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दुधवा के हाथियों की सेहत पर हर पल रहेगी नजर
Updated Tue, 24 Jul 2018 11:53 PM IST
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24एलकेएच 07
हाथियों की सेहत पर पैनी नजर रखेगा दुधवा प्रशासन
सेहत की जांच के साथ खान पान का भी रहेगा ख्याल
हाथियों की क्षमता से ज्यादा नहीं लिया जाएगा काम
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। हाथियों की सेहत की निगरानी केवल एलीफैंट हेल्थ एंड हैपीनेस कैंप तक ही सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में हाथियों की नियमित जांच और उपचार के लिए एक विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। केप्टिव एलीफैंट मैनेजमेंट प्लान नाम से बनी इस योजना में पालतू हाथियों के रखरखाव, चिकित्सा के साथ-साथ उनके खान पान और हाथियों के काम लेने के ढंग का पूरा ध्यान ही नहीं रखा जाएगा बल्कि उसका पूरा ब्योरा भी रखा जाएगा। सभी हाथियों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड भी बनेगा।
दुधवा नेशनल पार्क के युवा हाथी बटालिक की मौत के बाद पार्क प्रशासन हाथियों की सेहत के लिए फिक्रमंद हुआ है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने जांच में पाया कि दुधवा के पालतू हाथियों का रखरखाव ठीक नहीं है। उनकी सेहत की नियमित जांच न हो पाने से हाथियों की बीमारी का पता नहीं चल पाता। हाथियों के खान पान की भी समुचित व्यवस्था का अभाव है। इसे देखते हुए उन्होंने केप्टिव एलीफैंट मैनेजमेंट प्लान तैयार कर प्रधान मुख्य संरक्षक वन्यजीव को अनुमोदन के लिए भेजा है।
उन्होंने बताया कि अब हाथियों की सेहत की नियमित जांच होगी। हाथियों की डिवार्मिंग के लिए हर तीन माह बाद दवा दी जाएगी। हर तीसरे माह हाथियों के मल मूत्र और रक्त के नमूने लेकर जांच के लिए आईवीआरआई भेजा जाएगा। जांच में यदि कोई कमी पाई गई तो उसका इलाज विशेषज्ञ डाक्टरों से कराया जाएगा। यहीं नहीं प्रत्येक हाथी का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड भी बनेगा। इसमें हाथियों की उम्र से लेकर उनके स्वास्थ्य की स्थिति, उन्हें कब कौन सी दवा दी गई, किस डाक्टर ने इलाज किया। कितने दिन इलाज चला। मल-मूत्र और रक्त की जांच रिपोर्ट आदि का उल्लेख किया जाएगा।
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यह हेल्थ रिपोर्ट कार्ड हाथी की पर्सनल फाइल में लगाई जाएगी। प्रत्येक हाथी की अलग-अलग बनने वाली फाइल में हेल्थ कार्ड के अलावा हाथी की सेवा में लगे महावत, चारा कटर, कब उसे किस विशेष काम में लगाया गया इसका ब्योरा भी दर्ज होगा। इस प्लान के तहत हाथियों को जंजीरों में बांधकर रखने की बजाय बड़े बाड़े में रखने का प्रस्ताव भी किया गया है ताकि हाथी अपने को आजाद महसूस कर सकें।
केप्टिव एलीफैंट मैनेजमेंट प्लान के तहत हाथियों के खानपान पर भी विशेष ध्यान दिए जाने पर बल दिया गया है। हाथियों को हरे चारे के अलावा नियमित रूप से पौष्टिक भोजन दिए जाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए एलीफैंट मेस दोबारा चालू की जाएगी। हाथियों के पीने के पानी के लिए बेस कैंप के निकट सोलर वाटर पंप लगाया जाएगा। ताकि उन्हें तालाब का गंदा पानी न पीना पड़े। हाथियों से उनकी क्षमता से ज्यादा काम न लिया जाए इसका भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए हाथियों की अलग-अलग लॉग बुक बनाई जाएगी। जिसमें उनके भ्रमण और काम का ब्योरा अंकित रहेगा।
दुधवा नेशनल पार्क में हुए एलीफैंट हेल्थ एंड हैपीनेस कैंप में हाथियों के स्वास्थ्य की जांच के दौरान अधिकांश हाथियों के पेट और लीवर में कीड़े होने की शिकायत मिली है। हाथियों को दवा दे दी गई है। अब हाथियों की सेहत की नियमित जांच होगी। हाथियों को पौष्टिक भोजन देने की व्यवस्था भी की जा रही है। रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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हाथियों की सेहत पर पैनी नजर रखेगा दुधवा प्रशासन
