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नसबंदी कराने में पुरुषों से आगे हैं महिलाएं

Mon, 12 Jul 2021 11:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jul 2021 11:45 PM IST
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Women are ahead of men in getting vasectomy
नसबंदी कराने में पुरुषों से आगे हैं महिलाएं
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पडरौना। बढ़ती जनसंख्या और महंगाई के इस दौर में अपने परिवार की जिम्मेदारी लेकर चलने वाले पुरुषों में नसबंदी को लेकर रुचि नहीं दिख रही है। स्वास्थ्य विभाग के पिछले सवा दो साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो यह बात जाहिर हो जाती है। नसबंदी कराने में महिलाएं पुरुषों से काफी आगे हैं। आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2019 से 20 जून तक जनपद में 9979 महिलाओं ने नसबंदी कराई है, लेकिन पुरुषों की बात की जाए तो इनकी संख्या सिर्फ 34 है। जबकि नसबंदी के लिए सरकार की तरफ से प्रोत्साहन धनराशि महिलाओं से अधिक पुरुषों को दी जाती है।
बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री की तरफ से रविवार को उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति 2021-30 की शुरुआत की गई। उन्होंने बढ़ती जनसंख्या को विकास की राह में बाधक बताया था। वर्चुअल बैठक में सीएम ने इस दिशा में व्यापक जागरुकता पर जोर दिया था, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे परिवार नियोजन कार्यक्रम के सबसे प्रभावी उपाय नसबंदी को लेकर पुरुष ही जागरुक नहीं दिख रहे हैं। परिवार की जिम्मेदारी लेकर चलने वाले पुरुष नसबंदी को लेकर नसबंदी की बात आने पर घबराने लगते हैं। नसबंदी के मामले में इनके पिछड़े होने की गवाही स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े ही दे रहे हैं। करीब 36 लाख की आबादी वाले कुशीनगर जिले में महिलाओं के सापेक्ष नसबंदी कराने वाले पुरुषों की संख्या निहायत ही कम है। जबकि पुरुषों की नसबंदी पर शासन-प्रशासन की तरफ से महिलाओं से अधिक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने बताया कि परिवार नियोजन के लिए सरकार नसबंदी कराने वालों को प्रोत्साहित कर रही है। महिलाओं के सापेक्ष पुरुषों की नसबंदी पर प्रोत्साहन राशि अधिक है। नसबंदी कराने वाले ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सरकार की तरफ से दो हजार रुपये तथा शहरी क्षेत्र की महिलाओं को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। प्रोत्साहन के लिए आशा को 300 रुपये दिए जाते हैं, जबकि पुरुष शहरी हों या ग्रामीण, उनके नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इन्हें प्रोत्साहित करने वाली आशा को अलग से 400 रुपये दिए जाते हैं। फिर भी लोग रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसमें तेजी लाने के लिए सीडीओ की तरफ से अब ग्राम प्रधान को एक पुरुष और आशा को एक महिला की नसबंदी अनिवार्य रुप से कराने का निर्देश दिया गया है।
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जिला मिशन परिवार विकास कार्यक्रम में शामिल
कुशीनगर जनपद प्रदेश के 75 जनपदों में से उन 57 जनपदों में है, जहां मिशन परिवार विकास कार्यक्रम संचालित होता है। यह योजना उन जनपदों में लागू की गई है, जहां प्रजनन दर 3.3 टीएफआर (टोटल फर्टिलिटी रेट) है। ऐसे जनपदों में जनसंख्या नियंत्रण के लिए अधिक प्रोत्साहन राशि दी जाती है। मसलन, गोरखपुर में यह दर 2.7 प्रतिशत है तो वहां प्रोत्साहन राशि और इंसेंटिव दर कुशीनगर से कम है।
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