{"_id":"6449785923712922200f7e04","slug":"will-get-the-land-registered-kushinagar-news-c-7-1-141698-2023-04-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: जमीन की रजिस्ट्री तो करा लेंगे, सुविधा शुल्क दिए बिना जमीन पर नहीं मिलेगा मालिकाना हक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: जमीन की रजिस्ट्री तो करा लेंगे, सुविधा शुल्क दिए बिना जमीन पर नहीं मिलेगा मालिकाना हक
Thu, 27 Apr 2023 05:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
Updated Thu, 27 Apr 2023 05:31 PM IST
विज्ञापन
तहसील सदर पडरौना,कुशनगर।संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद सभी क्रेताओं को जमीन का खारिज दाखिल कराना होता है। तभी उन्हें खरीदी गई भूमि का मालिकाना मिलता है। खारिज-दाखिल के लिए लोगों को दो हजार से तीन हजार रुपये अतिरिक्त देने पड़ते हैं। इसे रजिस्ट्री के दौरान क्रेता से ले लिया जाता है। रुपये नहीं मिलने पर संबंधित कर्मचारी कोई न कोई पेच लगाकर फाइल लौटा देते हैं। इस चक्कर में महीनों खारिज दाखिला नहीं हो पा रहा है।
सदर तहसील के निबंधन कार्यालय में रोजाना 50 से अधिक बैनामा (रजिस्ट्री) होती है। इस हिसाब यह खेल करीब 35 से 40 लाख रुपये का है। रजिस्ट्री के दौरान दो प्रतियों में दस्तावेज जमा कराए जाते हैं। लिखा-पढ़ी कर दूसरे दिन एक प्रति तहसील में भेज दी जाती है। इसके 35 दिन के बाद मूल दस्तावेज तहसील में प्रस्तुत करने होते हैं, ताकि खारिज दाखिल हो सके। यदि विक्रेता ने कोई आपत्ति कर द, तो खारिज-दाखिल नहीं हो सकेगा।
तहसील में 45 दिन के भीतर खारिज दाखिल की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन इसमें छह से सात माह का समय लग रहा है। खारिज-दाखिल के लिए बैनामे के बाद से तहसील कर्मचारी रुपये के फेर में लग जाते हैं। तहसील में दो से तीन रुपये की मांग संबंधित खरीदार से की जाती है। रुपये नहीं देने पर कोई न कोई कमी बताकर फाइल लौटा दी जाती है। कई बार ऐसा होता है कि सभी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आवेदक परेशान रहते हैं। वह तहसीलदार से लेकर एसडीएम के दफ्तर तक खारिज दाखिल के लिए दौड़ते रहते हैं।
विज्ञापन
केस एक:
रामपुर खुर्द निवासी महंथी ने उमेश से भूमि का बैनामा कराया। इसके बाद उनकी फाइल 26 दिसंबर 2022 को खारिज दाखिल के लिए तहसील में पहुंच गई, लेकिन अब तक उनका खारिज दाखिल नहीं हो सका है।
केस दो: लक्ष्मीपुर के रवि कुमार ने 26 अक्तूबर माह में ब्रह्मा से भूमि खरीदी। सभी दस्तावेजों के साथ उन्होंने बैनामा कराया। छह माह से उनकी फाइल खारिज दाखिल के लिए तहसील दफ्तर में पड़ी हुई है। वह लगातार इसकी पैरवी कर रहे हैं, लेकिन उनका काम नहीं हो पा रहा है।
केेस तीन:
नोनिया पट्टी निवासी प्रीति ने 17 मार्च 2020 में अनिल से जीमन खरीदी थी। पैनामे के अगले दिन से ही वह खारिज दाखिल के लिए तहसील का चक्कर लगा रहीं हैं, लेकिन अब तक उनका कार्य नहीं हुआ।
केस चार
बधवा निवासी वर्ष 2020 में रामानंद ने रामानंद से और हरका के शाकिर ने बनारसी से जमीन खरीदी थी। इसके बाद से लागातार वह खारिज दाखिल के लिए तहसील में पैरवी कर रहे हैं। अब तक उनके जमीन की खरिज दाखिल नहीं हुई।
...
