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जिला ओडीएफ घोषित होने के तीन साल बाद भी हर घर में नहीं हो पा रहा शौचालय का उपयोग
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18241 घरों में बनेगा शौचालय
शौचालय बनवाने के लिए भेजी गई प्रत्येक लाभार्थी को पहली किस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। तीन साल पहले ओडीएफ घोषित हो चुके जनपद में अब भी शत प्रतिशत घरों में शौचालय का उपयोग नहीं हो पा रहा है। कहीं शौचालय नहीं बने तो कहीं गुणवत्ता इतनी खराब कि उपयोग के लायक नहीं रह गए हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि हर साल बढ़ते परिवारों की वजह से नए जरूरतमंद लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। मौजूदा वर्ष में 18241 घरों में शौचालय बनवाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 21 करोड़ रुपये शासन से भेजे गए। इस धनराशि में से पहली किस्त छह हजार रुपये प्रत्येक लाभार्थी के खाते में भेज दी गई है।
पहले तो पंचायतीराज विभाग लाभार्थियों को शौचालय बनवाकर देता था, लेकिन अब उनके खाते में ही 12 हजार रुपये भेज दिए जाते हैं। इससे पहले लाभार्थी को शौचालय बनवाने का प्रमाण प्रस्तुत करना होता है। यह जनपद वर्ष 2018 में ही ओडीएफ घोषित हो चुका है। इसके बावजूद जिले में अभी भी शौचालयों से वंचित लोगों की संख्या बढ़ी है।
एक तो वजह यह रही कि जल्दबाजी में जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए इक्का-दुक्का पुरवों को ही शौचालय से संतृप्त कर पूरे गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। दूसरी वजह यह है कि वर्ष 2012-13 में शौचालयों के लाभार्थियों का जो सर्वे हुआ था, वह वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर था। जनगणना के बाद इधर करीब दस वर्षों में बहुत से परिवार टूटकर अलग हुए, जिससे लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस साल ऐसे 18241 परिवार चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें शौचालय बनवाने के लिए पहली किस्त छह हजार रुपये भेजी गई है। इस वित्तीय वर्ष में लाभार्थियों के लिए 21 करोड़ रुपये आए थे।
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इस साल 18241 लाभार्थियों का शौचालय बनवाया जाना है। उन्हें छह हजार रुपये की दर से पहली किस्त भेज दी गई है। जो लोग शौचालय बनवाने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे, उन्हें दूसरी किस्त भी भेज दी जाएगी।
- अभय कुमार यादव, डीपीआरओ
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शौचालय बनवाने के लिए भेजी गई प्रत्येक लाभार्थी को पहली किस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। तीन साल पहले ओडीएफ घोषित हो चुके जनपद में अब भी शत प्रतिशत घरों में शौचालय का उपयोग नहीं हो पा रहा है। कहीं शौचालय नहीं बने तो कहीं गुणवत्ता इतनी खराब कि उपयोग के लायक नहीं रह गए हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि हर साल बढ़ते परिवारों की वजह से नए जरूरतमंद लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। मौजूदा वर्ष में 18241 घरों में शौचालय बनवाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए 21 करोड़ रुपये शासन से भेजे गए। इस धनराशि में से पहली किस्त छह हजार रुपये प्रत्येक लाभार्थी के खाते में भेज दी गई है।
पहले तो पंचायतीराज विभाग लाभार्थियों को शौचालय बनवाकर देता था, लेकिन अब उनके खाते में ही 12 हजार रुपये भेज दिए जाते हैं। इससे पहले लाभार्थी को शौचालय बनवाने का प्रमाण प्रस्तुत करना होता है। यह जनपद वर्ष 2018 में ही ओडीएफ घोषित हो चुका है। इसके बावजूद जिले में अभी भी शौचालयों से वंचित लोगों की संख्या बढ़ी है।
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एक तो वजह यह रही कि जल्दबाजी में जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए इक्का-दुक्का पुरवों को ही शौचालय से संतृप्त कर पूरे गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। दूसरी वजह यह है कि वर्ष 2012-13 में शौचालयों के लाभार्थियों का जो सर्वे हुआ था, वह वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर था। जनगणना के बाद इधर करीब दस वर्षों में बहुत से परिवार टूटकर अलग हुए, जिससे लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस साल ऐसे 18241 परिवार चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें शौचालय बनवाने के लिए पहली किस्त छह हजार रुपये भेजी गई है। इस वित्तीय वर्ष में लाभार्थियों के लिए 21 करोड़ रुपये आए थे।
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इस साल 18241 लाभार्थियों का शौचालय बनवाया जाना है। उन्हें छह हजार रुपये की दर से पहली किस्त भेज दी गई है। जो लोग शौचालय बनवाने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे, उन्हें दूसरी किस्त भी भेज दी जाएगी।
- अभय कुमार यादव, डीपीआरओ