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गेहूं बरामदगी मामले में अपनी गर्दन बचाने में जुटे अफसर
Updated Sat, 17 Jun 2017 06:19 PM IST
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लखीमपुर खीरी। राजापुर मंडी में 1214 सरकारी बोरों में बरामद गेहूं मामले में डिप्टी आरएमओ ने अज्ञात खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जबकि गेहूं जिन आढ़तियों की दुकानों के सामने मिले, उन्हीं का माना जा रहा था। मंडी के भीतर व्यापारियों के फड़ से गेहूं की बरामदगी के बाद भी अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज कराए जाने से अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी कौशल देव ने बीती आठ जून को सूचना पर एसडीएम सदर आलोक वर्मा के साथ छापा मारकर 1214 सरकारी बोरों में भरा गेहूं बरामद किया था। यह बोरे चबूतरा नंबर तीन और चार के निकट गेहूं भरे 822 सरकारी बोरे, महालक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी के सामने 290 बोरे, दुर्गा ट्रेडिंग कंपनी के सामने 102 बोरे बरामद हुए थे। इनमें प्रत्येक बोरे में 50 किलो गेहूं भरा था। कुल 1214 गेहूं भरे सरकारी बोरों पर किसी ने भी अपना मालिकाना हक नहीं जताया था। उस समय जिला विपणन अधिकारी कौशल देव ने जांच में गेहूं के मालिक का पता सामने आते ही नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इधर गेहूं बरामदगी मामले में सत्तापक्ष के दिग्गजों के शामिल होने की चर्चाएं शुरू हुई, उधर डिप्टी आरएमओ कौशल देव ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। कुल मिलाकर आढ़तियों की फड़ से बरामद गेहूं के बाद भी उसके मालिक का नाम तक पता न चलना, दस दिन बाद भी मामले की जांच एक कदम भी आगे न बढ़ने से ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अफसर भी अपनी गर्दन बचाने में जुटे हैं और मामले को दबाया जा रहा है।
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बरामदगी से सामने आई बिचौलियों के सिंडीकेट की भूमिका
मंडी में सरकारी क्रय केंद्र के बजाय जिस तरह से आढ़तियों के फड़ से सरकारी बोरों में गेहूं भरते पकड़ा गया, उससे सरकारी गेहूं खरीद में बिचौलियों के सिंडीकेट की भूमिका सामने आ गई है। यह वजह रही कि डीएम आकाशदीप ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद भी पूरे मामले की जांच एडीएम न्यायिक राम सुरेश वर्मा को सौंप दी। हालांकि जांच मिलने के बाद भी उन्होंने अभी तक किसी के बयान तक नहीं लिए है। उनका कहना है कि उनकी ड्यूटी योग दिवस में लखनऊ लगा दी गई है। अब वह लौटने के बाद ही जांच करेंगे।
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