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Kushinagar News: कागजों दिखा दिया था मृत...सत्यापन में जिंदा मिले 885 बुजुर्ग
Mon, 09 Mar 2026 02:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 09 Mar 2026 02:32 AM IST
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कुशीनगर। डीएम कार्यालय में तमकुहीराज के लछिया देवरिया के 75 वर्षीय बुजुर्ग शंकर कागजों में 'मर' चुके थे और इनकी पेंशन करीब एक साल से बंद थी। करीब एक माह पूर्व रोते हुए डीएम महेंद्र सिंह तंवर के कार्यालय में पहुंचे शंकर ने खुद को जिंदा बताया और वृद्धावस्था पेंशन चालू कराने की मांग की। बुजुर्ग की बेबसी देख डीएम ने समाज कल्याण अधिकारी को सत्यापन कराने का निर्देश दिया। सचिव की ओर से किए गए सत्यापन में कागजों में 'मर' चुके 885 बुजुर्ग जिंदा निकले। वृद्धावस्था पेंशन से वंचित इन बुजुर्गों को अब इस महीने से पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी। इस खबर से शंकर भावुक हो गए। उनकी आंखों से आंसू निकल आए। जिले में वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों की संख्या 1,62,235 है।
बुजुर्गों को मिलने वाला वृद्धा पेंशन जिले में जिम्मेदारों की लापरवाही का भेंट चढ़ता जा रहा है। जिला बुजुर्गों को सचिव बिना गांव में फर्जी रिपोर्ट लगाकर कागजों में मृत दिखा दे रहे हैं, पेंशन बंद होने के बाद बुजुर्ग अफसरों के कार्यालय का खुद को जिंदा साबित करने के लिए चक्कर लगा रहे हैं, संपूर्ण समाधान दिवस के अलावा डीएम की जनसुनवाई के दौरान भी ऐसी शिकायत लेकर बुजुर्ग पहुंचते रहते हैं।
फरवरी में तमकुहीराज के लछिया देवरिया गांव निवासी 75 वर्षीय शंकर डीएम के कार्यालय में पहुंचे लड़खड़ाती जुबान से अपनी बात भी पूरी नहीं बता पाए और रोने लगे। डीएम भावुक हो गए और उनके पास पहुंच गए। पूरी बात जानने के बाद डीएम ने समाज कल्याण अधिकारी को वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 के वृद्धावस्था पेंशन लाभार्थियों का सर्वे कराने का निर्देश दिया। समाज कल्याण अधिकारी से सभी बीडीओ को पत्र लिखा, लेकिन बीडीओ ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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फरवरी के अंतिम सप्ताह में पडरौना में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एक महिला ऐसी ही शिकायत लेकर पहुंची और बताया कि सचिव ने उसको कागजों में मृत दिखा दिया है। इससे उनको पेंशन नहीं मिल रही है। डीएम नाराज हुए और समाज कल्याण अधिकारी को तलब किया। बीडीओ की लापरवाही सामने आने के बाद सभी को फटकार लगाई और दस दिन के अंदर सचिवों ने सर्वे का कार्य पूरा कर लिया। बीडीओ की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में जिन 885 बुजुर्गों को मृत दिखाया गया था वे सभी जिंदा मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि इसमें नौ सचिव ऐसे हैं, जो पूर्व में इन बुजुर्गों को मृत होने की रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को भेज चुके थे।
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केस एक
लछिया देवरिया गांव निवासी शंकर के गांव में 26 बुजुर्गों को कागजों में सचिव ने मृत दिखाया था, डीएम के निर्देश पर हुए सत्यापन में 26 में से 23 बुजुर्ग जिंदा मिले,जो सचिव सत्यापन के बाद जिंदा होने की रिपोर्ट भेजी है। वही सचिव ने इन बुजुर्गों को मृत बताया था।
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केस दो
सेवरही के रधिया देवरिया गांव में 43 बुजुर्गों को सचिव ने अपनी रिपोर्ट में मृत बताया था। इस आधार पर इनकी वृद्धावस्था पेंशन भी बंद हो गई थी। दोबारा सत्यापन हुआ तो 43 में से 19 बुजुर्ग जीवित मिले हैं। सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाकर ये बुजुर्ग पेंशन की उम्मीद छोड़ चुके थे।
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केस तीन
खड्डा के भगवानपुर गांव में 35 बुजुर्गों को सचिव मृत बताते हुए रिपोर्ट भेजी थी। सभी की वृद्धावस्था पेंशन बंद हो गई थी। ये लोग बीडीओ कार्यालय से लेकर समाज कल्याण कार्यालय तक चक्कर लगा रहे थे, लेकिन कोई नहीं सुन रहा था। डीएम के निर्देश पर दोबारा सत्यापन हुआ तो 35 में से 18 बुजुर्ग जिंदा मिले।
