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Kushinagar News: लंबे समय से सामाजिक तौर पर विरोध से जांच एजेंसियों के रडार पर आया विनय
Tue, 25 Feb 2025 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 25 Feb 2025 12:06 AM IST
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पडरौना। खुफिया एजेंसियों को 2023 में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में नक्सलियों की ओर से छात्र संगठनों, विभिन्न युवा पॉलिटिकल एक्टिविस्ट और युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं को फंडिंग कर राष्ट्र विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने के संकेत मिले थे। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से जुड़ा एक ऐसा ही छात्र संगठन भगत सिंह मोर्चा है। इसके सदस्य समय-समय पर जांच एजेंसी एनआईए के रडार पर रहे। इसी छात्र मोर्चा का उपाध्यक्ष रहते हुए वाराणसी में सामाजिक-राजनीतिक छात्र संगठन के साथ विनय शर्मा ने लंबे समय तक छात्रों के अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष करते हुए युवाओं को गोलबंद किया। धरना, विरोध प्रदर्शन, लेखनी, भाषण और अन्य जनांदोलनों माध्यम से सरकार के विरोध में आवाज बुलंद करने वाला विनय इसी कारण जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया और उसे नोटिस भेजकर रविवार को चार घंटे पूछताछ की गई। नोटिस के बाद से ही भगत सिंह मोर्चा संगठन के युवाओं ने एकजुट होकर सोशल मीडिया पर एनआईए को खत्म करने के लिए भी आवाज को बुलंदी दी।
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से लेकर सभी संबद्ध महाविद्यालयों में एनजीओ और अन्य संगठनों के माध्यम से राष्ट्र विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने में नक्सलियों की संलिप्तता के ठोस सुबूत राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगे। इसके बाद एनआईए ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) को पुनर्जीवित करने के आरोप में वाराणसी से सितंबर 2023 में ऐसे ही छात्र संगठन भगत सिंह मोर्चा की अध्यक्ष आकांक्षा आजाद को आरोपी बनाते हुए जांच की। इसी छात्र मोर्चा का विनय कुमार शर्मा उपाध्यक्ष रह चुका है। उसने भी आधे दशक तक सामाजिक तौर पर लोगों, विद्यार्थियों और समाज के लिए सड़कों से लेकर धरना और विरोध किया। वर्तमान में उसकी संबद्धता भगत सिंह मोर्चा से नहीं है, लेकिन उसकी भूमिका में बदलाव नहीं हुआ।
पोस्ट ग्रेजुएट हो चुका विनय इन दिनों भले ही किसी छात्र संगठन से जुड़ा नहीं है। फिर भी स्वतंत्र विचारधारा को वह विभिन्न आर्टिकल, मैगजीन, पत्रिका, ब्लॉग और सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर करता है। पद नहीं तो क्या छात्र संगठन भगत सिंह मोर्चा के कार्यक्रमों में जाकर टिप्पणी और भाषण भी देता है। इसका प्रभाव भी दिखा जब विनय शर्मा को नोटिस भेजा गया तो उसने सोशल मीडिया पर छात्र संगठन से मदद को लेकर पोस्ट किया और तब बीएसएम ने गोलबंद होकर सोशल मीडिया से एनआईए पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। यहां तक कि जब नोटिस के बाद विनय को पटहेरवा थाने में पूछताछ के लिए बुलाया गया तो भगत सिंह मोर्चा की अध्यक्ष ने सोशल मीडिया से ही वकील खोजने की मुहिम शुरू कर दी। भगत सिंह मोर्चा से जुड़े सदस्यों पर समय-समय पर जांच एजेंसियां पूछताछ और कार्रवाई करती रही है। एक दशक पूर्व तक वाराणसी में भगत सिंह मोर्चा के सक्रिय सदस्य के तौर पर कार्य करने वाले रोहित राय को भी गिरफ्तार किया गया था।
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प्रारंभिक पढ़ाई से उभरी लिखने-बोलने की शक्ति, छात्रों को भाया
-फाजिलनगर कस्बे के रहने वाले विनय शर्मा की हाईस्कूल 2010 और इंटर 2012 में फाजिलनगर के पावानगर इंटर कॉलेज से हुई है। शुरू से लिखने बोलने वाला विद्यार्थी रहा। यही कारण रहा कि उसने भाषा विज्ञान की पढ़ाई के दौरान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र संगठन से जुड़ा और छात्रों और युवाओं के लिए आवाज बुलंद करने लगा। कई प्रदर्शन, जनांदोलन किया, जिसकी बदौलत भगत सिंह मोर्चा का उपाध्यक्ष भी बना। जीवन में लिखने बोलने का सिलसिला जारी रहे, इसके लिए वह अब स्वतंत्र पॉलिटिकल एक्टिविस्ट के रूप में काम कर रहा है। वहीं भविष्य में वह पत्रकारिता को ध्येय मानता है।
