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फिर सुर्खियों में आया ‘लाल सोना’
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Tue, 04 Apr 2017 12:12 AM IST
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‘लाल सोना’
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। पच्चीस वर्ष पहले तक ‘लाल सोना’ के नाम से जिले में चर्चित रही बेशकीमती खैरा की लकड़ी की तस्करी ने इसमें लिप्त कई लोगों को पूंजीपति बना दिया। वर्ष 1996 में तत्कालीन डीएम ने गंडक नदी की पानी में छिपाकर रखी गई लकड़ियों को बरामद किया तो मामला प्रदेश स्तर तक चर्चा में आ गया था। लकड़ी की कमी व प्रशासन की सख्ती के चलते यह धंधा मंदा हो गया था। परंतु बीते शनिवार को पडरौना कोतवाली के बबुइया हरपुर गांव में फिर 9 ट्राली खैरा की लकड़ी पकड़े जाने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।
गंडक नदी के बीहड़ में जंगल डकैतों के सामने आने के साथ ही खैरा की लकड़ी की तस्करी शुरू हो गई। नब्बे के दशक में बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और नेपाल के जंगलों से इस बेशकीमती लकड़ी की तस्करी जोरों पर थी। जंगल डकैतों को संरक्षण देने और खैरा की तस्करी में लिप्त रहे कई सफेदपोश पूंजीपति हो गए। वर्ष 1996 में डीएम रहे विनोद शंकर चौबे के कार्यकाल में खड्डा व हनुमानगंज थाना क्षेत्र सहित बड़ी गंडक नदी के आस-पास के इलाकों में व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर तस्करों पर कार्रवाई हुई। उस समय खड्डा थाना क्षेत्र के मदनपुर गांव के पास से डीएम ने 25 ट्रक से अधिक खैरा की लकड़ी बरामद की थी। जिसकी कीमत उस समय 70 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसके अलावा हनुमानगंज थाना क्षेत्र में भी खैरा की लकड़ी बरामद हुई थी। अभियान में बरामद सारी लकड़ी खड्डा थाने में रखी गई। कुछ वर्ष पूर्व खड्डा थाने के एसओ रहे बृजेश कुमार वर्मा पर आरोप लगा कि उन्होंने बिना टेंडर कराए ही थाने में रखी खैरा की पूरी लकड़ी बेच दी। उनके खिलाफ जांच हुई और इस आरोप में उन पर एफआईआर कराने के साथ ही निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ एंटी करप्शन सेल लखनऊ आज भी जांच कर रहा है। बीते शनिवार को खैरा तस्करी का मामला फिर सामने आ गया। बबुइया हरपुर के मसही टोला में बरामद नौ ट्राली खैरा की लकड़ी को कोतवाली लाया गया। इस मामले में तीन लोगों पर वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस संबंध में एसपी राजू बाबू सिंह का कहना है कि एएसपी को अचानक सूचना मिलने पर उन्होंने मौके पर छापेमारी कराई, जिसके चलते बबुइया हरपुर के मसही टोला से इतनी बड़ी मात्रा में खैरा की लकड़ी बरामद हुई। खैरा तस्करों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए गोपनीय जांच शुरू की गई है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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गंडक नदी के बीहड़ में जंगल डकैतों के सामने आने के साथ ही खैरा की लकड़ी की तस्करी शुरू हो गई। नब्बे के दशक में बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और नेपाल के जंगलों से इस बेशकीमती लकड़ी की तस्करी जोरों पर थी। जंगल डकैतों को संरक्षण देने और खैरा की तस्करी में लिप्त रहे कई सफेदपोश पूंजीपति हो गए। वर्ष 1996 में डीएम रहे विनोद शंकर चौबे के कार्यकाल में खड्डा व हनुमानगंज थाना क्षेत्र सहित बड़ी गंडक नदी के आस-पास के इलाकों में व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर तस्करों पर कार्रवाई हुई। उस समय खड्डा थाना क्षेत्र के मदनपुर गांव के पास से डीएम ने 25 ट्रक से अधिक खैरा की लकड़ी बरामद की थी। जिसकी कीमत उस समय 70 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसके अलावा हनुमानगंज थाना क्षेत्र में भी खैरा की लकड़ी बरामद हुई थी। अभियान में बरामद सारी लकड़ी खड्डा थाने में रखी गई। कुछ वर्ष पूर्व खड्डा थाने के एसओ रहे बृजेश कुमार वर्मा पर आरोप लगा कि उन्होंने बिना टेंडर कराए ही थाने में रखी खैरा की पूरी लकड़ी बेच दी। उनके खिलाफ जांच हुई और इस आरोप में उन पर एफआईआर कराने के साथ ही निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ एंटी करप्शन सेल लखनऊ आज भी जांच कर रहा है। बीते शनिवार को खैरा तस्करी का मामला फिर सामने आ गया। बबुइया हरपुर के मसही टोला में बरामद नौ ट्राली खैरा की लकड़ी को कोतवाली लाया गया। इस मामले में तीन लोगों पर वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
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इस संबंध में एसपी राजू बाबू सिंह का कहना है कि एएसपी को अचानक सूचना मिलने पर उन्होंने मौके पर छापेमारी कराई, जिसके चलते बबुइया हरपुर के मसही टोला से इतनी बड़ी मात्रा में खैरा की लकड़ी बरामद हुई। खैरा तस्करों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए गोपनीय जांच शुरू की गई है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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