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बाघ ने बकरी, बकरों को बनाया निवाला
Updated Fri, 14 Sep 2018 11:29 PM IST
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बाघ ने बकरी, बकरों को बनाया निवाला
ममरी। अयोध्यापुर गांव के दक्षिण भाग के गन्ने के खेतों में शुक्रवार सुबह विचरण करते बाघ ने एक बकरी, दो बकरों पर हमला कर निवाला बना लिया। अधखाए शव गन्ने के खेतों में मिले हैं जिससे गांव के लोगों में दहशत है। वनकर्मियों ने भी बाघ के पगचिह्न और अधखाए शव मिलने की पुष्टि की है।
गांव अयोध्यापुर निवासी रामसागर और श्यामबिहारी के घर की महिलाएं शुक्रवार सुबह वनरेंज मोहम्मदी महेशपुर की देवीपुर बीट जंगल से 300 मीटर की दूरी पर बिहारीलाल के खेत में बकरी चर रही थी। गांव वालों के अनुसार इसी बीच बाघ ने रामसागर की एक बकरी, एक बकरा और श्यामबिहारी के एक बकरे पर हमला कर उन्हें गन्ने के खेत में खींच ले गया। तीनों को अपना निवाला बना लिया। महिलाओं के शोर मचाने पर अयोध्यापुर, सुंदरपुर गांव के बहुत से ग्रामीण लाठी डंडे लेकर पहुंचे और शोर मचाने पर बाघ अधखाए शव छोड़कर चला गया। एक साथ तीन पशुओं पर हमला होने और बाघ के आबादी के समीप पहुंचने से क्षेत्र में दहशत फैल गई। गांव वालों की सूचना पर पहुंचे फारेस्टर रामप्रसाद, वनरक्षक राजेश कुमार, बेचेलाल आदि वनकर्मियों ने बाघ के पगचिह्न और बकरी, बकरे के अधखाए शव गन्ने के खेत में मिलने की पुष्टि की है।
फारेस्टर का कहना है कि बाघ ने जिस स्थान पर हमला किया वहां से गांव की दूरी 300 मीटर और जंगल की दूरी आधा किमी है। वनकर्मियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल से सटे खेतों में पशु न ले जाने की सलाह दी। दो सप्ताह पूर्व बाघ ने एक भैंस को मार गिराया था। रेंजर बनारसी दास मौर्य ने भी गांव वालों को सतर्क रहने, खेतों में समूह बनाकर रहने को कहा है। रेंजर ने बताया कि वनकर्मियों की टीम बाघ की निगरानी में लगा दी गई है।
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बाघ ने बकरी, बकरों को बनाया निवाला
ममरी। अयोध्यापुर गांव के दक्षिण भाग के गन्ने के खेतों में शुक्रवार सुबह विचरण करते बाघ ने एक बकरी, दो बकरों पर हमला कर निवाला बना लिया। अधखाए शव गन्ने के खेतों में मिले हैं जिससे गांव के लोगों में दहशत है। वनकर्मियों ने भी बाघ के पगचिह्न और अधखाए शव मिलने की पुष्टि की है।
गांव अयोध्यापुर निवासी रामसागर और श्यामबिहारी के घर की महिलाएं शुक्रवार सुबह वनरेंज मोहम्मदी महेशपुर की देवीपुर बीट जंगल से 300 मीटर की दूरी पर बिहारीलाल के खेत में बकरी चर रही थी। गांव वालों के अनुसार इसी बीच बाघ ने रामसागर की एक बकरी, एक बकरा और श्यामबिहारी के एक बकरे पर हमला कर उन्हें गन्ने के खेत में खींच ले गया। तीनों को अपना निवाला बना लिया। महिलाओं के शोर मचाने पर अयोध्यापुर, सुंदरपुर गांव के बहुत से ग्रामीण लाठी डंडे लेकर पहुंचे और शोर मचाने पर बाघ अधखाए शव छोड़कर चला गया। एक साथ तीन पशुओं पर हमला होने और बाघ के आबादी के समीप पहुंचने से क्षेत्र में दहशत फैल गई। गांव वालों की सूचना पर पहुंचे फारेस्टर रामप्रसाद, वनरक्षक राजेश कुमार, बेचेलाल आदि वनकर्मियों ने बाघ के पगचिह्न और बकरी, बकरे के अधखाए शव गन्ने के खेत में मिलने की पुष्टि की है।
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फारेस्टर का कहना है कि बाघ ने जिस स्थान पर हमला किया वहां से गांव की दूरी 300 मीटर और जंगल की दूरी आधा किमी है। वनकर्मियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल से सटे खेतों में पशु न ले जाने की सलाह दी। दो सप्ताह पूर्व बाघ ने एक भैंस को मार गिराया था। रेंजर बनारसी दास मौर्य ने भी गांव वालों को सतर्क रहने, खेतों में समूह बनाकर रहने को कहा है। रेंजर ने बताया कि वनकर्मियों की टीम बाघ की निगरानी में लगा दी गई है।
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