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खड्डा कस्बे के लोग शुद्घ पेयजल के लिए परेशान

Wed, 28 Jul 2021 01:12 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 01:12 AM IST
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water problem since 4 years
चार साल से पेयजल की किल्लत से जूझ रहे हैं बीस हजार लोग
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खड्डा (कुशीनगर)। आदर्श नगर पंचायत का दर्जा पा चुके खड्डा कस्बा में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। बीस हजार की आबादी चार साल से पानी खरीदकर पीने को विवश है। बोरिंग खराब होने से ओवरहेड टैंक से पानी की आपूर्ति ठप है। ऐसा तब है, जब सरकार हर घर नल योजना चलाकर सभी को पेयजल उपलब्ध कराने की बात कह रही है।
नगर पंचायत खड्डा की ओर से बीस हजार आबादी तक पेयजल पहुंचाने के लिए ओवर हेड टैंक का निर्माण वर्तमान नगर पंचायत परिसर में किया गया है। लोगों के घरों मेें चार वर्ष पहले तक इस टैंक से पानी पहुंचता था, लेकिन अव टोटी से पानी निकले चार वर्ष से ज्यादा समय बीत गए। जो लोग साधन संपन्न हैं वे घर में बोरिंग कराकर मोटर लगा लिए हैं। इससे उनकी पेयजल की समस्या हल हो जाती है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दुश्वारी उठानी पड़ रही है।
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नगर पंचायत के लोहिया नगर, पटेल नगर, सुभाष नगर आदि कुछ मोहल्ले चीनी मिल से सटे हैं। यहां लगे हैंडपंप व मोटर से निकलने वाला पानी प्रदूषित, पीला और बदबूदार है। इस पानी से लोग कपड़ा तक नहीं धो पाते हैं। लोग खाना बनाने या अन्य कार्य के लिए पूरी तरह खरीदे गए पानी पर आश्रित हैं।
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कस्बा निवासी गुड्डू गुप्ता, अजय मिश्रा, रोशन लाल भारती, भीम जायसवाल, अनिल गुप्ता, पवन मद्धेशिया, धीरू मद्धेशिया आदि बताते हैं कि एक परिवार एक साल में कम से कम चार से पांच हजार रुपये पानी खरीदने पर खर्च करता है। एक जार पानी न्यूनतम दस रुपये में मिलता है। दो से तीन जार पानी एक दिन में खर्च हो ही जाता है। नगर पंचायत प्रशासन इस मामले में पूरी तरह से मूकदर्शक बना हुआ है। नगर पंचायत के सभासद संतोष तिवारी, पशुपतिनाथ, मधोक गुप्ता, प्रिंस मद्धेशिया आदि इस समस्या के लिए पूरी तरह नगर पंचायत प्रशासन की मनमानी व अनियमित कार्यप्रणाली को जिम्मेदार बता रहे हैं।
कस्बे में दो ओवरहेड टैंक, फिर भी पानी की किल्लत
कहने को नगर पंचायत में दो ओवरहेड टैंक हैं, लेकिन पानी किसी से नहीं मिल रहा है। नगर पंचायत में बहुत पहले जल निगम ने ओवरहेड टैंक बनाया है। इसी से ग्रामीण व नगर में पानी सप्लाई होती थी। नगर पंचायत ने केवल नगर के लिए अलग से ओवरहेड टैंक का निर्माण करा लिया। इसके बाद जल निगम से नगर को सप्लाई बंद हो गई। लगभग दस वर्ष पहले बने नए ओवरहेड टैंक से पानी सप्लाई होती थी। अचानक इसके बोरिंग में गड़बड़ी हो गई और चार साल पहले इसे बड़ी धनराशि खर्च कर नए तरीके से बोर कराया गया। यह बोरिंग भी कुछ माह बाद पुन: ध्वस्त हो गई और सप्लाई ठप हो गई। धीरे-धीरे चार साल गुजर गए। विकास के नाम पर करोड़ों खर्च करने वाली नगर पंचायत अपनी जनता को पेयजल उपलब्ध नहीं करा पाई।
12 से अधिक प्याऊ भी खराब, तहसील मुख्यालय से जुटती है भीड़
खड्डा तहसील मुख्यालय के साथ ही आसपास के लगभग डेढ़ सौ गांवों का प्रमुख व्यावसायिक व शासकीय कार्यों का स्थल है। प्रतिदिन काफी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। उनके पीने के लिए पानी की समस्या रहती है। नगर पंचायत की ओर से सुभाष चौक पर लगभग 7 वर्ष पहले वाटर एटीएम बनाया गया था। इससे एक रुपये लीटर शुद्ध ठंडा पानी मिलता था, लेकिन दो साल से बंद पड़ा है। नगर पंचायत की ओर से एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर बड़ी धनराशि खर्च कर प्याऊ बनाए गए थे। वह पूरी तरह बेकार पड़े हैं। दूरदराज से आने वाले लोग पानी खरीदकर पीने या प्यासे रहने को विवश रहते हैं।

क्या कहते हैं ईओ
ईओ देवेश मिश्रा का कहना है कि बोरिंग खराब हो जाने से जलापूर्ति ठप है। जनता की कठिनाई को दूर करने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए नए स्थान पर बोरिंग कराकर सप्लाई देने में लगभग 37 लाख रुपये का खर्च आएगा। इसके लिए डीपीआर बनाकर शासन को डेढ़ साल पहले ही भेजा गया है, लेकिन धन स्वीकृत नहीं हो पाया है। धन मिलते ही बोर कराकर जलापूर्ति शुरू करा दी जाएगी।
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