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हर तरफ थी उड़ती राख और तबाही का मंजर
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Sat, 25 Feb 2017 12:59 AM IST
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तबाही का मंजर
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना कोतवाली क्षेत्र के बड़हरा गांव में आग लगने की घटना के बाद शुक्रवार को हर तरफ उड़ती राख और तबाही का मंजर था। कच्चे घरों की फूस, बिस्तर, कपड़े, फर्नीचर, अनाज आदि राख के रूप बिखरे पड़े थे। पीड़ितों की कुशलक्षेम लेने पहुंचे सगे संबंधियों को भी कड़ी धूप में ही बैठना पड़ रहा था। पेड़ों तक के झुलस जाने से इंसान ही नहीं, पशु भी छांव के लिए परेशान दिखे। ग्राम पंचायत और कुछ अन्य लोगों ने तात्कालिक रूप से राहत के कुछ इंतजाम तो कर दिए, लेकिन पीड़ितों की परेशानी बढ़ गई है।
बृहस्पतिवार की दोपहर बड़हरा गांव के पश्चिम टोला में आग लगने से कुल 21 घर व उसमें रखे सामान जल गए थे। बड़हरा ग्राम पंचायत दो टोलों में आबाद है। बड़हरा में लगभग एक हजार घर हैं, जबकि पश्चिम टोला लगभग तीन सौ घरों का है। 300 में आधे घर फूस के हैं और 80 प्रतिशत घरों में सरकारी खाद्यान्न के भरोसे चूल्हे जलते हैं। अधिकांश लोग मजदूरी पर निर्भर हैं और गिनती के लोग ही नाम मात्र की खेती के लायक भूमि के स्वामी बताए जाते हैं।
पीड़ित परिवारों में से जिन्हें वर्षों पहले आवास बनाने के लिए सरकार की ओर से रुपये मिले थे, उनमें भी बहुतों के निर्माण आज तक अधूरे पड़े हैं। अग्निपीड़ित ही नहीं, टोले के अन्य लोग भी राशन कार्ड की पात्रता सूची अथवा खाद्यान्न वितरण आदि में अनियमितता की शिकायत कर रहे हैं।
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बहरहाल, झुलसे पेड़ों की वजह से पीड़ित परिवार छांव के लिए शुक्रवार को परेशान दिखे। नंदकिशोर की खोज खबर लेने पहुंचे रिश्तेदारों को भी धूप में बैठना पड़ा। नंदकिशोर ने अगले दो मई को बेटी सरिता की शादी तय कर रखी है और कपड़े, बिस्तर भी बनवा लिए थे जो आग की भेंट चढ़ गए। सरिता की मां इसरावती कहती हैं कि बेटी के विवाह के लिए पांच वर्ष से रुपये संजोकर रखे थे, जो आग में जल गए।
टोले में आग लगने की शाम ग्राम पंचायत की ओर से पीड़ितों को भोजन कराया गया। शुक्रवार की सुबह भी सस्ते गल्ले की दुकान से खाद्यान्न के अलावा अन्य लोगों की ओर से पीड़ितों को भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े और नकदी देने का सिलसिला शुरू था।
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बृहस्पतिवार की दोपहर बड़हरा गांव के पश्चिम टोला में आग लगने से कुल 21 घर व उसमें रखे सामान जल गए थे। बड़हरा ग्राम पंचायत दो टोलों में आबाद है। बड़हरा में लगभग एक हजार घर हैं, जबकि पश्चिम टोला लगभग तीन सौ घरों का है। 300 में आधे घर फूस के हैं और 80 प्रतिशत घरों में सरकारी खाद्यान्न के भरोसे चूल्हे जलते हैं। अधिकांश लोग मजदूरी पर निर्भर हैं और गिनती के लोग ही नाम मात्र की खेती के लायक भूमि के स्वामी बताए जाते हैं।
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पीड़ित परिवारों में से जिन्हें वर्षों पहले आवास बनाने के लिए सरकार की ओर से रुपये मिले थे, उनमें भी बहुतों के निर्माण आज तक अधूरे पड़े हैं। अग्निपीड़ित ही नहीं, टोले के अन्य लोग भी राशन कार्ड की पात्रता सूची अथवा खाद्यान्न वितरण आदि में अनियमितता की शिकायत कर रहे हैं।
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बहरहाल, झुलसे पेड़ों की वजह से पीड़ित परिवार छांव के लिए शुक्रवार को परेशान दिखे। नंदकिशोर की खोज खबर लेने पहुंचे रिश्तेदारों को भी धूप में बैठना पड़ा। नंदकिशोर ने अगले दो मई को बेटी सरिता की शादी तय कर रखी है और कपड़े, बिस्तर भी बनवा लिए थे जो आग की भेंट चढ़ गए। सरिता की मां इसरावती कहती हैं कि बेटी के विवाह के लिए पांच वर्ष से रुपये संजोकर रखे थे, जो आग में जल गए।
टोले में आग लगने की शाम ग्राम पंचायत की ओर से पीड़ितों को भोजन कराया गया। शुक्रवार की सुबह भी सस्ते गल्ले की दुकान से खाद्यान्न के अलावा अन्य लोगों की ओर से पीड़ितों को भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े और नकदी देने का सिलसिला शुरू था।