{"_id":"5ceac65fbdec22078812805d","slug":"155889012818-lakhimpur-news116","type":"story","status":"publish","title_hn":"तो कस्ता विधानसभा में भी हुआ रेखा के साथ भीतराघात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तो कस्ता विधानसभा में भी हुआ रेखा के साथ भीतराघात
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर खीरी। धौरहरा लोकसभा से दोबारा सांसद बनने में कामयाब रहीं रेखा वर्मा के सामने चुनाव के प्रारंभ से ही चुनौतियां आती रहीं। इसके बावजूद उन्हें टिकट मिला और चुनाव भी जीती। चुनाव परिणामों के साथ ही भितरघात की कहानियां सामने आने लगी हैं, जो भाजपा नेतृत्व के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है। कस्ता विधानसभा के भाजपा विधायक सौरभ सिंह सोनू और उनके पिता/भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता जुगुल किशोर के गांव और क्षेत्र में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। पिता-पुत्र के प्रभाव वाले गांवों में भाजपा प्रत्याशी को बहुत ही कम वोट मिले, जबकि गठबंधन प्रत्याशी अरशद इलियास सिद्दीकी और कांग्रेस प्रत्याशी जितिन प्रसाद को अधिक वोट मिले हैं।
धौरहरा लोकसभा की पांच विधानसभाओं में कस्ता विधानसभा से भाजपा विधायक सौरभ सिंह सोनू और उनके पिता पूर्व राज्य सभा सदस्य जुगुल किशोर पहले बसपा में थे, जो विधानसभा चुनाव 2017 से पहले भाजपा में शामिल हुए। विधायक मूलरूप से ग्राम पंचायत भिरावां ग्रंट के मजरा चुरईपुरवा के निवासी है, जिनका परिवार आज भी गांव में रहता है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी विधायक और उनके पिता चुनाव प्रचार से दूर ही रहे। सूत्रों की माने तो विधायक के कार्यकर्ताओं ने विपक्षी प्रत्याशी का समर्थन किया था, जिसके सोशल मीडिया पर कई बार फोटो भी वायरल हुए थे। इससे क्षेत्र में सांसद रेखा वर्मा की जीत को लेकर संशय भी जताया गया था। भिरावां ग्रंट में तीन बूथों पर मतदान कराया गया था। भिरावां ग्रंट के एक बूथ पर भाजपा प्रत्याशी को 90 वोट मिले, जबकि गठबंधन प्रत्याशी को 462 और कांग्रेस को 75 वोट मिले। दूसरे बूथ पर भाजपा को 147 वोट, गठबंधन को 321 और कांग्रेस को 91 वोट मिले हैं। इसी तरह तीसरे बूथ पर भाजपा प्रत्याशी को सिर्फ तीन वोट मिले, जबकि गठबंधन उम्मीदवार को 130 और कांग्रेस को 125 वोट मिले हैं।
हमारे गांव में दलित बिरादरी के मतदाता ज्यादा हैैं। इसके अलावा पाल बिरादरी के लोग रहते हैं। भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए गांव में प्रचार किया था। वोट कैसे कम रह गए, इसकी जानकारी नहीं है। वैसे हमें भी चुनाव में एक बूथ पर कम वोट मिले थे।
विज्ञापन
- सौरभ सिंह सोनू, विधायक, कस्ता विधानसभा
विज्ञापन
धौरहरा लोकसभा की पांच विधानसभाओं में कस्ता विधानसभा से भाजपा विधायक सौरभ सिंह सोनू और उनके पिता पूर्व राज्य सभा सदस्य जुगुल किशोर पहले बसपा में थे, जो विधानसभा चुनाव 2017 से पहले भाजपा में शामिल हुए। विधायक मूलरूप से ग्राम पंचायत भिरावां ग्रंट के मजरा चुरईपुरवा के निवासी है, जिनका परिवार आज भी गांव में रहता है। लोकसभा चुनाव के दौरान भी विधायक और उनके पिता चुनाव प्रचार से दूर ही रहे। सूत्रों की माने तो विधायक के कार्यकर्ताओं ने विपक्षी प्रत्याशी का समर्थन किया था, जिसके सोशल मीडिया पर कई बार फोटो भी वायरल हुए थे। इससे क्षेत्र में सांसद रेखा वर्मा की जीत को लेकर संशय भी जताया गया था। भिरावां ग्रंट में तीन बूथों पर मतदान कराया गया था। भिरावां ग्रंट के एक बूथ पर भाजपा प्रत्याशी को 90 वोट मिले, जबकि गठबंधन प्रत्याशी को 462 और कांग्रेस को 75 वोट मिले। दूसरे बूथ पर भाजपा को 147 वोट, गठबंधन को 321 और कांग्रेस को 91 वोट मिले हैं। इसी तरह तीसरे बूथ पर भाजपा प्रत्याशी को सिर्फ तीन वोट मिले, जबकि गठबंधन उम्मीदवार को 130 और कांग्रेस को 125 वोट मिले हैं।
विज्ञापन
हमारे गांव में दलित बिरादरी के मतदाता ज्यादा हैैं। इसके अलावा पाल बिरादरी के लोग रहते हैं। भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए गांव में प्रचार किया था। वोट कैसे कम रह गए, इसकी जानकारी नहीं है। वैसे हमें भी चुनाव में एक बूथ पर कम वोट मिले थे।
विज्ञापन
- सौरभ सिंह सोनू, विधायक, कस्ता विधानसभा