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Kushinagar News: सत्यापन में तीन और परवाना मिले फर्जी, एडीएम करेंगे जांच
Sat, 15 Feb 2025 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 15 Feb 2025 12:09 AM IST
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खड्डा। एआरओ कोर्ट के फर्जी आदेश पर जारी परवाना के आधार पर राजस्व अभिलेखों में फर्जीवाड़े की शुरू हुई जांच में तीन और मामले सामने आए हैं।
शुक्रवार को परवाना की जांच करने गोरखपुर एआरओ कार्यालय गोरखपुर सत्यापन के लिए पहुंची दो सदस्यीय टीम को पता चला कि 14 नहीं, 17 परवाना फर्जी तरीके से भेजे गए हैं। टीम ने फर्जीवाड़े में इस्तेमाल पत्रावलियों को कब्जे में ले लिया है। डीएम ने एडीएम न्यायिक को जांच का आदेश दिया है।
खड्डा तहसील क्षेत्र के नदी उस पार बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर आदि गांव के अनेक काश्तकारों के खतौनी पर अपना नाम दर्ज कराने का खेल करीब दो साल से खड्डा तहसील की मिलीभगत से चल रहा है। कई ऐसे काश्तकार ऐसे हैं जिनको पता भी नहीं है और उनकी जमीन पर भू माफिया ने जालसाजी कर नाम दर्ज करा लिया है। इसकी शिकायत पहुंचने के बाद तहसीलदार खड्डा महेश कुमार के नेतृत्व में जांच शुरू हुई। इसके लिए दो टीम भी गठित की गई है।
तहसीलदार की छानबीन मेंं पहले दो, फिर चौदह और अब फर्जी परवाना व आदेश से संबंधित तीन और मामले सामने आए हैं। शुक्रवार को तहसीलदार के आदेश पर राजस्व निरीक्षक व लेखपाल की दो सदस्यीय टीम एआरओ कोर्ट गोरखपुर पहुंची।
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वहां से भेजे गए परवाना व आदेश का सत्यापन करा रही है। पूरी रिपोर्ट तहसीलदार को सौंपी जाएगी। तहसीलदार महेश कुमार ने बताया कि दो सदस्यीय टीम गोरखपुर एआरओ कार्यालय में सत्यापन के लिए भेजी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। अभी तक की जांच में 17 मामले सामने आए हैं।
रिकार्ड ऑपरेशन में शामिल हुए थे 42 राजस्व गांव
खड्डा। वर्ष 1989 में हुए मरचहवा नरसंहार के बाद नदी किनारे के 42 राजस्व गांवों में रिकाॅर्ड ऑपरेशन के लिए वर्ष 1990-91 में सरकारी आदेश हुआ। बाद में सात गांव और शामिल कर लिए गए। उस समय रिकाॅर्ड ऑपरेशन का मुख्यालय बलिया जिले के अधीन था।
इस क्रम में सर्वे नायब तहसीलदार का एक कार्यालय खड्डा कस्बे में सुभाष चौक पर किराए के मकान में स्थापित हुआ। कुछ साल बाद बलिया से हटाकर गोरखपुर मुख्यालय से एआरओ कार्यालय संबद्ध कर दिया गया। बलिया से सभी अभिलेख गोरखपुर लाए गए।
इस दौरान कई अभिलेख इधर-उधर हो गए। काश्तकारों को अपने मुकदमे आदि के पैरवी के लिए गोरखपुर जाना पड़ता है। वर्ष 1998-99 में मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर सहित नौ गांव का अभिलेख दुरुस्त कर पडरौना जिला मुख्यालय में जमा करा दिया गया। लेकिन, दूसरी प्रति तत्कालीन पडरौना तहसील को वर्ष 2012 में जमा की गई।
