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मुख्यमंत्री के पांच दौरे, हर बार अलग-अलग अंदाज
Updated Fri, 08 Jun 2018 05:31 PM IST
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मुख्यमंत्री के पांच दौरे, हर बार अलग अंदाज
एक साल के अंदर पांचवीं बार जिले में आए मुख्यमंत्री
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्य नाथ का शुक्रवार को जिले में पांचवां दौरा था। शायद यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री ने एक साल के अंदर एक ही जिले में पांच बार दौरा किया हो। इन दौरों में हर बार अलग अंदाज दिखा। इस बार सीएम का दौरा गांवों के विकास पर केंद्रित था। पिछली बरसात में मुख्यमंत्री ने धौरहरा तहसील के सिसैया गांव में जाकर बाढ़ पीड़ितों का दर्द सुना था। नगर निकाय चुनाव के दौरान उनका तेवर राजनीतिक था तो तीसरी बार बर्ड फेस्टिवल के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री का प्रकृति प्रेम और पर्यटन के प्रति लगाव झलक रहा था।
अपने पांचवें दौरे में शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा की साथ ही कानून व्यवस्था की हकीकत भी जानी। शिकायतों के निस्तारण में हो रही देरी पर उन्होंने अफसरों की क्लास ली। ग्रामीण पेयजल योजना में धांधली पर नाराजगी जताई और जांच के आदेश भी दिए। समीक्षा के दौरान उनका फोकस ग्राम्य विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर रहा।
अधिकारियों की बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने ग्राम स्वाराज योजना के तहत चयनित गांवों के प्रधानों से सीधे संवाद किया। ग्राम्य विकास योजनाओं की जानकारी दी देते हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि गांवों का विकास सरकार की प्राथमिकताओं में है।
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योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार शारदा और घाघरा नदियों से आने वाली बाढ़ और होने वाले कटान का जायजा लेने के लिए सिसैया आए थे। जहां उन्होंने बाढ़ कटान रोकने के स्थाई इंतजाम किए जाने के निर्देश दिए। हर साल नदियों से होने वाली तबाही को लेकर उनके मन में गहरी चिंता थी और पीड़ितों के प्रति संवेदना भी।
मुख्यमंत्री दूसरी बार नगरीय निकाय चुनाव के दौरान आए थे। उस दौरे में उनके तेवर राजनीतिक थे। उन्होंने शहरी लोगों को नगर विकास के सब्जबाग दिखाए। लखीमपुर में यह उनकी चुनावी सभा थी। उस सभा में उन्होंने केवल नगर विकास की बात की और सरकार की योजनाएं बताईं। साथ ही वादों की पोटली भी थमाई।
मुख्यमंत्री तीसरी बार नौ फरवरी 2017 को दुधवा नेशनल पार्क में आयोजित बर्ड फेस्टिवल का उद्घाटन करने आए थे। इस भ्रमण में उनका अपना अलग ही अंदाज दिखा। इसमें उनका प्रकृति प्रेम, वन्यजीवों और पक्षियों के प्रति लगाव झलक रहा था। राजनीतिक बातों से दूर रहकर यहां उन्होंने केवल और केवल ईकोटूरिज्म को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर ही चर्चा की।
चौथे दौरे में सख्त प्रशासक की झलक मिली थी। अप्रैल माह के अंत में आए औचक दौरे में उन्होंने मंडी पहुंचकर गेहूं खरीद का जायजा लिया। गेहूं खरीद में किसान हितों का ख्याल रखने और बिचौलियों से गेहूं न खरीदने की हिदायत देकर किसानों से हमदर्दी दिखाई। शुक्रवार को पांचवां दौरा था जिसमें मुख्यमंत्री का अलग अंदाज दिखा।
एक साल के अंदर पांचवीं बार जिले में आए मुख्यमंत्री
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्य नाथ का शुक्रवार को जिले में पांचवां दौरा था। शायद यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री ने एक साल के अंदर एक ही जिले में पांच बार दौरा किया हो। इन दौरों में हर बार अलग अंदाज दिखा। इस बार सीएम का दौरा गांवों के विकास पर केंद्रित था। पिछली बरसात में मुख्यमंत्री ने धौरहरा तहसील के सिसैया गांव में जाकर बाढ़ पीड़ितों का दर्द सुना था। नगर निकाय चुनाव के दौरान उनका तेवर राजनीतिक था तो तीसरी बार बर्ड फेस्टिवल के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री का प्रकृति प्रेम और पर्यटन के प्रति लगाव झलक रहा था।
अपने पांचवें दौरे में शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा की साथ ही कानून व्यवस्था की हकीकत भी जानी। शिकायतों के निस्तारण में हो रही देरी पर उन्होंने अफसरों की क्लास ली। ग्रामीण पेयजल योजना में धांधली पर नाराजगी जताई और जांच के आदेश भी दिए। समीक्षा के दौरान उनका फोकस ग्राम्य विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर रहा।
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अधिकारियों की बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने ग्राम स्वाराज योजना के तहत चयनित गांवों के प्रधानों से सीधे संवाद किया। ग्राम्य विकास योजनाओं की जानकारी दी देते हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि गांवों का विकास सरकार की प्राथमिकताओं में है।
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योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार शारदा और घाघरा नदियों से आने वाली बाढ़ और होने वाले कटान का जायजा लेने के लिए सिसैया आए थे। जहां उन्होंने बाढ़ कटान रोकने के स्थाई इंतजाम किए जाने के निर्देश दिए। हर साल नदियों से होने वाली तबाही को लेकर उनके मन में गहरी चिंता थी और पीड़ितों के प्रति संवेदना भी।
मुख्यमंत्री दूसरी बार नगरीय निकाय चुनाव के दौरान आए थे। उस दौरे में उनके तेवर राजनीतिक थे। उन्होंने शहरी लोगों को नगर विकास के सब्जबाग दिखाए। लखीमपुर में यह उनकी चुनावी सभा थी। उस सभा में उन्होंने केवल नगर विकास की बात की और सरकार की योजनाएं बताईं। साथ ही वादों की पोटली भी थमाई।
मुख्यमंत्री तीसरी बार नौ फरवरी 2017 को दुधवा नेशनल पार्क में आयोजित बर्ड फेस्टिवल का उद्घाटन करने आए थे। इस भ्रमण में उनका अपना अलग ही अंदाज दिखा। इसमें उनका प्रकृति प्रेम, वन्यजीवों और पक्षियों के प्रति लगाव झलक रहा था। राजनीतिक बातों से दूर रहकर यहां उन्होंने केवल और केवल ईकोटूरिज्म को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर ही चर्चा की।
चौथे दौरे में सख्त प्रशासक की झलक मिली थी। अप्रैल माह के अंत में आए औचक दौरे में उन्होंने मंडी पहुंचकर गेहूं खरीद का जायजा लिया। गेहूं खरीद में किसान हितों का ख्याल रखने और बिचौलियों से गेहूं न खरीदने की हिदायत देकर किसानों से हमदर्दी दिखाई। शुक्रवार को पांचवां दौरा था जिसमें मुख्यमंत्री का अलग अंदाज दिखा।