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छह माह में नौ लोगों की जान लेने वाला आदमखोर बाघ मारा गया

Sat, 08 Oct 2022 11:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Oct 2022 11:24 PM IST
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tiger killed by shooter
नौ लोगों को मारने वाले बाघ को गोली मार दी गई।संवाद। - फोटो : KUSHINAGAR
छह माह में नौ लोगों की जान लेने वाला आदमखोर बाघ मारा गया
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उत्तर प्रदेश व बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में फैला रखा था आतंक
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से निकलकर आता था आबादी क्षेत्र में
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा (कुशीनगर)। जनपद से सटे बिहार सीमा में तीन दिन में चार और छह माह में नौ लोगों की जान लेने वाले आदमखोर बाघ को शनिवार को गोली मार दी गई। उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंक फैला रखे आदमखोर बाघ को मारने के लिए शुक्रवार को आदेश जारी किया गया था।
कुशीनगर जनपद से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से निकल कर रिहाइशी इलाके में आकर लोगों की जान लेने वाले बाघ ने शनिवार को बलुआ गांव निवासी बबिता देवी (40) और उनके पुत्र शिवम (सात) पर हमला करके मार दिया था। मां-बेटा पशुओं के लिए सरेह में चारा लाने गए थे। काफी मशक्कत के बाद दोनों का शव मिला था।
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इससे पहले सात अक्तूबर को संजय महतो (35), पांच अक्तूबर को बगड़ी कुमारी (12), 21 सितंबर को रामप्रसाद उरांव (65), 12 सितंबर को प्रेमकुमारी देवी (40), 15 जुलाई को धर्मराज काजी (60), 20 मई को पार्वती देवी (50) और 14 मई को राजकुमार बैठा (12) की मौत बाघ के हमले में हो चुकी है। बाघ के लगातार हमले से आक्रोशित ग्रामीण बाघ को मारने की मांग कर रहे थे। लोगों में वन विभाग व पुलिस के प्रति नाराजगी थी।
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जहां मां-बेटे को मारा, वहीं मारी बाघ को गोली
मई से अब तक नौ लोगों की जान जाने के बाद बाघ को आदमखोर मानते हुए उसे जान से मारने के लिए वीटीआर के सीएफ नेसामनी ने सीएनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) से अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलते ही बाघ को मार दिया गया। लगभग सात शूटरों को अत्याधुनिक असलहे के साथ शनिवार को तैनात किया गया था। बाघ की संभावित मौजूदगी वाले क्षेत्रों में विशेष वाहन से निशानेबाज जवान कांबिग कर रहे थे। दोपहर बाद बलुआ गांव के पास बाघ और शूटरों का आमना-सामना हुआ, जिसमें बाघ मारा गया।

पहले पकड़ने की कोशिश की
चार सौ वन कर्मचारी और दक्षिण भारत एवं नेपाल से बुलाए गए विशेषज्ञ इस खतरनाक बाघ को नहीं पकड़ पाए थे। रिहाइशी इलाके से बाघ को जंगल में सुरक्षित क्षेत्र में ले जाने के लिए वीटीआर प्रशासन एवं जिला प्रशासन ने नेपाल के चितवन प्राणि उद्यान सहित दक्षिण भारत से विशेषज्ञ बुलाकर बाघ को बेहोश कर पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। लगभग चार सौ वनकर्मी तैनात थे। फिर भी बाघ चकमा देकर लोगों की जान ले रहा था।
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