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वोटर कार्ड की राह देखते ढल गई जवानी, आया बुढ़ापा

Thu, 15 Feb 2018 12:35 AM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
कुश्ाीनगर (ब्यूरो) Updated Thu, 15 Feb 2018 12:35 AM IST
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Voter card has been stuck in the way, Youth came, old age
बिखरी गंदगी। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
पडरौना।  शहर के बेलवा चुंगी चौराहे के बगल में बसे जगदीशपुरम मुहल्ले में शहर के कई बड़े डॉक्टर, वकील, शिक्षक और कर्मचारियों का आवास है। वर्ष 1995 में यह कॉलोनी बसनी शुरू हुई थी। परंतु 23 वर्ष बीतने के बाद भी इसे नगर क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया। आज भी यह क्षेत्र ग्राम पंचायत नोनिया पट्टी व ग्राम पंचायत बेलवा जंगल का हिस्सा बना हुआ है। यहां बसे लोगों को न तो राशनकार्ड बनता है और न ही निर्वाचन कार्ड। इस वीआईपी मुहल्ले में पेयजल, सफाई व पथप्रकाश का भी इंतजाम नहीं है। आपसी सहयोग कर यहां के लोग मुहल्ले की साफ-सफाई कराते हैं। इस मुहल्ले में लगभग दो सौ मकान बने हैं।
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बेलवा चुंगी से सटे जगदीश लाल टिबड़ेवाल का बागीचा हुआ करता था। वर्ष 1995 में इस बगीचे की प्लाटिंग कर लोगों को बेंचा जाने लगा। जल्दी ही भवन निर्माण शुरू हो गए। एक दशक में ही यहां पडरौना शहर की पॉश कॉलोनी विकसित हो गई। डेढ़ हजार से अधिक की आबादी वाली इस कॉलोनी में शिक्षक, वकील और डॉक्टर हैं। मुहल्ले में एक इंटरमीडिएट कॉलेज, एक हाईस्कूल, एक नर्सरी स्कूल समेत एक संगीत महाविद्यालय भी है। शहर के कई बड़े अस्पताल और कोचिंग सेंटर भी इसी मुहल्ले में हैं। फिर भी यह कॉलोनी उपेक्षा का दंश झेल रही है। नगर क्षेत्र में नहीं होने के चलते न तो यहां सफाई कर्मचारी की तैनाती हुई और न ही पेयजल की व्यवस्था है। वर्ष 2005 में नगरपालिका की ओर से पाइप लाइन बिछाकर शुद्घ पेयजल उपलब्ध कराने की तैयारी की गई थी, लेकिन एक दिन की सप्लाई के बाद इसे बंद कर दिया गया। तहसील के खतौनी में इस कॉलोनी का जिक्र नोनियापट्टी आंशिक(नगर क्षेत्र) के रूप में की गई है। 
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यहां के वाशिंदे बताते है कि वर्ष 2013 के समय में फाजिलनगर के विधायक गंगा सिंह कुशवाहा से इस मामले को लेकर संपर्क किया गया। उन्हें पत्र देकर इस कॉलोनी को शहर में शामिल किए जाने की मांग की गई। विधायक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सदन में उठाया भी था। इससे पहले भी कई बार वे लोग डीएम को ज्ञापन सौंप चुके हैं। नगर निकाय से कुछ दिन पहले एसडीएम ने बैठक कर इस कॉलोनी को शहरी क्षेत्र में शामिल कराने का आश्वासन दिया था। परंतु कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। 
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वर्ष 2007 में तत्कालीन विधायक आरपीएन सिंह से यहां के लोगों ने मुलाकात कर बिजली समेत कई अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग की थी। जिस पर विधायक ने अपने निधि से बिजली व नाली निर्माण का खर्च दिया था। कुछ संपर्क मार्ग भी जिला पंचायत की निधि से बनवाए गए। परंतु नगर पालिका या ग्राम पंचायत की तरफ से कोई कार्य नहीं कराया गया। इस मुहल्ले में शहरी बिजली आपूर्ति होती है, मीटर भी लगा है लेकिन पथ प्रकाश के लिए किसी खंभे पर बल्ब तक नहीं लगाया जाता। 


जगदीशपुरम कॉलोनी की दो-तीन सड़कें तो जिला पंचायत व विधायक निधि से बन गईं लेकिन अधिकांश गलियां कच्ची हैं। 23 वर्ष बीत जाने के बाद भी तमाम घरों के लोगों को बरसात में कीचड़ भरी सड़क पर ही उतरना पड़ता है। इन कच्ची सड़कों पर मिट्टी भराई तक का कार्य नहीं कराया जाता। सफाई नहीं होने से जगह-जगह गंदगी जमा रहती है। कच्ची नालियों की वजह से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। 


जगदीशपुरम कॉलोनी में रहने वाले कन्हैया सिंह का कहना था कि कॉलोनी न शहर में है और न ही गांव में। न तो हम यहां पंचायत चुनाव में हिस्सा लेते है और न ही विधानसभा चुनाव में। आखिर हमें किस अपराध की सजा दी जा रही है। 
पूर्व प्रवक्ता ब्रजनारायण पांडेय का कहना है कि कॉलोनी को शहर में शामिल किए जाने की मांग कई बार डीएम से लगायत जनप्रतिनिधियों तक से की जा चुकी है। परंतु आज तक केवल आश्वासन ही मिलता आ रहा है। 

पूर्वांचल बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक अवधेश सिंह बताते हैं कि लोकसभा व विधानसभा चुनाव में मतदान के लिए नेताओं को यहां की समस्या सताती है। चुनाव बीतने के बाद फिर किसी को यह याद नहीं रहता।राजेश पाठक बताते हैं कि बहुत प्रयास के बाद वर्ष 2005 में इस कॉलोनी में पाइप लाइन बिछाया गया था लेकिन एक दिन की जलापूर्ति के बाद ही इसे रोक दिया गया था। शुद्घ पेयजल के लिए यहां के लोगों को रेलवे स्टेशन पर जाना पड़ता है। 
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