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Kushinagar News: शौचालय बना नहीं, बने होने की दे दी रिपोर्ट, तीन साल बाद हुई जानकारी
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पकड़ियार बाजार। नेबुआ नौरंगिया ब्लॉकके सौरहा खुर्द गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय के लिए आवेदन के बावजूद लाभ नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि आवेदन की जांच के दौरान लाभार्थी के घर पहले से शौचालय बना होने की रिपोर्ट लगा दी गई। तीन साल बाद जब आवेदक ने जानकारी ली तो मामले का खुलासा हुआ।
सौरहा खुर्द गांव निवासी अर्जुन ने वर्ष 2023 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन के बाद से वह शौचालय स्वीकृत होने का इंतजार कर रहा था। तीन वर्ष बीतने के बाद भी जब शौचालय की स्वीकृति नहीं मिली तो शुक्रवार को वह ग्राम प्रधान शंभू गुप्ता के साथ ब्लॉक मुख्यालय पहुंचा। एडीओ पंचायत कार्यालय में आवेदन की स्थिति की जानकारी लेने पर पत्रावली की जांच में पता चला कि आवेदक के घर पहले से शौचालय बना होने की रिपोर्ट लगाई गई है। इसी आधार पर उसे अपात्र कर दिया गया।अर्जुन का कहना है कि उसके घर शौचालय बना ही नहीं है। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट में शौचालय बने होने की बात दर्ज कर दी गई, जिससे उसे योजना का लाभ नहीं मिल सका। उसने मामले की जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई और पात्र होने पर शौचालय स्वीकृत कराने की मांग की है। बीडीओ मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। एडीओ पंचायत को जांच के लिए निर्देश दिया गया है। अगर शौचालय नहीं मिला होगा तो उपलब्ध कराया जाएगा।
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52 लोगों की गलत रिपोर्ट लगाने का आरोप
ग्राम प्रधान शंभू गुप्ता ने बताया कि गांव के करीब 52 लोगों के आवेदन में भी इसी तरह पहले से शौचालय बने होने की रिपोर्ट लगा दी गई है। इसके चलते पात्र लोगों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय की स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। उन्होंने मामले की जांच कराकर वास्तविक स्थिति के आधार पर पात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
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सौरहा खुर्द गांव निवासी अर्जुन ने वर्ष 2023 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन के बाद से वह शौचालय स्वीकृत होने का इंतजार कर रहा था। तीन वर्ष बीतने के बाद भी जब शौचालय की स्वीकृति नहीं मिली तो शुक्रवार को वह ग्राम प्रधान शंभू गुप्ता के साथ ब्लॉक मुख्यालय पहुंचा। एडीओ पंचायत कार्यालय में आवेदन की स्थिति की जानकारी लेने पर पत्रावली की जांच में पता चला कि आवेदक के घर पहले से शौचालय बना होने की रिपोर्ट लगाई गई है। इसी आधार पर उसे अपात्र कर दिया गया।अर्जुन का कहना है कि उसके घर शौचालय बना ही नहीं है। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट में शौचालय बने होने की बात दर्ज कर दी गई, जिससे उसे योजना का लाभ नहीं मिल सका। उसने मामले की जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई और पात्र होने पर शौचालय स्वीकृत कराने की मांग की है। बीडीओ मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। एडीओ पंचायत को जांच के लिए निर्देश दिया गया है। अगर शौचालय नहीं मिला होगा तो उपलब्ध कराया जाएगा।
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52 लोगों की गलत रिपोर्ट लगाने का आरोप
ग्राम प्रधान शंभू गुप्ता ने बताया कि गांव के करीब 52 लोगों के आवेदन में भी इसी तरह पहले से शौचालय बने होने की रिपोर्ट लगा दी गई है। इसके चलते पात्र लोगों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय की स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। उन्होंने मामले की जांच कराकर वास्तविक स्थिति के आधार पर पात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
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