क्या होता है खारिज-दाखिल
दाखिल खारिज के बाद ही कोई खरीदार (क्रेता) कानूनी रूप से उस भूमि का मालिक बनता है। इसके बाद ही राजस्व के रिकार्ड में खरीदार का नाम संपति के मालिक के रूप में दर्ज होता है। अधिवक्ताओं के अनुसार दाखिल का अर्थ होता है, दर्ज करना तथा खारिज का अर्थ होता है निरस्त करना। अधिवक्ता वेकेंटेशवर नाथ तिवारी ने बताया कि जब किसी भूमि को खरीदा जाता है तो उस संपति से विक्रेता के नाम को निरस्त कराकर क्रेता का नाम दर्ज कराया जाता है। इसी प्रक्रिया को ही दाखिल खारिज कहते हैं। खारिज दाखिल के लिए भूमि और संंबंधित क्रेता और विक्रेता के सभी प्रकार के दस्तावेज जमा कराते हैं, जिनकी जांच करके लेखपाल और कानूनगो रिपोर्ट लगाते हैं। इसके बाद यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
मोटा आसामी है तो रेट हो जाता है ज्यादा
भूमि के बैनामे के बाद जब फाइल तहसील में पहुंचती हैं, तो रुपये लेने का खेल शुरू हो जाता है। तहसील में हर फाइल के पीछे कम से कम दो से तीन रुपये मांगे जाते हैं। इसके अलावा क्रेता की स्थिति को देखकर भी दर तय होती है। यदि किसी ने रुपये देने में आनाकानी की, तो उनकी फाइलों को कोने में रख दिया जाता है। रुपये न मिलने पर फाइलों में किसी तरह की कमी बताकर रकम मांगी जाती है। इसका रेट भी बढ़ जाता है। बताया जाता है कि यदि पहले से फाइल में कोई गड़बड़ी है तो कर्मचारी मुंहमांगी कीमत मांगते हैं। नियम कानून के चक्कर में पड़ने के बजाय लोग पैसे देकर अपना काम करा लेते हैं।
नामांतरण का कोई शुल्क नहीं होता है। लंबित वादों की हर सप्ताह, 15 दिन पर समीक्षा की जाती है। यदि किसी वाद में आपत्ति नहीं दर्ज कराई जाती है तो 45 दिन के भीतर उसका निस्तारण करना होता है। सुविधा शुल्क लेने का कोई मामला सामने तो नहीं आया है, लेकिन किसी भी तहसील में यदि कोई इसके लिए पैसे मांगता है तो इसकी कार्यालय में शिकायत करें। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- सुमित सिंह, तहसीलदार, पडरौना।
खारिज-दाखिल तहसील में नि:शुल्क होती है। इसके नाम पर तहसील में किसी को भी पैसे देने की जरूरत नहीं है। यदि कोई रुपये की मांग करता है, तो कार्यालय में शिकायत करें। शिकायत की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
महात्मा सिंह, सदर एसडीएम।
विज्ञापन
सदर तहसील के निबंधन कार्यालय में रोजाना 50 से अधिक बैनामा (रजिस्ट्री) होती है। इस हिसाब यह खेल करीब 35 से 40 लाख रुपये का है। रजिस्ट्री के दौरान दो प्रतियों में दस्तावेज जमा कराए जाते हैं। लिखा-पढ़ी कर दूसरे दिन एक प्रति तहसील में भेज दी जाती है। इसके 35 दिन के बाद मूल दस्तावेज तहसील में प्रस्तुत करने होते हैं, ताकि खारिज दाखिल हो सके। यदि विक्रेता ने कोई आपत्ति कर द, तो खारिज-दाखिल नहीं हो सकेगा।
विज्ञापन
तहसील में 45 दिन के भीतर खारिज दाखिल की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन इसमें छह से सात माह का समय लग रहा है। खारिज-दाखिल के लिए बैनामे के बाद से तहसील कर्मचारी रुपये के फेर में लग जाते हैं। तहसील में दो से तीन रुपये की मांग संबंधित खरीदार से की जाती है। रुपये नहीं देने पर कोई न कोई कमी बताकर फाइल लौटा दी जाती है। कई बार ऐसा होता है कि सभी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आवेदक परेशान रहते हैं। वह तहसीलदार से लेकर एसडीएम के दफ्तर तक खारिज दाखिल के लिए दौड़ते रहते हैं।