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-जनसुनवाई में शंकर नाम के एक बुजुर्ग आए और बताया कि उनको कागज में 'मृत' दिखा दिया गया है। इसी आधार पर तीन साल तक वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों का सर्वे कराया। इसमें 885 बुजुर्ग जिंदा मिले, जिनको सचिव 'मृत' दिखा चुके थे। सभी की रिपोर्ट आ गई है। उन्हें वृद्धावस्था पेंशन भी मिलेगी। इसमें लापरवाही बरतने वाले ब्लाॅक के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मातहतों को हिदायत दी गई है कि दोबारा ऐसी शिकायतें न मिलें। -महेंद्र सिंह तंवर, डीएम कुशीनगर
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बुजुर्गों को मिलने वाला वृद्धा पेंशन जिले में जिम्मेदारों की लापरवाही का भेंट चढ़ता जा रहा है। जिला बुजुर्गों को सचिव बिना गांव में फर्जी रिपोर्ट लगाकर कागजों में मृत दिखा दे रहे हैं, पेंशन बंद होने के बाद बुजुर्ग अफसरों के कार्यालय का खुद को जिंदा साबित करने के लिए चक्कर लगा रहे हैं, संपूर्ण समाधान दिवस के अलावा डीएम की जनसुनवाई के दौरान भी ऐसी शिकायत लेकर बुजुर्ग पहुंचते रहते हैं।
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फरवरी में तमकुहीराज के लछिया देवरिया गांव निवासी 75 वर्षीय शंकर डीएम के कार्यालय में पहुंचे लड़खड़ाती जुबान से अपनी बात भी पूरी नहीं बता पाए और रोने लगे। डीएम भावुक हो गए और उनके पास पहुंच गए। पूरी बात जानने के बाद डीएम ने समाज कल्याण अधिकारी को वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 के वृद्धावस्था पेंशन लाभार्थियों का सर्वे कराने का निर्देश दिया। समाज कल्याण अधिकारी से सभी बीडीओ को पत्र लिखा, लेकिन बीडीओ ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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फरवरी के अंतिम सप्ताह में पडरौना में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एक महिला ऐसी ही शिकायत लेकर पहुंची और बताया कि सचिव ने उसको कागजों में मृत दिखा दिया है। इससे उनको पेंशन नहीं मिल रही है। डीएम नाराज हुए और समाज कल्याण अधिकारी को तलब किया। बीडीओ की लापरवाही सामने आने के बाद सभी को फटकार लगाई और दस दिन के अंदर सचिवों ने सर्वे का कार्य पूरा कर लिया। बीडीओ की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में जिन 885 बुजुर्गों को मृत दिखाया गया था वे सभी जिंदा मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि इसमें नौ सचिव ऐसे हैं, जो पूर्व में इन बुजुर्गों को मृत होने की रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को भेज चुके थे।
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केस एक
लछिया देवरिया गांव निवासी शंकर के गांव में 26 बुजुर्गों को कागजों में सचिव ने मृत दिखाया था, डीएम के निर्देश पर हुए सत्यापन में 26 में से 23 बुजुर्ग जिंदा मिले,जो सचिव सत्यापन के बाद जिंदा होने की रिपोर्ट भेजी है। वही सचिव ने इन बुजुर्गों को मृत बताया था।
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केस दो
सेवरही के रधिया देवरिया गांव में 43 बुजुर्गों को सचिव ने अपनी रिपोर्ट में मृत बताया था। इस आधार पर इनकी वृद्धावस्था पेंशन भी बंद हो गई थी। दोबारा सत्यापन हुआ तो 43 में से 19 बुजुर्ग जीवित मिले हैं। सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाकर ये बुजुर्ग पेंशन की उम्मीद छोड़ चुके थे।
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केस तीन
खड्डा के भगवानपुर गांव में 35 बुजुर्गों को सचिव मृत बताते हुए रिपोर्ट भेजी थी। सभी की वृद्धावस्था पेंशन बंद हो गई थी। ये लोग बीडीओ कार्यालय से लेकर समाज कल्याण कार्यालय तक चक्कर लगा रहे थे, लेकिन कोई नहीं सुन रहा था। डीएम के निर्देश पर दोबारा सत्यापन हुआ तो 35 में से 18 बुजुर्ग जिंदा मिले।
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-जनसुनवाई में शंकर नाम के एक बुजुर्ग आए और बताया कि उनको कागज में 'मृत' दिखा दिया गया है। इसी आधार पर तीन साल तक वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों का सर्वे कराया। इसमें 885 बुजुर्ग जिंदा मिले, जिनको सचिव 'मृत' दिखा चुके थे। सभी की रिपोर्ट आ गई है। उन्हें वृद्धावस्था पेंशन भी मिलेगी। इसमें लापरवाही बरतने वाले ब्लाॅक के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मातहतों को हिदायत दी गई है कि दोबारा ऐसी शिकायतें न मिलें। -महेंद्र सिंह तंवर, डीएम कुशीनगर