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जिला अस्पताल में अब शुरू होगा ब्लड कंपोनेंट यूनिट का निर्माण
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जिला अस्पताल में अब शुरू होगा ब्लड कंपोनेंट यूनिट का निर्माण
ब्लड बैंक के ऊपर ही होगा यूनिट का निर्माण
थैलीसिमिया, एनीमिया, हीमोफीलिया, डेंगू या किसी अन्य संक्रमण में मिलेगी मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट यूनिट की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसी हफ्ते इसका निर्माण शुरू हो जाने की संभावना है। इस यूनिट के चालू हो जाने से होल ब्लड चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बाद ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और आरबीसी जैसे तत्वों को अलग करने की सुविधा हो जाएगी। जिस मरीज को खून के जिस तत्व की आवश्यकता होगी, उसे वही चढ़ाया जा सकेगा। इस यूनिट में ब्लड सेपरेशन मशीन लग जाने से थैलीसिमिया, एनीमिया, हीमोफीलिया, डेंगू या किसी अन्य संक्रमण से प्लेटलेट्स घटने के कारण गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों के इलाज में भी मदद मिलेगी और मरीजों को मेडिकल कॉलेज जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में इस यूनिट को लगाने के लिए 150 वर्गमीटर जमीन की आवश्यकता थी। परिसर में अन्य कहीं जगह न मिलने के कारण इसे ब्लड बैंक के ऊपर ही स्थापित करने का निर्णय लिया गया। विभाग के मुताबिक इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सामग्री मंगाई जा रही है। एक सप्ताह के अंदर कार्य शुरू होने की संभावना है।
मेडिकल कॉलेज जाने से मिलेगी निजात
इस मशीन के लग जाने से खून से लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) को अलग करके मरीज को चढ़ाया जा सकेगा। डेंगू सहित कई रोगों में इस तरह के खून की आवश्यकता होती है, लेकिन जिला अस्पताल में सिर्फ होल ब्लड के आदान-प्रदान की ही सुविधा होने की वजह से लोगों को मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। यूनिट लग जाने से यह समस्या दूर हो जाएगी।
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कई रोगों से बचाव में होगा सहायक
ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि ब्लड कंपोनेंट मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग-अलग कर देती है। थैलीसिमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, बर्न के मरीजों को प्लाज्मा, एफएफपी और एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है। यह मशीन आरबीसी, श्वेत रक्त कणिकाएं, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, एफएफपी, लाल रक्त कणिकाएं, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा को अलग-अलग कर देती है। ऐसी स्थिति में मरीज को एक यूनिट खून चढ़ाने की जगह आवश्यक तत्व ही चढ़ाए जाते हैं। इसका लाभ यह होता है कि एक यूनिट खून में से चार मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
जनपद में कहीं नहीं है ब्लड कंपोनेंट मशीन
दुर्घटना से लेकर गंभीर बीमारियों, एनीमिया सहित अन्य स्थितियों में मरीजों को खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है, लेकिन जनपद में कहीं भी ब्लड कंपोनेंट मशीन नहीं है। ऐसे में प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी आदि चढ़ाने के लिए लोगों को मेडिकल कॉलेज लेकर जाना पड़ता है। इसमें समय और धन खर्च होने के अलावा जोखिम भी अधिक रहता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट मशीन लग जाने से यह समस्या दूर होगी।
सीएमएस बोले
ब्लड कंपोनेेंट यूनिट के लिए 150 वर्गमीटर जमीन की आवश्यकता थी। परिसर में जगह न होने की वजह से ब्लड बैंक के ऊपर ही इसे बनाया जाएगा। ब्लड कंपोनेंट यूनिट स्थापित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संबंधित ठेकेदार ने निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री मंगानी शुरू कर दी है। संभावना है कि एक सप्ताह में निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल
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ब्लड बैंक के ऊपर ही होगा यूनिट का निर्माण
थैलीसिमिया, एनीमिया, हीमोफीलिया, डेंगू या किसी अन्य संक्रमण में मिलेगी मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट यूनिट की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसी हफ्ते इसका निर्माण शुरू हो जाने की संभावना है। इस यूनिट के चालू हो जाने से होल ब्लड चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बाद ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और आरबीसी जैसे तत्वों को अलग करने की सुविधा हो जाएगी। जिस मरीज को खून के जिस तत्व की आवश्यकता होगी, उसे वही चढ़ाया जा सकेगा। इस यूनिट में ब्लड सेपरेशन मशीन लग जाने से थैलीसिमिया, एनीमिया, हीमोफीलिया, डेंगू या किसी अन्य संक्रमण से प्लेटलेट्स घटने के कारण गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों के इलाज में भी मदद मिलेगी और मरीजों को मेडिकल कॉलेज जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में इस यूनिट को लगाने के लिए 150 वर्गमीटर जमीन की आवश्यकता थी। परिसर में अन्य कहीं जगह न मिलने के कारण इसे ब्लड बैंक के ऊपर ही स्थापित करने का निर्णय लिया गया। विभाग के मुताबिक इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सामग्री मंगाई जा रही है। एक सप्ताह के अंदर कार्य शुरू होने की संभावना है।
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मेडिकल कॉलेज जाने से मिलेगी निजात
इस मशीन के लग जाने से खून से लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) को अलग करके मरीज को चढ़ाया जा सकेगा। डेंगू सहित कई रोगों में इस तरह के खून की आवश्यकता होती है, लेकिन जिला अस्पताल में सिर्फ होल ब्लड के आदान-प्रदान की ही सुविधा होने की वजह से लोगों को मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। यूनिट लग जाने से यह समस्या दूर हो जाएगी।
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कई रोगों से बचाव में होगा सहायक
ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि ब्लड कंपोनेंट मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग-अलग कर देती है। थैलीसिमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, बर्न के मरीजों को प्लाज्मा, एफएफपी और एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है। यह मशीन आरबीसी, श्वेत रक्त कणिकाएं, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, एफएफपी, लाल रक्त कणिकाएं, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा को अलग-अलग कर देती है। ऐसी स्थिति में मरीज को एक यूनिट खून चढ़ाने की जगह आवश्यक तत्व ही चढ़ाए जाते हैं। इसका लाभ यह होता है कि एक यूनिट खून में से चार मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
जनपद में कहीं नहीं है ब्लड कंपोनेंट मशीन
दुर्घटना से लेकर गंभीर बीमारियों, एनीमिया सहित अन्य स्थितियों में मरीजों को खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है, लेकिन जनपद में कहीं भी ब्लड कंपोनेंट मशीन नहीं है। ऐसे में प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी आदि चढ़ाने के लिए लोगों को मेडिकल कॉलेज लेकर जाना पड़ता है। इसमें समय और धन खर्च होने के अलावा जोखिम भी अधिक रहता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट मशीन लग जाने से यह समस्या दूर होगी।
सीएमएस बोले
ब्लड कंपोनेेंट यूनिट के लिए 150 वर्गमीटर जमीन की आवश्यकता थी। परिसर में जगह न होने की वजह से ब्लड बैंक के ऊपर ही इसे बनाया जाएगा। ब्लड कंपोनेंट यूनिट स्थापित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। संबंधित ठेकेदार ने निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री मंगानी शुरू कर दी है। संभावना है कि एक सप्ताह में निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस जिला अस्पताल