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Kushinagar News: सरकारी मदद न संसाधन, गांव की मिट्टी में पहलवान तराश रहे अली हुसैन
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देवतहा गांव में अखाड़े पर कुश्ती के लिए तैयार युवा।
खुले मैदान में 40 युवाओं को दे रहे कुश्ती का प्रशिक्षण, नशे और गलत संगत से दूर रखने की मुहिम भी
पकड़ियार बाजार। न बेहतर अखाड़ा, न सरकारी मदद और न ही प्रोत्साहन की कोई व्यवस्था। इसके बावजूद नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के देवतहा गांव के अली हुसैन पहलवान गांव की मिट्टी में कुश्ती की प्रतिभाओं को तराशने में जुटे हैं। वह आसपास के गांवों के 40 युवाओं को कुश्ती के दांव-पेच सिखा रहे हैं। उनका मकसद युवाओं को स्वस्थ और अनुशासित बनाने के साथ प्रदेश और देश के लिए बेहतर पहलवान तैयार करना है।
देवतहा गांव के बाहर खुले मैदान में बने अखाड़े पर अली हुसैन हर मौसम में युवाओं को नियमित अभ्यास कराते हैं। बिना किसी सरकारी सहायता के वह अपने स्तर से इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। कुश्ती के तकनीकी गुर सिखाने के साथ युवाओं को मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का महत्व भी समझाते हैं। उनकी कोशिश है कि गांव के युवा खेल को अपना करिअर कॅरिअर बनाएं और नशे व गलत संगत से दूर रहें। अली हुसैन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है।
जरूरत उन्हें सही दिशा, बेहतर प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं देने की है। यदि सरकार और जनप्रतिनिधि ग्रामीण अखाड़ों को संसाधन मुहैया कराएं तो गांव की मिट्टी से निकले पहलवान प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। जिला केसरी से सम्मानित तुफानी पहलवान, विक्की पहलवान, मंजेश पहलवान और बिट्टू पहलवान का कहना है कि आसपास के गांवों के युवाओं में कुश्ती के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
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बिना किसी स्वार्थ के युवाओं को खेल से जोड़ने और उन्हें बेहतर भविष्य की राह दिखाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उनका मानना है कि अखाड़े में जरूरी संसाधन और उचित प्रशिक्षण की सुविधा मिले तो यहां के युवा कुश्ती के क्षेत्र में गांव, जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं।
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पकड़ियार बाजार। न बेहतर अखाड़ा, न सरकारी मदद और न ही प्रोत्साहन की कोई व्यवस्था। इसके बावजूद नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के देवतहा गांव के अली हुसैन पहलवान गांव की मिट्टी में कुश्ती की प्रतिभाओं को तराशने में जुटे हैं। वह आसपास के गांवों के 40 युवाओं को कुश्ती के दांव-पेच सिखा रहे हैं। उनका मकसद युवाओं को स्वस्थ और अनुशासित बनाने के साथ प्रदेश और देश के लिए बेहतर पहलवान तैयार करना है।
देवतहा गांव के बाहर खुले मैदान में बने अखाड़े पर अली हुसैन हर मौसम में युवाओं को नियमित अभ्यास कराते हैं। बिना किसी सरकारी सहायता के वह अपने स्तर से इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। कुश्ती के तकनीकी गुर सिखाने के साथ युवाओं को मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का महत्व भी समझाते हैं। उनकी कोशिश है कि गांव के युवा खेल को अपना करिअर कॅरिअर बनाएं और नशे व गलत संगत से दूर रहें। अली हुसैन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है।
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जरूरत उन्हें सही दिशा, बेहतर प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं देने की है। यदि सरकार और जनप्रतिनिधि ग्रामीण अखाड़ों को संसाधन मुहैया कराएं तो गांव की मिट्टी से निकले पहलवान प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। जिला केसरी से सम्मानित तुफानी पहलवान, विक्की पहलवान, मंजेश पहलवान और बिट्टू पहलवान का कहना है कि आसपास के गांवों के युवाओं में कुश्ती के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
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बिना किसी स्वार्थ के युवाओं को खेल से जोड़ने और उन्हें बेहतर भविष्य की राह दिखाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उनका मानना है कि अखाड़े में जरूरी संसाधन और उचित प्रशिक्षण की सुविधा मिले तो यहां के युवा कुश्ती के क्षेत्र में गांव, जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं।