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एसटीपीएफ बचाएगा बाघ, बाघों से इंसानों को बचाएगा कौन

Sat, 02 Dec 2017 11:08 PM IST
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:08 PM IST
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एसटीपीएफ बचाएगा बाघ, बाघों से इंसानों को बचाएगा कौन
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जंगल से सटे इलाके के लोगों ने की एसएचपीएफ बनाने की मांग
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- लगातार बढ़ रहे बाघ के हमलों से दहशत के साए में जी रहे जंगली इलाके के लोग

अनिल मिश्र बांकेगंज।
बाघों की सुरक्षा के लिए सरकार ने स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (एसटीपीएफ) का गठन किया है। यह फोर्स बाघों के साथ वन और दूसरे वन्यजीवों की भी सुरक्षा करेगी, लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि इंसानों को बाघों से कौन बचाएगा? जंगल से सटे इलाके के लोगों ने स्पेशल ह्यूमन प्रोटेक्शन फोर्स (एसएचपीएफ) गठित करने की मांग की है।
खीरी और पीलीभीत जिले में बाघों की बढ़ती आबादी जंगल से सटे गांव में रहने वाले लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। खीरी में दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन में शामिल मैलानी और भीरा रेंज में पिछले दो साल के अंदर 12 लोग बाघ का निवाला बन चुके हैं। इस अवधि में बीस से अधिक लोग घायल हुए। इसी तरह दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी रेंज में पिछले आठ माह के अंदर चार लोग बाघ का निवाला बने। पीलीभीत जिले में भी ताबड़तोड़ बाघ के हमले हो रहे हैं। बाघों के इन हमलों के चलते लोगों को खेतीबाड़ी तक करना मुश्किल हो रहा है। बाघों के डर से अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। आलम यह है कि सहालगों के दिनों में यहां बारातें आनी मुश्किल हो रही हैं। इन गांवों में लोग अपनी बेटियों की शादी करने से भी कतराने लगे हैं।
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स्थानीय लोगों में विनोद गोयल, राजीव सिन्हा, अरुण सक्सेना, सीताराम केडिया आदि का कहना है कि जिस तरह बाघों की सुरक्षा के लिए (एसटीपीएफ) का गठन किया गया है, उसी तरह जंगल से सटे इलाके में बसे लोगों की सुरक्षा के लिए स्पेशल ह्यूमन प्रोटेक्शन फोर्स (एसएचपीएफ) का भी गठन किया जाए, जो जंगल से बाहर निकलने वाले जंगली जानवरों से इंसानों का बचाव कर सके।
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बढ़ सकती हैं बाघ के हमले की घटनाएं
जंगल में पेट्रोलिंग बढ़ने से बाघों के प्राकृतिक आवास में भी खलल पड़ेगा। इससे बाघों के जंगल से बाहर आने की घटनाओं में और अधिक इजाफा हो सकता है। यहां बता दें कि एसटीपीएफ में एक डीएसपी, छह इंस्पेक्टर और करीब 12 सब इंस्पेक्टरों के अलावा 94 पीएसी जवानों की नियुक्ति हुई है।



एसटीपीएफ बाघों के साथ वनों और दूसरे वन्यजीवों की भी सुरक्षा करेगा। जानवरों को जंगलों में ही अनुकूल और सुरक्षित आवास मिले ताकि बाघों को जंगल से बाहर निकलने की नौबत न आए। इस दिशा में एसटीपीएफ की विशेष भूमिका होगी।
- डॉ. अनिल पटेल, डीएफओ और डीडी, बफरजोन, दुधवा टाइगर रिजर्व
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