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Kushinagar News: बार-बार दिख रहा बाघ...वन विभाग कर रहा नजरअंदाज
Sat, 21 Jun 2025 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 21 Jun 2025 11:57 PM IST
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खड्डा। कोपजंगल गांव के टोला छपिया में शनिवार को गांव के मुलायम के घर के पीछे फिर बाघ चहलकदमी करता नजर आया। तीन दिन में यह तीसरा मौका है जब लोगों का बाघ से आमना-सामना हुआ है। वहीं बाघ एक झोपड़ी में बंधे बकरे को भी शिकार बना चुका है, लेकिन वन विभाग की इसे नजर अंदाज कर रही है।
लापरवाही का आलम यह है कि अब तक बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा तक नहीं लगाया गया। सूचना पर गांव में पहुंची वन विभाग की टीम गांव वालों को सतर्क कर लौट जा रही है, इससे गांव वाले दहशत में हैं। कोपजंगल गांव के टोला छपिया में शनिवार की दोपहर में छत पर सूखने के लिए रखा मुलायम का कपड़ा घर के पीछे गिर गया था। जब व कपड़ा उठाने पहुंचे तो वहां बाघ को बैठा देखा, शोर मचाते हुए भागे। इसके बाद गांव के लोग लाठी-डंडा लेकर दौड़ पड़े, लेकिन बाघ गांव से बाहर खेतों में लगी फसल के बीच भाग गया। शुक्रवार की शाम गांव के शंकर राय के घर की महिला अन्य महिलाओं के साथ बकरी चरा रही थी तभी बाघ ने बकरी पर हमला कर दिया, इससे वह घायल हो गईं। शोर मचाने पर बाघ भाग गया।
इसी दिन घास काटने गई महिलाओं ने भी उसे देखा था। बुधवार की रात में मुकेश पाल के बकरे को उठा ले गया और मार डाला। वहीं सो रहे दो युवक बाल बाल बचे थे। चार दिन से लगातार हिंसक जानवर उत्पात मचा रहा है। गांव वाले इसे बाघ व इसका शावक साथ होने का दावा कर रहे हैं, जबकि वन विभाग अभी यह नहीं जान पाया है कि जानवर बाघ है या कोई और जानवर। इसको लेकर असमंजस में पड़ा है। वनकर्मियों का कहना है कि जब तक हम लोग अपनी आंखों से नहीं देखेंगे तब तक कैसे मान लिया जाए कि बाघ है। सुरक्षा को लेकर गांव वालों को सतर्क किया जा रहा है। सूचना पर टीम पहुंच रही है। ग्राम प्रधान यशवंत कुशवाहा ने बताया कि वन विभाग कोई ठोस इंतजाम नहीं कर रहा है। खड्डा के रेंजर अमृता चंद का कहना है कि जानवर की पहचान के साथ ही उसे काबू में करने की कोशिश चल रही है।
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लापरवाही का आलम यह है कि अब तक बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा तक नहीं लगाया गया। सूचना पर गांव में पहुंची वन विभाग की टीम गांव वालों को सतर्क कर लौट जा रही है, इससे गांव वाले दहशत में हैं। कोपजंगल गांव के टोला छपिया में शनिवार की दोपहर में छत पर सूखने के लिए रखा मुलायम का कपड़ा घर के पीछे गिर गया था। जब व कपड़ा उठाने पहुंचे तो वहां बाघ को बैठा देखा, शोर मचाते हुए भागे। इसके बाद गांव के लोग लाठी-डंडा लेकर दौड़ पड़े, लेकिन बाघ गांव से बाहर खेतों में लगी फसल के बीच भाग गया। शुक्रवार की शाम गांव के शंकर राय के घर की महिला अन्य महिलाओं के साथ बकरी चरा रही थी तभी बाघ ने बकरी पर हमला कर दिया, इससे वह घायल हो गईं। शोर मचाने पर बाघ भाग गया।
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इसी दिन घास काटने गई महिलाओं ने भी उसे देखा था। बुधवार की रात में मुकेश पाल के बकरे को उठा ले गया और मार डाला। वहीं सो रहे दो युवक बाल बाल बचे थे। चार दिन से लगातार हिंसक जानवर उत्पात मचा रहा है। गांव वाले इसे बाघ व इसका शावक साथ होने का दावा कर रहे हैं, जबकि वन विभाग अभी यह नहीं जान पाया है कि जानवर बाघ है या कोई और जानवर। इसको लेकर असमंजस में पड़ा है। वनकर्मियों का कहना है कि जब तक हम लोग अपनी आंखों से नहीं देखेंगे तब तक कैसे मान लिया जाए कि बाघ है। सुरक्षा को लेकर गांव वालों को सतर्क किया जा रहा है। सूचना पर टीम पहुंच रही है। ग्राम प्रधान यशवंत कुशवाहा ने बताया कि वन विभाग कोई ठोस इंतजाम नहीं कर रहा है। खड्डा के रेंजर अमृता चंद का कहना है कि जानवर की पहचान के साथ ही उसे काबू में करने की कोशिश चल रही है।
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