सेहत की जांच के साथ खान पान का भी रहेगा ख्याल
हाथियों की क्षमता से ज्यादा नहीं लिया जाएगा काम
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। हाथियों की सेहत की निगरानी केवल एलीफैंट हेल्थ एंड हैपीनेस कैंप तक ही सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में हाथियों की नियमित जांच और उपचार के लिए एक विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। केप्टिव एलीफैंट मैनेजमेंट प्लान नाम से बनी इस योजना में पालतू हाथियों के रखरखाव, चिकित्सा के साथ-साथ उनके खान पान और हाथियों के काम लेने के ढंग का पूरा ध्यान ही नहीं रखा जाएगा बल्कि उसका पूरा ब्योरा भी रखा जाएगा। सभी हाथियों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड भी बनेगा।
दुधवा नेशनल पार्क के युवा हाथी बटालिक की मौत के बाद पार्क प्रशासन हाथियों की सेहत के लिए फिक्रमंद हुआ है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने जांच में पाया कि दुधवा के पालतू हाथियों का रखरखाव ठीक नहीं है। उनकी सेहत की नियमित जांच न हो पाने से हाथियों की बीमारी का पता नहीं चल पाता। हाथियों के खान पान की भी समुचित व्यवस्था का अभाव है। इसे देखते हुए उन्होंने केप्टिव एलीफैंट मैनेजमेंट प्लान तैयार कर प्रधान मुख्य संरक्षक वन्यजीव को अनुमोदन के लिए भेजा है।
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उन्होंने बताया कि अब हाथियों की सेहत की नियमित जांच होगी। हाथियों की डिवार्मिंग के लिए हर तीन माह बाद दवा दी जाएगी। हर तीसरे माह हाथियों के मल मूत्र और रक्त के नमूने लेकर जांच के लिए आईवीआरआई भेजा जाएगा। जांच में यदि कोई कमी पाई गई तो उसका इलाज विशेषज्ञ डाक्टरों से कराया जाएगा। यहीं नहीं प्रत्येक हाथी का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड भी बनेगा। इसमें हाथियों की उम्र से लेकर उनके स्वास्थ्य की स्थिति, उन्हें कब कौन सी दवा दी गई, किस डाक्टर ने इलाज किया। कितने दिन इलाज चला। मल-मूत्र और रक्त की जांच रिपोर्ट आदि का उल्लेख किया जाएगा।
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यह हेल्थ रिपोर्ट कार्ड हाथी की पर्सनल फाइल में लगाई जाएगी। प्रत्येक हाथी की अलग-अलग बनने वाली फाइल में हेल्थ कार्ड के अलावा हाथी की सेवा में लगे महावत, चारा कटर, कब उसे किस विशेष काम में लगाया गया इसका ब्योरा भी दर्ज होगा। इस प्लान के तहत हाथियों को जंजीरों में बांधकर रखने की बजाय बड़े बाड़े में रखने का प्रस्ताव भी किया गया है ताकि हाथी अपने को आजाद महसूस कर सकें।
केप्टिव एलीफैंट मैनेजमेंट प्लान के तहत हाथियों के खानपान पर भी विशेष ध्यान दिए जाने पर बल दिया गया है। हाथियों को हरे चारे के अलावा नियमित रूप से पौष्टिक भोजन दिए जाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए एलीफैंट मेस दोबारा चालू की जाएगी। हाथियों के पीने के पानी के लिए बेस कैंप के निकट सोलर वाटर पंप लगाया जाएगा। ताकि उन्हें तालाब का गंदा पानी न पीना पड़े। हाथियों से उनकी क्षमता से ज्यादा काम न लिया जाए इसका भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए हाथियों की अलग-अलग लॉग बुक बनाई जाएगी। जिसमें उनके भ्रमण और काम का ब्योरा अंकित रहेगा।
दुधवा नेशनल पार्क में हुए एलीफैंट हेल्थ एंड हैपीनेस कैंप में हाथियों के स्वास्थ्य की जांच के दौरान अधिकांश हाथियों के पेट और लीवर में कीड़े होने की शिकायत मिली है। हाथियों को दवा दे दी गई है। अब हाथियों की सेहत की नियमित जांच होगी। हाथियों को पौष्टिक भोजन देने की व्यवस्था भी की जा रही है। रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व