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शरीर और मन का संतुलन ही संपूर्ण स्वास्थ्य: डा. रचना पंत

Sat, 01 Aug 2020 06:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2020 06:48 PM IST
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डॉक्टर रचना पंत। - फोटो : KUSHINAGAR
शरीर और मन का संतुलन ही संपूर्ण स्वास्थ्य: डा. रचना पंत
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कसया। संपूर्ण स्वास्थ्य में शरीर ही नहीं बल्कि मन, आत्मा और संवेग भी आते हैं। स्वस्थ रहने के लिए इन सब पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर किसी व्यक्ति के जीवन में शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक अथवा आध्यात्मिक असंतुलन उत्पन्न हो जाए तो उसका संपूर्ण स्वास्थ्य खराब हो जाएगा। इसलिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना भी आवश्यक है।
ये बातें दिल्ली की वरिष्ठ आयुष चिकित्साधिकारी डॉ. रचना पंत ने बुद्ध पीजी कालेज, कुशीनगर के फेसबुक पेज तथागत सहचर पर साझा कीं। समग्र स्वास्थ्य और प्रतिरोधक क्षमता विषयक व्याख्यान में डॉ. पंत ने बताया कि स्वस्थ होने का मतलब शरीर और मन के बीच संतुलन होना है। जहां एक ओर दोष, धातु, अग्नि और मल का संतुलन शरीर को स्वस्थ रखता है, वहीं दूसरी ओर मानसिक स्वास्थ्य आत्मा, इंद्रिय और मन की प्रसन्नता पर निर्भर करता है। इनके बीच असंतुलन हो जाने पर हम बहुत आसानी से शारीरिक और मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।
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डॉ. रचना ने बताया कि इनमे संतुलन के लिए आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य पर ध्यान देना आवश्यक है। आहार हमारी प्रकृति व ऋतु के अनुकूल होना चाहिए। सदैव मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। प्राकृतिक रूप से जो वस्तु जिस ऋतु में उत्पन्न होती है। वह हमारे लिए स्वास्थवर्धक होती हैं। हमें प्रकृति का भी ख्याल रखना चाहिए। कोविड-19 के लिए भी आहार बहुत महत्वपूर्ण है। तुलसी, मुलैठी, गिलोय, सोंठ, कालीमिर्च, दालचीनी, मुनक्का और लौंग से बने काढ़े का सेवन न केवल बीमारी से बचाएगा बल्कि संक्रमित हो जाने पर शीघ्र स्वस्थ भी कर देगा।
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डॉ रचना ने कहा कि यदि बच्चों का समुचित विकास करना है, तो 5 साल 18 वर्ष की अवस्था में ही हमें उन्हें अनुशासित करना होगा। अनुशासन के लिए हमें योग अपनाना होगा, जिसमें सिर्फ आसन नहीं आता बल्कि आठ चरण यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान, धारणा और समाधि आते हैं। इन्हें अपनाने से चित्त की वृत्तियों का निरोध होता है और समग्र स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
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