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जेब में नोट होने पर भी नहीं मिल रही खाद-बीज
kushinagar
Updated Mon, 14 Nov 2016 11:08 PM IST
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पडरौना। एक हजार और पांच सौ के नोट पर पाबंदी ने किसानों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। रबी की बुवाई का सीजन चल रहा है और किसान फुटकर नोट न होने के चलते खाद-बीज के लिए परेशान हैं। किसानों की दिक्कत यह है कि ट्रैक्टर वाले से लगायत खाद-बीज के दुकानदार तक फुटकर रुपये मांग रहे हैं और किसान के पास भी केवल पांच सौ और एक हजार के ही नोट हैं।
बतरौली निवासी तीर्थराज प्रसाद का कहना है कि रुपये घर में होते हुए भी कृषि कार्य प्रभावित हो गया है। पांच सौ और एक हजार के नोट से न तो खाद-बीज मिल रहा है और न ही खेत की जुताई हो पा रही है। परवेेेेज आलम का कहना है कि जुताई का कार्य तो उधार पर हो भी जा रहा है तो दुकानदार खाद-बीज के लिए नकद रुपये मांग रहे हैं। बैंक से भी रुपये नहीं मिल पा रहा है।
विजय प्रसाद का कहना है कि दो दिन लाइन में लगने के बाद भी रुपये नहीं मिले। गेहूं की बुवाई पिछड़ गई तो आने वाले वक्त में अनाज का भी संकट झेलना पड़ेगा। रामकिशुन का कहना है कि सरकार किसानों की इस दिक्कत को नहीं समझ रही है। अगर पांच सौ और एक हजार के नोट का चलन बंद है तो सरकारी दुकानों से खाद-बीज ही दिलवा दें।
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बतरौली निवासी तीर्थराज प्रसाद का कहना है कि रुपये घर में होते हुए भी कृषि कार्य प्रभावित हो गया है। पांच सौ और एक हजार के नोट से न तो खाद-बीज मिल रहा है और न ही खेत की जुताई हो पा रही है। परवेेेेज आलम का कहना है कि जुताई का कार्य तो उधार पर हो भी जा रहा है तो दुकानदार खाद-बीज के लिए नकद रुपये मांग रहे हैं। बैंक से भी रुपये नहीं मिल पा रहा है।
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विजय प्रसाद का कहना है कि दो दिन लाइन में लगने के बाद भी रुपये नहीं मिले। गेहूं की बुवाई पिछड़ गई तो आने वाले वक्त में अनाज का भी संकट झेलना पड़ेगा। रामकिशुन का कहना है कि सरकार किसानों की इस दिक्कत को नहीं समझ रही है। अगर पांच सौ और एक हजार के नोट का चलन बंद है तो सरकारी दुकानों से खाद-बीज ही दिलवा दें।
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