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Kushinagar News: ग्रामीणों को 125 दिन रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता की मिलेगी गारंटी

Sun, 11 Jan 2026 01:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 11 Jan 2026 01:23 AM IST
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The villagers will be guaranteed 125 days of employment, income, and self-reliance.
पडरौना। जिले के प्रभारी मंत्री एवं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक को ग्रामीण भारत के लिए ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पुराने मनरेगा कानून की कमियों को दूर करते हुए ग्रामीण रोजगार, आय सुरक्षा और टिकाऊ अधोसंरचना को नई दिशा देगा।
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प्रेसवार्ता में प्रभारी मंत्री ने बताया कि नए विधेयक के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के इच्छुक ग्रामीणों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि पूर्व व्यवस्था में यह सीमा 100 दिन थी। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और आजीविका अधिक सुरक्षित बनेगी। उन्होंने कहा कि मिशन के अंतर्गत कार्यों को जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़े कार्य और जलवायु एवं मौसमी जोखिम कम करने वाले कार्यों जैसी चार प्रमुख श्रेणियों में रखा गया है।
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ग्राम पंचायतों के विकसित ग्राम पंचायत प्लान को अनिवार्य किया गया है, जिन्हें पीएम गति शक्ति जैसी राष्ट्रीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। प्रभारी मंत्री ने कहा कि इस मिशन से गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण होगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण पलायन में कमी आएगी। किसानों को सिंचाई, जल संरक्षण, भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि मजदूरों को 125 दिनों की रोजगार गारंटी के साथ लगभग 25 प्रतिशत अधिक संभावित आय सुनिश्चित होगी।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि मजदूरी का भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यम से आधार एवं बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए सीधे खातों में किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण रहेगा। समय पर कार्य उपलब्ध न कराए जाने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा। मनरेगा को नए स्वरूप में बदलने की आवश्यकता पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 की परिस्थितियों में बना कानून आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गया था। बदली सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियों, डिजिटल पहुंच और बेहतर संपर्क को देखते हुए अधिक मजबूत और जवाबदेह रोजगार गारंटी व्यवस्था की आवश्यकता थी, जिसे यह विधेयक पूरा करता है।

वित्तीय प्रावधानों पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि यह विधेयक राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डालेगा। सामान्य राज्यों के लिए केंद्र, राज्य व्यय अनुपात 60:40 रहेगा, जबकि उत्तर-पूर्वी, हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। आपदा की स्थिति में अतिरिक्त सहायता की भी व्यवस्था रहेगी।
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