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ऐशबाग मैलानी रूट पर सिग्नल से होगा संचालन
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लखीमपुर खीरी। आमान परितर्वन के साथ ट्रेन संचालन में टोकन व्यवस्था को भी पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। हालांकि मीटर गेज के समय देवकली स्टेशन से मैलानी तक ही टोकन लेस था, लेकिन ब्राड़गेज निर्माण के दौरान इलेक्ट्रानिक सिस्टम लगने से टोकन व्यवस्था खत्म ही हो गई।
ब्राडगेज ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से हाईटेक होगा। ट्रेन संचालन में चालक को न तो टोकन देने की जरूरत होगी और न ही लेने की। ट्रेन संचालन पूरी तरह से सिग्नल सिस्टम पर आधारित रहेगा। बता दें कि मीटर गेज की ट्रेन संचालन के दौरान देवकली स्टशेन तक ही टोकन सिस्टम प्रणाली लागू थी। देवकली के बाद चालक को फरधान से लेकर मैलानी तक टोकन (छल्ला) का आदान प्रदान की जरूरत नहीं पड़ती थी। इससे चालक को भी ट्रेन संचालन में आसानी रहती थी। इसलिए आमान परिवर्तन के दौरान टोकन सिस्टम को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। ब्राडगेज की ट्रेनों का संचालन पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली पर आधारित होगा।
पेपर लेस हुआ स्टेशन मास्टर का कार्यालय
मीटर गेज ट्रेन संचालन के दौरान स्टेशन मास्टर को ट्रेन के आने और जाने का समय रेलवे के रजिस्टर पर अंकित करना होता था, लेकिन अब सारा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड हो गया है, जिससे अब लिखा पढ़ी करने की जरूरत नहीं होगी।
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स्टेशन मास्टर कक्ष में पैनल के साथ कंप्यूटर भी
रेलवे इंजीनियरों का कहना है कि फिलहाल स्टेशन मास्टर रूम में पैनल एवं कंप्यूटर दोनों की व्यवस्था है, जिससे यदि पैनल में कभी कोई दिक्कत आ जाए तो ट्रेन संचालन न प्रभावित हो और पैनल खराब होने पर कंप्यूटर से ट्रेन संचालन हो सके। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पैनल वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लगाया गया है, क्योंकि भविष्य में कंप्यूटर प्रणाली से ही ट्रेन संचालन होना है।
रेलवे को हाईटेक किया जा रहा है, जिसके तहत स्टेशन पर कंप्यूटराइज्ड पैनल लगाया गया है। इससे ट्रेन संचालन में आसानी होगी।
आलोक कुमार श्रीवास्तव
जनसंपर्क अधिकारी
पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल
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ब्राडगेज ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से हाईटेक होगा। ट्रेन संचालन में चालक को न तो टोकन देने की जरूरत होगी और न ही लेने की। ट्रेन संचालन पूरी तरह से सिग्नल सिस्टम पर आधारित रहेगा। बता दें कि मीटर गेज की ट्रेन संचालन के दौरान देवकली स्टशेन तक ही टोकन सिस्टम प्रणाली लागू थी। देवकली के बाद चालक को फरधान से लेकर मैलानी तक टोकन (छल्ला) का आदान प्रदान की जरूरत नहीं पड़ती थी। इससे चालक को भी ट्रेन संचालन में आसानी रहती थी। इसलिए आमान परिवर्तन के दौरान टोकन सिस्टम को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। ब्राडगेज की ट्रेनों का संचालन पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली पर आधारित होगा।
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पेपर लेस हुआ स्टेशन मास्टर का कार्यालय
मीटर गेज ट्रेन संचालन के दौरान स्टेशन मास्टर को ट्रेन के आने और जाने का समय रेलवे के रजिस्टर पर अंकित करना होता था, लेकिन अब सारा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड हो गया है, जिससे अब लिखा पढ़ी करने की जरूरत नहीं होगी।
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स्टेशन मास्टर कक्ष में पैनल के साथ कंप्यूटर भी
रेलवे इंजीनियरों का कहना है कि फिलहाल स्टेशन मास्टर रूम में पैनल एवं कंप्यूटर दोनों की व्यवस्था है, जिससे यदि पैनल में कभी कोई दिक्कत आ जाए तो ट्रेन संचालन न प्रभावित हो और पैनल खराब होने पर कंप्यूटर से ट्रेन संचालन हो सके। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पैनल वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लगाया गया है, क्योंकि भविष्य में कंप्यूटर प्रणाली से ही ट्रेन संचालन होना है।
रेलवे को हाईटेक किया जा रहा है, जिसके तहत स्टेशन पर कंप्यूटराइज्ड पैनल लगाया गया है। इससे ट्रेन संचालन में आसानी होगी।
आलोक कुमार श्रीवास्तव
जनसंपर्क अधिकारी
पूर्वोत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल