{"_id":"6a3c3cd10c40d76ad806c53e","slug":"villages-missing-from-portal-farmers-wandering-for-fertilizer-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-162411-2026-06-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: पोर्टल से 40 गांव गायब, खाद के लिए भटक रहे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: पोर्टल से 40 गांव गायब, खाद के लिए भटक रहे किसान
Thu, 25 Jun 2026 01:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 25 Jun 2026 01:53 AM IST
विज्ञापन
पडरौना। खरीफ सीजन के बीच जिले के करीब 40 गांवों का नाम फार्मर पोर्टल से गायब हैं। इन गांवों को किसानों को सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है। किसान खाद के लिए भटक रहे हैं। उन्हें बाजार से अधिक दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है। इसकी शिकायत डीएम और एसडीएम तक पहुंच रही है। अफसर पोर्टल पर जल्द गांव का नाम दर्ज होने का आश्वासन देकर लौटा दे रहे हैं।
जिले के 21 गांवों की चकबंदी चल रही है, इसके चलते यह गांव अभी तक किसान फार्मर पोर्टल पर नहीं दर्ज हो सके हैं। इसके अलावा 19 गांवों का ब्योरा विभागीय लापरवाही के चलते पोर्टल पर नहीं दर्ज हो सका है।
पोर्टल पर किसानों का विवरण दर्ज न होने के कारण समितियों के सचिव उन्हें उर्वरक देने से इनकार कर रहे हैं। इससे किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए इस समय यूरिया की सबसे अधिक आवश्यकता है, लेकिन पोर्टल पर नाम न होने के कारण उन्हें सरकारी दर पर खाद नहीं मिल पा रही है। कई किसानों को निजी दुकानों से निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत चुकाकर यूरिया खरीदनी पड़ रही है।
विज्ञापन
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने राजस्व परिषद को पत्र भेजकर समस्या के समाधान की मांग की है। हालांकि अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते प्रभावित गांवों के हजारों किसान असमंजस और संकट की स्थिति में हैं। कृषि विभाग के डीडी यतेंद्र सिंह ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए उच्च स्तर पर पत्राचार किया गया है।
राजस्व अभिलेखों और फार्मर पोर्टल के आंकड़ों में विसंगति दूर होने के बाद किसानों के नाम जोड़े जाएंगे। समितियों को सचिव को निर्देश दिया गया है कि इन गांव के किसानों को आधार कार्ड लेकर उर्वर दें। अगर किसी को उर्वर नहीं मिल रहा है तो उसे दिलवाया जाएगा। ़ग्रामीण क्षेत्रों में किसान जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और उन्हें समय से उर्वरक उपलब्ध हो सके।
विज्ञापन
जिले के 21 गांवों की चकबंदी चल रही है, इसके चलते यह गांव अभी तक किसान फार्मर पोर्टल पर नहीं दर्ज हो सके हैं। इसके अलावा 19 गांवों का ब्योरा विभागीय लापरवाही के चलते पोर्टल पर नहीं दर्ज हो सका है।
विज्ञापन
पोर्टल पर किसानों का विवरण दर्ज न होने के कारण समितियों के सचिव उन्हें उर्वरक देने से इनकार कर रहे हैं। इससे किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए इस समय यूरिया की सबसे अधिक आवश्यकता है, लेकिन पोर्टल पर नाम न होने के कारण उन्हें सरकारी दर पर खाद नहीं मिल पा रही है। कई किसानों को निजी दुकानों से निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत चुकाकर यूरिया खरीदनी पड़ रही है।
विज्ञापन
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने राजस्व परिषद को पत्र भेजकर समस्या के समाधान की मांग की है। हालांकि अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते प्रभावित गांवों के हजारों किसान असमंजस और संकट की स्थिति में हैं। कृषि विभाग के डीडी यतेंद्र सिंह ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए उच्च स्तर पर पत्राचार किया गया है।
राजस्व अभिलेखों और फार्मर पोर्टल के आंकड़ों में विसंगति दूर होने के बाद किसानों के नाम जोड़े जाएंगे। समितियों को सचिव को निर्देश दिया गया है कि इन गांव के किसानों को आधार कार्ड लेकर उर्वर दें। अगर किसी को उर्वर नहीं मिल रहा है तो उसे दिलवाया जाएगा। ़ग्रामीण क्षेत्रों में किसान जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और उन्हें समय से उर्वरक उपलब्ध हो सके।