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संतों ने गंडक में किया शाही स्नान
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Thu, 18 Jan 2018 12:24 AM IST
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स्नान से पूर्व संत।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। मौनी अमावस्या के अवसर पर छितौनी-बगहां रेल पुल के समीप स्थित पनियहवा घाट पर प्रारंभ हुए सामाजिक कुंभ मेला में बुधवार को भक्ति आंदोलन मंच व श्री केशरी नंदन अध्यात्मिक चेतना न्यास से जुड़े संतों ने गंडक नदी में शाही स्नान कर सामाजिक कुंभ के परंपरा की नींव रखी। इस मेले के दूसरे दिन भी श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान संत सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इसी के साथ मेले में आने वाले श्रद्घालुओं का तांता लग गया।
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बुधवार को प्रात: शाही स्नान से पहले संतों ने मोक्ष दायिनी गंडक (नारायणी) नदी की महाआरती की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हर हर गंगे नमो नारायणी के जयकारे व शंख ध्वनि के बीच संतों ने नारायणी नदी में डुबकी लगाई। धार्मिक मूल्यों की स्थापना और सनातन संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का संतों और श्रद्घालुओं ने संकल्प लिया। यहां पहुंचे हुए साधु-संतों, धर्माचार्यों व सामाजिक संगठनों लोगों ने नारायणी को गंगा की तरह ही पवित्र व मोक्षदायिनी बताया।
संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए आयोजक राजर्षि रामनयन दास रामायणी ने कहा कि नारायणी गंगा के समान पवित्र है। इस नदी में भगवान शालिग्राम पाए जाते हैं। इसी नदी के तट से तुलसी की उत्पत्ति हुई थी। गज-ग्राह का युद्घ इसी नदी में हुआ था, जिसके बाद गज की पुकार पर भगवान विष्णु नंगे पांव पहुंचकर ग्राह का वध किए थे और गजराज के प्राण बचाए थे। इसके साथ सतयुग, द्वापर, त्रेता व कलियुग में यह नदी धार्मिक, राजनैतिक व सामाजिक आस्था का प्रेरणास्त्रोत रही है।
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इस अवसर पर महामंडलेश्वर राजेश्वरानंद, श्रीकांत शरण बालयोगी, महंत अवधबिहारी दास उर्फ पंजाबी बाबा, प्रहलाद दास त्यागी, सीताराम दास, श्यामसुंदर दास, नंदकिशोर भारद्वाज, महंत प्रहलाद दास त्यागी, राकेश दास, जंगबहादुर दास, सेवक राजकिशोर यादव सहित समिति के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। संत सम्मेलन का संचालन रामवृक्ष यादव ने किया।
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संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए आयोजक राजर्षि रामनयन दास रामायणी ने कहा कि नारायणी गंगा के समान पवित्र है। इस नदी में भगवान शालिग्राम पाए जाते हैं। इसी नदी के तट से तुलसी की उत्पत्ति हुई थी। गज-ग्राह का युद्घ इसी नदी में हुआ था, जिसके बाद गज की पुकार पर भगवान विष्णु नंगे पांव पहुंचकर ग्राह का वध किए थे और गजराज के प्राण बचाए थे। इसके साथ सतयुग, द्वापर, त्रेता व कलियुग में यह नदी धार्मिक, राजनैतिक व सामाजिक आस्था का प्रेरणास्त्रोत रही है।
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इस अवसर पर महामंडलेश्वर राजेश्वरानंद, श्रीकांत शरण बालयोगी, महंत अवधबिहारी दास उर्फ पंजाबी बाबा, प्रहलाद दास त्यागी, सीताराम दास, श्यामसुंदर दास, नंदकिशोर भारद्वाज, महंत प्रहलाद दास त्यागी, राकेश दास, जंगबहादुर दास, सेवक राजकिशोर यादव सहित समिति के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। संत सम्मेलन का संचालन रामवृक्ष यादव ने किया।