इसी तरह अन्य गांव के अभिलेख भी समय-समय पर तहसील में जमा होते रहे। कानूनी जानकारों के अनुसार सभी कार्रवाई पूरी कर एक बार जिल्द व अभिलेख तहसील में जमा हो गए तो गोरखपुर रिकॉर्ड ऑपरेशन कार्यालय या न्यायालय से कोई लेना देना नहीं रह जाता है। ऐसे में वहां के एआरओ कोर्ट से आदेश व परवाना लाया जाना ही गलत है।
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शुक्रवार को परवाना की जांच करने गोरखपुर एआरओ कार्यालय गोरखपुर सत्यापन के लिए पहुंची दो सदस्यीय टीम को पता चला कि 14 नहीं, 17 परवाना फर्जी तरीके से भेजे गए हैं। टीम ने फर्जीवाड़े में इस्तेमाल पत्रावलियों को कब्जे में ले लिया है। डीएम ने एडीएम न्यायिक को जांच का आदेश दिया है।
खड्डा तहसील क्षेत्र के नदी उस पार बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर आदि गांव के अनेक काश्तकारों के खतौनी पर अपना नाम दर्ज कराने का खेल करीब दो साल से खड्डा तहसील की मिलीभगत से चल रहा है। कई ऐसे काश्तकार ऐसे हैं जिनको पता भी नहीं है और उनकी जमीन पर भू माफिया ने जालसाजी कर नाम दर्ज करा लिया है। इसकी शिकायत पहुंचने के बाद तहसीलदार खड्डा महेश कुमार के नेतृत्व में जांच शुरू हुई। इसके लिए दो टीम भी गठित की गई है।
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तहसीलदार की छानबीन मेंं पहले दो, फिर चौदह और अब फर्जी परवाना व आदेश से संबंधित तीन और मामले सामने आए हैं। शुक्रवार को तहसीलदार के आदेश पर राजस्व निरीक्षक व लेखपाल की दो सदस्यीय टीम एआरओ कोर्ट गोरखपुर पहुंची।
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वहां से भेजे गए परवाना व आदेश का सत्यापन करा रही है। पूरी रिपोर्ट तहसीलदार को सौंपी जाएगी। तहसीलदार महेश कुमार ने बताया कि दो सदस्यीय टीम गोरखपुर एआरओ कार्यालय में सत्यापन के लिए भेजी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। अभी तक की जांच में 17 मामले सामने आए हैं।
रिकार्ड ऑपरेशन में शामिल हुए थे 42 राजस्व गांव
खड्डा। वर्ष 1989 में हुए मरचहवा नरसंहार के बाद नदी किनारे के 42 राजस्व गांवों में रिकाॅर्ड ऑपरेशन के लिए वर्ष 1990-91 में सरकारी आदेश हुआ। बाद में सात गांव और शामिल कर लिए गए। उस समय रिकाॅर्ड ऑपरेशन का मुख्यालय बलिया जिले के अधीन था।
इस क्रम में सर्वे नायब तहसीलदार का एक कार्यालय खड्डा कस्बे में सुभाष चौक पर किराए के मकान में स्थापित हुआ। कुछ साल बाद बलिया से हटाकर गोरखपुर मुख्यालय से एआरओ कार्यालय संबद्ध कर दिया गया। बलिया से सभी अभिलेख गोरखपुर लाए गए।
इस दौरान कई अभिलेख इधर-उधर हो गए। काश्तकारों को अपने मुकदमे आदि के पैरवी के लिए गोरखपुर जाना पड़ता है। वर्ष 1998-99 में मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर सहित नौ गांव का अभिलेख दुरुस्त कर पडरौना जिला मुख्यालय में जमा करा दिया गया। लेकिन, दूसरी प्रति तत्कालीन पडरौना तहसील को वर्ष 2012 में जमा की गई।
इसी तरह अन्य गांव के अभिलेख भी समय-समय पर तहसील में जमा होते रहे। कानूनी जानकारों के अनुसार सभी कार्रवाई पूरी कर एक बार जिल्द व अभिलेख तहसील में जमा हो गए तो गोरखपुर रिकॉर्ड ऑपरेशन कार्यालय या न्यायालय से कोई लेना देना नहीं रह जाता है। ऐसे में वहां के एआरओ कोर्ट से आदेश व परवाना लाया जाना ही गलत है।