है।
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चखरा गांव में ग्राम सभा की भूमि पर गोशाला खोला गया था। प्रशासन से गोशाला खोलने के लिए दो लाख रुपये भी मिल गए। गोशाला में चारों तरफ से कटीले तार लगाकर एक मेनगेट बनाया गया। पानी पीने की व्यवस्था के लिए गड्ढे आदि खोदे गए। टिनशेड करीब 105 फुट बनाया गया है, जिसमें बूढी गायों को रखा गया है। उसके बाद छोटे-छोटे छप्पर आदि दो स्थानों पर डाले गए हैं। गायों की संख्या करीब साढे तीन सौ के ऊपर होने के कारण सबसे अधिक गायें खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं।
व्यवस्था न सुधरने पर किसान संगठन करेगा आंदोलन
गोशाला में व्यवस्था न सुधरने पर किसान संगठन अध्यक्ष पूर्व प्रधान बद्रीप्रसाद मौर्य, अविनाश दीक्षित आदि ने आरोप लगाया है कि गोशाला में गायों को भर लिया गया, लेकिन उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके चलते करीब एक दर्जन से अधिक गाय मौत के मुंह में समा चुकी हैं। कई गायें बीमार हैं। यदि व्यवस्था नहीं सुधरी तो किसान संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा।
चारे के लिए प्रतिदिन आता है एक मवेशी का 30 रुपये
गोशाला में रखी गई गाय, बैल और बछड़े को खिलाने के लिए प्रतिदिन 30 रुपये आता है। आलम यह है कि सूखा भूसा खुली भूमि पर डाल दिया जाता है, जिसे मवेशी खाने में कतराते हैं। उनको हरा चारा नसीब नहीं हो रहा है। गौशाला में लगी लाइट खराब होने के कारण पशुओं को रात्रि में चारा आदि देने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है।
दो दिन में छह गायों की मौत होने की जानकारी मिली थी। मैं मौके पर गया था। कमजोर होने के कारण गायें मरी हैं। गायों के चारे के लिए ईंट भट्ठा मालिकों की बैठक की गई थी। भट्ठा मालिकों ने दो ट्रॉली भूसा देने को कहा है। ग्राम प्रधान और सामाजिक संगठनों से भी गोशाला के लिए सहयोग मांगा गया है। ग्राम प्रधान से छाया आदि के लिए छप्पर डालने के लिए कहा गया है।
- ओपी गुप्ता एसडीएम, निघासन