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Kushinagar News: तीन निजी अस्पतालों को किया सील, नीम-हकीम कर रहे थे इलाज
Mon, 16 Dec 2024 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 16 Dec 2024 11:59 PM IST
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पडरौना। नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र में अवैध तरीके से संचालित हो रहे तीन निजी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सील कर दिया। जांच में पता चला कि तीनों अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन नहीं है और दीवारों तथा बोर्ड पर लिखे गए नामी गिरामी डॉक्टर भी वहां नहीं मिले। अस्पताल सील कर संचालकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। बड़े डॉक्टरों का बोर्ड पर नाम लिखवाकर नीम-हकीम मरीजों का इलाज कर रहे थे।
डीएम विशाल भारद्वाज की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई तेज हो गई है। नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के कोटवा-मोतीछापर रोड पर संचालित रवि मैक्स हाॅस्पिटल, कृष्णा क्लीनिक एवं चाइल्ड केयर और परसौनी में संचालित मां दुर्गा हाॅस्पिटल एवं चाइल्ड केयर पर सीएचसी प्रभारी डॉ. रंजन मौर्य अपनी टीम के साथ पहुंचे। स्वास्थ्य टीम को देख संचालक घबरा गए और मरीजों को बिना इलाज किए हटाने लगे।
टीम की जांच में तीनों अस्पताल संचालकों ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन अभी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है। जिन डॉक्टरों का नाम बोर्ड पर लिखवाया गया था, वह डॉक्टर भी नहीं मिले। फोन पर बात कराने के लिए टीम सदस्यों ने कहा तो संचालक कन्नी काटने लगा और बात नहीं कराया। एक संचालक ने तो अपना नाम और फिजीशियन दीवार पर खुद लिखवाया था और फिजीशियन की डिग्री भी। पूछने पर न तो वह टीम को अपना डिग्री दिखा सका और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। े
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डीएम विशाल भारद्वाज की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई तेज हो गई है। नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के कोटवा-मोतीछापर रोड पर संचालित रवि मैक्स हाॅस्पिटल, कृष्णा क्लीनिक एवं चाइल्ड केयर और परसौनी में संचालित मां दुर्गा हाॅस्पिटल एवं चाइल्ड केयर पर सीएचसी प्रभारी डॉ. रंजन मौर्य अपनी टीम के साथ पहुंचे। स्वास्थ्य टीम को देख संचालक घबरा गए और मरीजों को बिना इलाज किए हटाने लगे।
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टीम की जांच में तीनों अस्पताल संचालकों ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया गया है, लेकिन अभी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है। जिन डॉक्टरों का नाम बोर्ड पर लिखवाया गया था, वह डॉक्टर भी नहीं मिले। फोन पर बात कराने के लिए टीम सदस्यों ने कहा तो संचालक कन्नी काटने लगा और बात नहीं कराया। एक संचालक ने तो अपना नाम और फिजीशियन दीवार पर खुद लिखवाया था और फिजीशियन की डिग्री भी। पूछने पर न तो वह टीम को अपना डिग्री दिखा सका और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। े
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