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लावारिस पड़ी है छठीं शताब्दी की प्रतिमा

Tue, 20 Mar 2018 11:47 PM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
कुश्ाीनगर (ब्यूरो) Updated Tue, 20 Mar 2018 11:47 PM IST
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Unrevealed Statue of the Sixth Century
प्रतिमा - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो

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कसया। कस्बे के पुराने थाना भवन के पीछे काले रंग की एक खंडित मूर्ति लंबे समय से लावारिस हालत में पड़ी है। पुलिस कर्मियों को भी नहीं पता कि यह प्रतिमा यहां कब से पड़ी है। भगवान बुद्घ की तरह दिखने वाली इस प्रतिमा को पुरातत्व विशेषज्ञ छठीं शताब्दी का मान रहे हैं। आश्चर्यजनक यह है कि कुशीनगर में पुरातत्व विभाग का ऑफिस होने के बावजूद उन्हें भी यहां मूर्ति होने की जानकारी नहीं है। इस मूर्ति में मुख्य देवता के अगल-बगल कई अन्य देवी देवताओं की छवि भी उकेरी गई है।

बौद्घकालीन इतिहास से जुड़े कुशीनगर में जब-तब प्राचीन अवशेष मिलते रहते हैं। अधिकांश अवशेष राजकीय बौद्घ संग्रहालय में संरक्षित भी हैं। परंतु कसया के पुराने थाने की बाउंड्री के भीतर काले रंग की एक प्रतिमा बेहद उपेक्षित हालत में पड़ी है। एक दीवार पर रखी इस प्रतिमा को दूर से देखने पर भगवान बुद्घ की छवि का एहसास होता है। प्रतिमा में मुख्य देवता के अगल-बगल कई अन्य देवी-देवताओं की छोटी आकृतियां हैं। खंडित मूर्ति को संरक्षित करने के लिए न तो कसया पुलिस ने प्रयास किया और न ही कुशीनगर स्थित पुरातत्व कार्यालय और संस्कृति विभाग की तरफ से संचालित राजकीय बौद्ध संग्रहालय ने। पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ संरक्षण अधिकारी इंजीनियर पंकज तिवारी का कहना है कि विभाग की तरफ से जहां उत्खनन कराया जाता है, वहां प्राप्त होने वाले अवशेषों को संरक्षित किया जाता है। 
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वहीं राजकीय बौद्ध संग्रहालय के अध्यक्ष अमित द्विवेदी का कहना है कि इतनी प्राचीन मूर्ति के कसया थाने में पड़े होने की कोई जानकारी नहीं है। एसओ से बातचीत करके मूर्ति को संग्रहालय में रखने का प्रयास किया जाएगा। एसओ कसया विनय पाठक का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं कि मूर्ति वहां कबसे और क्यों रखी है। पुरातत्व विभाग से वार्ता करके उसके संरक्षण के लिए प्रयास होगा।
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पुरातत्व विभाग के लखनऊ कार्यालय के विशेषज्ञ नरसिंह त्यागी का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मूर्ति छठीं शताब्दी की प्रतीत हो रही है। इसके प्रभा मंडल में बुद्घ के अलावा कल्कि को भी दर्शाया गया है। कल्कि के नीचे राम का चित्र है। इतनी प्राचीन मूर्ति का उपेक्षित हालत में होना चिंता जनक है। इसको संरक्षित किया जाना जरूरी है।



पुरातत्व विशेषज्ञ नरसिंह त्यागी के अनुसार यह प्रतिमा चतुर्भुजी भगवान विष्णु की है और लाल बालू प्रस्तर पर निर्मित है। प्रतिमा के खंडित भाग में भगवान विष्णु की अति सुंदर मूर्ति को उकेेरा गया होगा। चर्तुभुजी भगवान विष्णु के चारों हाथों में शंख, पद्म, गदा और चक्र धारण किए हुए दर्शाया गया है। प्रभा मंडल के शीर्ष भाग पर मालाधारी विद्याधर गंधर्वों को अंकित किया गया है। प्रतिमा के प्रभा मंडल के दाएं भाग में व्याख्यान मुद्रा में भगवान बुद्घ को एवं बाईं ओर अश्वारूढ़ कल्कि को दर्शाया गया है। कल्कि के ठीक नीचे धनुष-बाण धारण किए राम को प्रदर्शित किया गया है। संभवत: यह प्रतिमा भगवान विष्णु के दशावतारों को प्रदर्शित करती है।
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