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लखनऊ कॉन्सपिरेसी केस के तहत हुई पूछताछ
लखनऊ कॉन्सपिरेसी केस (आरसी नंबर 1/2023) के अंतर्गत ही विनय कुमार शर्मा से रविवार को एनआईए इंस्पेक्टर ने पूछताछ की। इसमें पहले से ही उत्तर प्रदेश के कई कार्यकर्ताओं को एनआईए की ओर से लगातार जांच के नाम पर पूछताछ की गई है। इसमें सोशल वर्कर से लेकर किसान, नेता, युवा, एक्टिविस्ट शामिल हैं। सितंबर 2023 में भी वाराणसी के अलावा चंदौली, देवरिया, बलिया आदि जिलों में छापा मारकर लोगों से पूछताछ की गई थी।
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प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से लेकर सभी संबद्ध महाविद्यालयों में एनजीओ और अन्य संगठनों के माध्यम से राष्ट्र विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने में नक्सलियों की संलिप्तता के ठोस सुबूत राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगे। इसके बाद एनआईए ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) को पुनर्जीवित करने के आरोप में वाराणसी से सितंबर 2023 में ऐसे ही छात्र संगठन भगत सिंह मोर्चा की अध्यक्ष आकांक्षा आजाद को आरोपी बनाते हुए जांच की। इसी छात्र मोर्चा का विनय कुमार शर्मा उपाध्यक्ष रह चुका है। उसने भी आधे दशक तक सामाजिक तौर पर लोगों, विद्यार्थियों और समाज के लिए सड़कों से लेकर धरना और विरोध किया। वर्तमान में उसकी संबद्धता भगत सिंह मोर्चा से नहीं है, लेकिन उसकी भूमिका में बदलाव नहीं हुआ।
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पोस्ट ग्रेजुएट हो चुका विनय इन दिनों भले ही किसी छात्र संगठन से जुड़ा नहीं है। फिर भी स्वतंत्र विचारधारा को वह विभिन्न आर्टिकल, मैगजीन, पत्रिका, ब्लॉग और सोशल मीडिया के माध्यम से उजागर करता है। पद नहीं तो क्या छात्र संगठन भगत सिंह मोर्चा के कार्यक्रमों में जाकर टिप्पणी और भाषण भी देता है। इसका प्रभाव भी दिखा जब विनय शर्मा को नोटिस भेजा गया तो उसने सोशल मीडिया पर छात्र संगठन से मदद को लेकर पोस्ट किया और तब बीएसएम ने गोलबंद होकर सोशल मीडिया से एनआईए पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। यहां तक कि जब नोटिस के बाद विनय को पटहेरवा थाने में पूछताछ के लिए बुलाया गया तो भगत सिंह मोर्चा की अध्यक्ष ने सोशल मीडिया से ही वकील खोजने की मुहिम शुरू कर दी। भगत सिंह मोर्चा से जुड़े सदस्यों पर समय-समय पर जांच एजेंसियां पूछताछ और कार्रवाई करती रही है। एक दशक पूर्व तक वाराणसी में भगत सिंह मोर्चा के सक्रिय सदस्य के तौर पर कार्य करने वाले रोहित राय को भी गिरफ्तार किया गया था।
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प्रारंभिक पढ़ाई से उभरी लिखने-बोलने की शक्ति, छात्रों को भाया
-फाजिलनगर कस्बे के रहने वाले विनय शर्मा की हाईस्कूल 2010 और इंटर 2012 में फाजिलनगर के पावानगर इंटर कॉलेज से हुई है। शुरू से लिखने बोलने वाला विद्यार्थी रहा। यही कारण रहा कि उसने भाषा विज्ञान की पढ़ाई के दौरान बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र संगठन से जुड़ा और छात्रों और युवाओं के लिए आवाज बुलंद करने लगा। कई प्रदर्शन, जनांदोलन किया, जिसकी बदौलत भगत सिंह मोर्चा का उपाध्यक्ष भी बना। जीवन में लिखने बोलने का सिलसिला जारी रहे, इसके लिए वह अब स्वतंत्र पॉलिटिकल एक्टिविस्ट के रूप में काम कर रहा है। वहीं भविष्य में वह पत्रकारिता को ध्येय मानता है।
लखनऊ कॉन्सपिरेसी केस के तहत हुई पूछताछ
लखनऊ कॉन्सपिरेसी केस (आरसी नंबर 1/2023) के अंतर्गत ही विनय कुमार शर्मा से रविवार को एनआईए इंस्पेक्टर ने पूछताछ की। इसमें पहले से ही उत्तर प्रदेश के कई कार्यकर्ताओं को एनआईए की ओर से लगातार जांच के नाम पर पूछताछ की गई है। इसमें सोशल वर्कर से लेकर किसान, नेता, युवा, एक्टिविस्ट शामिल हैं। सितंबर 2023 में भी वाराणसी के अलावा चंदौली, देवरिया, बलिया आदि जिलों में छापा मारकर लोगों से पूछताछ की गई थी।