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चैती छठ की व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 02 Apr 2017 11:53 PM IST
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डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया
- फोटो : अमर उजाला
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तमकुहीरोड। रविवार को चैती छठ के अवसर पर सेवरही क्षेत्र की महिलाओं ने निर्जला उपवास कर सूर्य की उपासना की। इन महिलाओं ने परिवार की सुख शांति व संतानों की लंबी उम्र की कामना की। सूर्य उपासना का यह महाव्रत सोमवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा।
सेवरही क्षेत्र में सूर्य उपासना का महाव्रत वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहला कार्तिक महीने में और दूसरा चैत महीने में। रविवार को चैत माह के शुल्क पक्ष की षष्ठी तिथि को सेवरही सहित राजपुर, पिपराघाट, जंगलीपट्टी, दुबौली, ठकरहां, सिसवनिया, टिकुलिया, ब्रह्मपुर, पिरोजहां, बभनौली, तरयासुजान, सलेमगढ़, घघवा जगदीश, परसा, संतपट्टी, तिवारीपट्टी सहित कई गांवों में चैती छठ पर महिलाओं ने निर्जला उपवास रख कर सूर्यदेव की उपासना की। सूर्य उपासना के इस महाव्रत को लेकर गौरीघाट, दमकलघाट, शिवाघाट, गोलाघाट, रुक्मिणीघाट, पिपराघाट सहित अन्य जलाशयों के समीप बने उपासना स्थलों की विशेष साफ सफाई कराई गई थी।
रविवार की शाम इन उपासना स्थलों पर व्रती महिलाओं ने गन्ना, कोसी, अदरक, मूली, हल्दी, नारियल सहित अन्य मौसमी फलों के साथ छठ माता की पूजा की। व्रती महिलाएं सोमवार को सुबह फिर इन घाटों पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर तीन दिन से चले आ रहे व्रत का समापन करेंगी। चैती छठ के महत्व की चर्चा करते हुए पं. संतोष पाठक व पं. नागेंद्र द्विवेदी ने बताया कि यह छठ सूर्य उपासना का महाव्रत है। इस व्रत में निर्जला उपवास रख कर छठ माता की पूजा करने से सुख शांति एवं समृद्धि आती है और संतानों की लंबी उम्र की कामना पूर्ण होती है।
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सेवरही क्षेत्र में सूर्य उपासना का महाव्रत वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहला कार्तिक महीने में और दूसरा चैत महीने में। रविवार को चैत माह के शुल्क पक्ष की षष्ठी तिथि को सेवरही सहित राजपुर, पिपराघाट, जंगलीपट्टी, दुबौली, ठकरहां, सिसवनिया, टिकुलिया, ब्रह्मपुर, पिरोजहां, बभनौली, तरयासुजान, सलेमगढ़, घघवा जगदीश, परसा, संतपट्टी, तिवारीपट्टी सहित कई गांवों में चैती छठ पर महिलाओं ने निर्जला उपवास रख कर सूर्यदेव की उपासना की। सूर्य उपासना के इस महाव्रत को लेकर गौरीघाट, दमकलघाट, शिवाघाट, गोलाघाट, रुक्मिणीघाट, पिपराघाट सहित अन्य जलाशयों के समीप बने उपासना स्थलों की विशेष साफ सफाई कराई गई थी।
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रविवार की शाम इन उपासना स्थलों पर व्रती महिलाओं ने गन्ना, कोसी, अदरक, मूली, हल्दी, नारियल सहित अन्य मौसमी फलों के साथ छठ माता की पूजा की। व्रती महिलाएं सोमवार को सुबह फिर इन घाटों पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर तीन दिन से चले आ रहे व्रत का समापन करेंगी। चैती छठ के महत्व की चर्चा करते हुए पं. संतोष पाठक व पं. नागेंद्र द्विवेदी ने बताया कि यह छठ सूर्य उपासना का महाव्रत है। इस व्रत में निर्जला उपवास रख कर छठ माता की पूजा करने से सुख शांति एवं समृद्धि आती है और संतानों की लंबी उम्र की कामना पूर्ण होती है।
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