विज्ञापन
केस एक:
रामपुर खुर्द निवासी महंथी ने उमेश से भूमि का बैनामा कराया। इसके बाद उनकी फाइल 26 दिसंबर 2022 को खारिज दाखिल के लिए तहसील में पहुंच गई, लेकिन अब तक उनका खारिज दाखिल नहीं हो सका है।
केस दो: लक्ष्मीपुर के रवि कुमार ने 26 अक्तूबर माह में ब्रह्मा से भूमि खरीदी। सभी दस्तावेजों के साथ उन्होंने बैनामा कराया। छह माह से उनकी फाइल खारिज दाखिल के लिए तहसील दफ्तर में पड़ी हुई है। वह लगातार इसकी पैरवी कर रहे हैं, लेकिन उनका काम नहीं हो पा रहा है।
केेस तीन:
नोनिया पट्टी निवासी प्रीति ने 17 मार्च 2020 में अनिल से जीमन खरीदी थी। पैनामे के अगले दिन से ही वह खारिज दाखिल के लिए तहसील का चक्कर लगा रहीं हैं, लेकिन अब तक उनका कार्य नहीं हुआ।
केस चार
बधवा निवासी वर्ष 2020 में रामानंद ने रामानंद से और हरका के शाकिर ने बनारसी से जमीन खरीदी थी। इसके बाद से लागातार वह खारिज दाखिल के लिए तहसील में पैरवी कर रहे हैं। अब तक उनके जमीन की खरिज दाखिल नहीं हुई।
...
क्या होता है खारिज-दाखिल
दाखिल खारिज के बाद ही कोई खरीदार (क्रेता) कानूनी रूप से उस भूमि का मालिक बनता है। इसके बाद ही राजस्व के रिकार्ड में खरीदार का नाम संपति के मालिक के रूप में दर्ज होता है। अधिवक्ताओं के अनुसार दाखिल का अर्थ होता है, दर्ज करना तथा खारिज का अर्थ होता है निरस्त करना। अधिवक्ता वेकेंटेशवर नाथ तिवारी ने बताया कि जब किसी भूमि को खरीदा जाता है तो उस संपति से विक्रेता के नाम को निरस्त कराकर क्रेता का नाम दर्ज कराया जाता है। इसी प्रक्रिया को ही दाखिल खारिज कहते हैं। खारिज दाखिल के लिए भूमि और संंबंधित क्रेता और विक्रेता के सभी प्रकार के दस्तावेज जमा कराते हैं, जिनकी जांच करके लेखपाल और कानूनगो रिपोर्ट लगाते हैं। इसके बाद यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
मोटा आसामी है तो रेट हो जाता है ज्यादा
भूमि के बैनामे के बाद जब फाइल तहसील में पहुंचती हैं, तो रुपये लेने का खेल शुरू हो जाता है। तहसील में हर फाइल के पीछे कम से कम दो से तीन रुपये मांगे जाते हैं। इसके अलावा क्रेता की स्थिति को देखकर भी दर तय होती है। यदि किसी ने रुपये देने में आनाकानी की, तो उनकी फाइलों को कोने में रख दिया जाता है। रुपये न मिलने पर फाइलों में किसी तरह की कमी बताकर रकम मांगी जाती है। इसका रेट भी बढ़ जाता है। बताया जाता है कि यदि पहले से फाइल में कोई गड़बड़ी है तो कर्मचारी मुंहमांगी कीमत मांगते हैं। नियम कानून के चक्कर में पड़ने के बजाय लोग पैसे देकर अपना काम करा लेते हैं।
नामांतरण का कोई शुल्क नहीं होता है। लंबित वादों की हर सप्ताह, 15 दिन पर समीक्षा की जाती है। यदि किसी वाद में आपत्ति नहीं दर्ज कराई जाती है तो 45 दिन के भीतर उसका निस्तारण करना होता है। सुविधा शुल्क लेने का कोई मामला सामने तो नहीं आया है, लेकिन किसी भी तहसील में यदि कोई इसके लिए पैसे मांगता है तो इसकी कार्यालय में शिकायत करें। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- सुमित सिंह, तहसीलदार, पडरौना।
खारिज-दाखिल तहसील में नि:शुल्क होती है। इसके नाम पर तहसील में किसी को भी पैसे देने की जरूरत नहीं है। यदि कोई रुपये की मांग करता है, तो कार्यालय में शिकायत करें। शिकायत की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
महात्मा सिंह, सदर एसडीएम।