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चार वर्ष से आईसीयू भवन को उद्घाटन का इंतजार
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Fri, 09 Mar 2018 12:20 AM IST
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आइसीयू भवन।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। दिल का रोग ऐसा कि यदि अटैक आए तो फिर चंद घंटे या मिनट में ही आदमी को मौत के मुंह में लेकर चला जाता है। आज कल दिल के रोगियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है लेकिन यहां मुख्यालय पर संयुक्त जिला अस्पताल में चार वर्ष पूर्व बना कार्डियोलॉजी विभाग का आईसीयू अब तक उद्घाटन का इंतजार कर रहा है। यही नहीं किसी कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) की तैनाती नहीं है, जिससे हृदय के मरीजों को गोरखपुर या अन्य महानगरों की राह देखनी पड़ती है। ऐसे में कई मरीज तो रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
संयुक्त जिला चिकित्सालय के परिसर में ही चार वर्ष पहले कार्डियोलॉजी विभाग का आईसीयू भवन बना था, ताकि दिल के रोगियों की हालत बिगड़ने पर इसमें तत्काल भर्ती कर उपचार किया जा सके, लेकिन इलाज के मकसद से अभी तक इसका ताला ही नहीं खुला। जैसे ही यहां हृदय रोग से संबंधित मरीज पहुंचते हैं, जांच के बाद इस बीमारी का लक्षण पता चलते ही उन्हें मेडिकल कॉलेज या किसी निजी अस्पताल के डॉक्टर के पास भेज दिया जाता है।
जनपद मुख्यालय पर संयुक्त जिला चिकित्सालय का उद्घाटन 23 नवंबर 2017 को हुआ था। तब से इस अस्पताल में इंसेफेलाइटिस आईसीयू वार्ड, एनआरसी, कार्डियोलॉजी विभाग का आईसीयू सहित कई भवनों का निर्माण तेजी से हुआ। यहां तक कि इस अस्पताल भवन का उच्चीकरण कर 50 बेड के वार्ड का अलग से निर्माण करा दिया गया, लेकिन चिकित्सकीय संसाधनों में इजाफा नहीं हुआ।
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जिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डॉक्टर बजरंगी पांडेय का कहना है कि परिसर में हृदय रोगियों के लिए आईसीयू भवन कई वर्ष पहले बनकर तैयार है, लेकिन कोई कॉर्डियोलॉजिस्ट अब तक तैनात नहीं हुआ। इसलिए यहां हृदय रोग से पीड़ित मरीजों का इलाज नहीं हो पाता है। कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय के परिसर में ही चार वर्ष पहले कार्डियोलॉजी विभाग का आईसीयू भवन बना था, ताकि दिल के रोगियों की हालत बिगड़ने पर इसमें तत्काल भर्ती कर उपचार किया जा सके, लेकिन इलाज के मकसद से अभी तक इसका ताला ही नहीं खुला। जैसे ही यहां हृदय रोग से संबंधित मरीज पहुंचते हैं, जांच के बाद इस बीमारी का लक्षण पता चलते ही उन्हें मेडिकल कॉलेज या किसी निजी अस्पताल के डॉक्टर के पास भेज दिया जाता है।
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जनपद मुख्यालय पर संयुक्त जिला चिकित्सालय का उद्घाटन 23 नवंबर 2017 को हुआ था। तब से इस अस्पताल में इंसेफेलाइटिस आईसीयू वार्ड, एनआरसी, कार्डियोलॉजी विभाग का आईसीयू सहित कई भवनों का निर्माण तेजी से हुआ। यहां तक कि इस अस्पताल भवन का उच्चीकरण कर 50 बेड के वार्ड का अलग से निर्माण करा दिया गया, लेकिन चिकित्सकीय संसाधनों में इजाफा नहीं हुआ।
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जिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डॉक्टर बजरंगी पांडेय का कहना है कि परिसर में हृदय रोगियों के लिए आईसीयू भवन कई वर्ष पहले बनकर तैयार है, लेकिन कोई कॉर्डियोलॉजिस्ट अब तक तैनात नहीं हुआ। इसलिए यहां हृदय रोग से पीड़ित मरीजों का इलाज नहीं हो पाता है। कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।