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मिशन निदेशक की पड़ी फटकार तो सीएमओ ने जारी किए वेतन रोंकने के आदेश
Updated Wed, 03 Jan 2018 10:05 AM IST
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मिशन निदेशक की फटकार
पर सीएमओ ने रोका वेतन
3658.66 लाख रुपये खर्च न किए जाने का मामला
- एमओआईसी, बीसीपीएम, बीएएम और बीपीएम का वेतन रोकने के हैं आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत जिले को मिले 6088.05 लाख रुपये में से 2631.39 लाख रुपये ही खर्च होने के मामले में मिशन निदेशक ने नाराजगी जताई और सीएमओ सहित डीएएम, डीपीएम एवं डीसीपीएम को पत्र भेजकर फटकार लगाते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी। इस पर सीएमओ ने सीएचसी अधीक्षकों सहित वहां तैनात बीएएम, बीपीएम, बीसीपीएम का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जननी सुरक्षा योजना, परिवार कल्याण, आरकेएसके, एचबीएनसी, टीकाकरण आदि कई कार्यक्रम चल रहे हैं। इनके संचालन और भुगतान आदि के लिए जिले को 2017-18 के लिए 6088.05 लाख की धनराशि अवमुक्त की गई, लेकिन अधिकारी दिसंबर तक सिर्फ 51 प्रतिशत ही धनराशि खर्च कर सके। नौ माह में 51 प्रतिशत धनराशि खर्च होने पर मिशन निदेशक पंकज कुमार ने नाराजगी जताई और पत्र भेजकर सीएमओ सहित डीपीएम इमरान खान, डीएएम सतपाल सिंह और डीसीपीएम हरकीरित सिंह को कार्रवाई की चेतावनी दी। इस पर सीएमओ ने धनराशि खर्च न होने के मामले में सीएचसी अधीक्षक, बीपीएम, बीएएम, बीसीपीएम आदि का वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं।
आशा वर्करों को होता भुगतान तो न आती ये नौबत
जननी सुरक्षा योजना, परिवार कल्याण, नसबंदी, टीकाकरण, बाल स्वास्थ्य आदि मामलों में आशा वर्करों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है, लेकिन सीएचसी स्तर पर बाबू इनका पेमेंट करने में हीलाहवाली करते हैं। इस कारण आशा वर्करों का करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है। यदि इनका भुगतान समय रहते हो गया होता तो आज यह नौबत ही नहीं आती।
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पिछले साल की तुलना में इस बार जिले में अवमुक्त धनराशि में से ज्यादा खर्च हुई है। हालांकि स्टेट की 70 प्रतिशत की तुलना में जिला काफी पीछे है। मार्च तक शत प्रतिशत धनराशि खर्च कर ली जाएगी।
- डॉ. जावेद अहमद सीएमओ
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पर सीएमओ ने रोका वेतन
3658.66 लाख रुपये खर्च न किए जाने का मामला
- एमओआईसी, बीसीपीएम, बीएएम और बीपीएम का वेतन रोकने के हैं आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत जिले को मिले 6088.05 लाख रुपये में से 2631.39 लाख रुपये ही खर्च होने के मामले में मिशन निदेशक ने नाराजगी जताई और सीएमओ सहित डीएएम, डीपीएम एवं डीसीपीएम को पत्र भेजकर फटकार लगाते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी। इस पर सीएमओ ने सीएचसी अधीक्षकों सहित वहां तैनात बीएएम, बीपीएम, बीसीपीएम का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जननी सुरक्षा योजना, परिवार कल्याण, आरकेएसके, एचबीएनसी, टीकाकरण आदि कई कार्यक्रम चल रहे हैं। इनके संचालन और भुगतान आदि के लिए जिले को 2017-18 के लिए 6088.05 लाख की धनराशि अवमुक्त की गई, लेकिन अधिकारी दिसंबर तक सिर्फ 51 प्रतिशत ही धनराशि खर्च कर सके। नौ माह में 51 प्रतिशत धनराशि खर्च होने पर मिशन निदेशक पंकज कुमार ने नाराजगी जताई और पत्र भेजकर सीएमओ सहित डीपीएम इमरान खान, डीएएम सतपाल सिंह और डीसीपीएम हरकीरित सिंह को कार्रवाई की चेतावनी दी। इस पर सीएमओ ने धनराशि खर्च न होने के मामले में सीएचसी अधीक्षक, बीपीएम, बीएएम, बीसीपीएम आदि का वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं।
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आशा वर्करों को होता भुगतान तो न आती ये नौबत
जननी सुरक्षा योजना, परिवार कल्याण, नसबंदी, टीकाकरण, बाल स्वास्थ्य आदि मामलों में आशा वर्करों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है, लेकिन सीएचसी स्तर पर बाबू इनका पेमेंट करने में हीलाहवाली करते हैं। इस कारण आशा वर्करों का करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है। यदि इनका भुगतान समय रहते हो गया होता तो आज यह नौबत ही नहीं आती।
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पिछले साल की तुलना में इस बार जिले में अवमुक्त धनराशि में से ज्यादा खर्च हुई है। हालांकि स्टेट की 70 प्रतिशत की तुलना में जिला काफी पीछे है। मार्च तक शत प्रतिशत धनराशि खर्च कर ली जाएगी।
- डॉ. जावेद अहमद सीएमओ