{"_id":"677194737d45e10da902a527","slug":"the-pain-of-the-youth-returning-from-abroad-is-expressed-they-say-that-they-will-eat-lunch-will-not-go-abroad-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-129093-2024-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: विदेश से लौटे युवाओं का छलका दर्द, कहा-नून रोटी खाएंगे...विदेश नहीं जाएंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: विदेश से लौटे युवाओं का छलका दर्द, कहा-नून रोटी खाएंगे...विदेश नहीं जाएंगे
Sun, 29 Dec 2024 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 29 Dec 2024 11:57 PM IST
विज्ञापन
पडरौना/गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए विदेश जा रहे युवा मजबूरी में विदेश पहुंचकर धोखे का शिकार हो रहे हैं। एजेंट और कंपनी मालिक के कारण सात समुंदर पार दुबई, मलेशिया, किर्गिस्तान, सऊदी आदि विभिन्न खाड़ी देशों में फंस जा रहे हैं। ये लोग जब अपने गांव लौट रहे हैं तो विदेशी डॉलर की चमक से बेहतर इन्हें भारतीय रुपये लगते हैं। सात समुंदर पार से बड़ी कठिनाई से लौटने वाले लोगों का कहना है कि नून रोटी खाएंगे...विदेश कभी न जाएंगे।
पीड़ितों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति विदेश यूं ही नहीं जाता है। वहां जाना उनकी मजबूरी होती है। उनका मानना है कि अपने शहर में ही सीमित रुपयों में ही परिवार के साथ खुशियां साझा करेंगे। छोटे से स्वरोजगार से ही अपने शहर में आय का साधन बनाएंगे। इसके अलावा जिसे रोजगार की जरूरत हो वह आज भी देश के बड़े शहरों का रुख कर वहां अपनी काबिलियत पर जगह बना पा सकता है।
विदेश घूमने जाकर टूरिस्ट वीजा पर वहां नौकरी करने वाले अक्सर ही वहां के कानून में उलझकर जुर्माना और जेल जैसी सजाएं झेलते हैं। इसके अलावा कई दफा उनके मोबाइल फोन, वीजा, पासपोर्ट छीनकर इन्हें मजदूरी और चरवाहा जैसे काम कराए जाते हैं। खाने के नाम पर एक समय फास्ट फूड और ऐसे चीजें परोसी जाती है जो कम रुपये में इन्हें दी जा सके। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना कर कभी घर न जाने देने की भी धमकी दी जाती है। कई दफा परेशान लोग आत्महत्या करने की योजना तक बना लेते हैं। कैसे भी यह चोरी चुपके वीडियो बनाकर देश स्तर पर संचालित प्रवासी भारतीय मदद समूह निस्वार्थ के सदस्यों को भेज देते हैं।
विज्ञापन
इसके बाद इस समूह के सदस्य सक्रिय होकर पहले तो सारे कागजात लेकर मंत्रालय से अवगत कराते हैं और फिर शपथपत्र के सहारे परेशानियों को साझा कर उन्हें वापस बुलाते हैं।
प्रवासी भारतीय मदद समूह के सदस्य...पहुंचकर करते मदद : प्रवासी भारतीय मदद समूह के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव हो या जेडी अंसारी, मुस्लिम आलम हो या तारकेश्वर यह सभी विदेश के दुबई, ओमान, सऊदी में हैं। प्रवासी भारतीय मदद समूह तक वीडियो प्राप्त होने के बाद यह लोग सक्रिय हो जाते है और फिर वहां पहुंचकर विदेश में फंसे यहां के लोगों के इनके जरूरत के हिसाब से खाने-पीने की चीजें मुहैया कराने के साथ जल्द वापस स्वदेश भेजने का वादा करते हैं और जल्द ही इनकी वापसी भी हो जाती है।
विज्ञापन
पीड़ितों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति विदेश यूं ही नहीं जाता है। वहां जाना उनकी मजबूरी होती है। उनका मानना है कि अपने शहर में ही सीमित रुपयों में ही परिवार के साथ खुशियां साझा करेंगे। छोटे से स्वरोजगार से ही अपने शहर में आय का साधन बनाएंगे। इसके अलावा जिसे रोजगार की जरूरत हो वह आज भी देश के बड़े शहरों का रुख कर वहां अपनी काबिलियत पर जगह बना पा सकता है।
विज्ञापन
विदेश घूमने जाकर टूरिस्ट वीजा पर वहां नौकरी करने वाले अक्सर ही वहां के कानून में उलझकर जुर्माना और जेल जैसी सजाएं झेलते हैं। इसके अलावा कई दफा उनके मोबाइल फोन, वीजा, पासपोर्ट छीनकर इन्हें मजदूरी और चरवाहा जैसे काम कराए जाते हैं। खाने के नाम पर एक समय फास्ट फूड और ऐसे चीजें परोसी जाती है जो कम रुपये में इन्हें दी जा सके। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना कर कभी घर न जाने देने की भी धमकी दी जाती है। कई दफा परेशान लोग आत्महत्या करने की योजना तक बना लेते हैं। कैसे भी यह चोरी चुपके वीडियो बनाकर देश स्तर पर संचालित प्रवासी भारतीय मदद समूह निस्वार्थ के सदस्यों को भेज देते हैं।
विज्ञापन
इसके बाद इस समूह के सदस्य सक्रिय होकर पहले तो सारे कागजात लेकर मंत्रालय से अवगत कराते हैं और फिर शपथपत्र के सहारे परेशानियों को साझा कर उन्हें वापस बुलाते हैं।
प्रवासी भारतीय मदद समूह के सदस्य...पहुंचकर करते मदद : प्रवासी भारतीय मदद समूह के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष छोटेलाल यादव हो या जेडी अंसारी, मुस्लिम आलम हो या तारकेश्वर यह सभी विदेश के दुबई, ओमान, सऊदी में हैं। प्रवासी भारतीय मदद समूह तक वीडियो प्राप्त होने के बाद यह लोग सक्रिय हो जाते है और फिर वहां पहुंचकर विदेश में फंसे यहां के लोगों के इनके जरूरत के हिसाब से खाने-पीने की चीजें मुहैया कराने के साथ जल्द वापस स्वदेश भेजने का वादा करते हैं और जल्द ही इनकी वापसी भी हो जाती है।