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Kushinagar News: पकड़ा गया उत्पाती बंदर... शिकारियों ने जाल में फंसाकर किया काबू
Fri, 14 Feb 2025 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 14 Feb 2025 12:04 AM IST
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गुरवलिया बाजार। करीब 10 दिन से उत्पात मचाने वाला बंदर बृहस्पतिवार को दुरखिया गांव में बांसगांव दुदही से आए तीन शिकारियों के हाथों पकड़ा लिया गया। केले और फलों का लालच देकर शिकारियों ने उसे पेड़ से नीचे बुलाया और जाल में फंसाकर पकड़ लिया। पकड़ने के बाद बंदर को सूती बोरी में रख दिया गया। चार घंटे तक एक बगीचे में बंदर पड़ा रहा। वन विभाग के कर्मचारी और प्रधान ने चंदा जुटाकर 4200 रुपये शिकारियों को दिए और उनके आने-जाने का खर्च भी अदा किया। तमकुही ब्लॉक के ग्राम पंचायत सोंदिया बुजुर्ग, दुरखिया, श्रीरामपट्टी गांव में पिछले दस दिन से बंदर के उत्पात से लोग दहशत में थे। बंदर चार लोगों को काटने के साथ ही 12 लोगों को गिराकर घायल कर चुका था। अमर उजाला की खबर के बाद वन विभाग ने सक्रियता दिखाई।
बुधवार को वन विभाग के कर्मचारियों ने स्थलीय निरीक्षण कर ग्रामीणों और प्रधानों से बातचीत कर शिकारियों के खर्च के लिए ग्राम प्रधान से समन्वय स्थापित कर बृहस्पतिवार को पकड़ने की बात कही। बृहस्पतिवार सुबह रेंजर के निर्देश पर तमकुही रेंज के वन विभाग के कर्मचारी तीन शिकारियों के साथ दुरखियां गांव में पहुंचे। ग्रामीणों से बंदर की लोकेशन लेकर उसे पकड़ने का प्रयास शुरू किया तो बंदर उग्र हो गया। कई दफा शिकारियों पर झपटा।
बाद में केला और अन्य फलों के लालच देकर बंदर को पेड़ से नीचे उतारा गया और जाल फेंककर फंसा लिया गया। इसके बाद शिकारियों ने बंदर को बोरी में कस दिया।
इसके बाद पैसों की व्यवस्था शुरू हुई। बगीचे में एक बोरी में बंदर को रखकर घर-घर चंदा मांगना शुरू हुआ। इससे करीब 3200 रुपये जमा हुए। प्रधान ने अपने पास से एक हजार रुपये मिला और आने-जाने का खर्च मिलकर करीब पांच हजार रुपये खर्च किए गए। लोगों ने राहत की सांस ली।
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बुधवार को वन विभाग के कर्मचारियों ने स्थलीय निरीक्षण कर ग्रामीणों और प्रधानों से बातचीत कर शिकारियों के खर्च के लिए ग्राम प्रधान से समन्वय स्थापित कर बृहस्पतिवार को पकड़ने की बात कही। बृहस्पतिवार सुबह रेंजर के निर्देश पर तमकुही रेंज के वन विभाग के कर्मचारी तीन शिकारियों के साथ दुरखियां गांव में पहुंचे। ग्रामीणों से बंदर की लोकेशन लेकर उसे पकड़ने का प्रयास शुरू किया तो बंदर उग्र हो गया। कई दफा शिकारियों पर झपटा।
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बाद में केला और अन्य फलों के लालच देकर बंदर को पेड़ से नीचे उतारा गया और जाल फेंककर फंसा लिया गया। इसके बाद शिकारियों ने बंदर को बोरी में कस दिया।
इसके बाद पैसों की व्यवस्था शुरू हुई। बगीचे में एक बोरी में बंदर को रखकर घर-घर चंदा मांगना शुरू हुआ। इससे करीब 3200 रुपये जमा हुए। प्रधान ने अपने पास से एक हजार रुपये मिला और आने-जाने का खर्च मिलकर करीब पांच हजार रुपये खर्च किए गए। लोगों ने राहत की सांस ली।
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