{"_id":"651b230f841528f2640630c4","slug":"the-pain-of-being-a-migrant-emerged-during-the-lockdown-goat-rearing-opened-the-way-for-progress-kushinagar-news-c-227-1-sgkp1032-5747-2023-10-03","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: लॉकडाउन में उभरा प्रवासी होने का दर्द, बकरी पालन से खुली तरक्की की राह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: लॉकडाउन में उभरा प्रवासी होने का दर्द, बकरी पालन से खुली तरक्की की राह
Tue, 03 Oct 2023 04:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
Updated Tue, 03 Oct 2023 04:27 PM IST
सार
कानपुर के काल्पी की बरबरा नस्ल का बकरा लाए हैं, जिससे नस्ल सुधार होगा। इसके साथ वे राजस्थान, इटावा और मथुरा से अच्छी नस्ल की बकरियों को खरीदने की तैयारी कर चुके हैं।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सिद्धार्थनगर जिले में बांसी क्षेत्र के डबरा निवासी अब्दुल गनी बकरी पालन की नजीर बन गए हैं। देसी बकरियों की नस्ल सुधारते हुए वे तरक्की की राह पर चल पड़े हैं। उनके फार्म में फिलहाल 50 बकरियां हैं। कानपुर के काल्पी की बरबरा नस्ल का बकरा लाए हैं, जिससे नस्ल सुधार होगा। इसके साथ वे राजस्थान, इटावा और मथुरा से अच्छी नस्ल की बकरियों को खरीदने की तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने तरीका बदला तो आय डेढ़ गुनी हो गई।
विज्ञापन
डबरा के अब्दुल गनी बताते हैं कि कोरोना काल में शुरू हुए लॉकडाउन से पहले तक वे मुंबई के बेकरी में नौकरी करते थे, लेकिन कोरोना के कहर में नौकरी चली गई। घर आ गए तो प्रवासी होने का दर्द उभरा कि अपने वहां ही कोई कारोबार होता तो ये नौबत नहीं आती। इस दौरान उनकी पत्नी अख्तरुन्निशा ने बकरी पालन की तो गृहस्थी का पहिया पटरी से उतरने नहीं पाया। फिर उन्होंने बकरी पालन करने का निर्णय किया।
विज्ञापन
दूध वाली बकरियों से सुधरेगी सेहत
उद्योग विभाग के अंतर्गत उन्होंने 100 बकरियों को पालन का प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें 50 बकरियां देसी नस्ल की है। अब्दुल गनी ने बताया कि वे मथुरा जखराना नस्ली की बकरियां लाएंगे, वे 2 से 2.5 लीटर दूध देती हैं। इनके दूध का उपयोग उन बकरियों के बच्चों के लिए होगा, जिनका दूध कम होता है। इससे बच्चे तेजी से बढ़ेंगे। साथ ही उन्होंने कानपुर के काल्पी से मोटी हड्डी वाले बरबरा नस्ल का बकरा खरीदा है, जिससे नस्ल सुधार होगा। इसके अलावा ने राजस्थान की सिरोही, इटावा व मथुरा से बरबरी नस्ल की बकरियां लाएंगे। वे जल्द ही पांच अच्छी नस्ल के बकरों को लाएंगे।
विज्ञापन
ऑनलाइन मंगाई घास
अब्दुल गनी ने बताया कि उन्होंने बकरे और बकरियों को खिलाने के लिए सुपर नेपियर नामक घास उगाई। इस घास की डंठल को उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से मंगाया था। पांच हजार रुपये की घास मंगाकर बोया तो बकरियों को पर्याप्त चारा मिल रहा है। जब बकरियों की संख्या हो जाएगी तो दो मजदूरों को भी रोजगार देने में सक्षम हो जाएंगे।
देसी बकरी के बच्चे होंगे जमुनापारी
सिद्धार्थनगर पशु चिकित्सा विभाग में जल्द ही बकरियों को सीमन आ जाएगा। इससे बकरियों में नस्ल सुधार होगा। देसी नस्ल की बकरी से भी जमुनापारी नस्ल के बच्चे होंगे तो तेजी से विकास होगा। जिले के दो पशु चिकित्सकों को सीमन का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षण दे दिया गया है। जिले में बकरियों की संख्या 2.84 लाख है, जबकि ये वर्ष 2021 का है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीवन लाल ने बताया कि जिले में बड़े पैमाने पर बकरी पालन हो रहा है। औद्योगिक स्तर पर बकरी पालन के लिए सात यूनिट को स्वीकृति मिली है, जबकि एक पिग फार्म बनाया जाएगा। विभाग से बकरी पालन का सीमन प्राप्त होगा तो पालकों को सुविधाएं मुहैया कराईं जाएगी।
देसी बकरी के बच्चे होंगे जमुनापारी
सिद्धार्थनगर पशु चिकित्सा विभाग में जल्द ही बकरियों को सीमन आ जाएगा। इससे बकरियों में नस्ल सुधार होगा। देसी नस्ल की बकरी से भी जमुनापारी नस्ल के बच्चे होंगे तो तेजी से विकास होगा। जिले के दो पशु चिकित्सकों को सीमन का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षण दे दिया गया है। जिले में बकरियों की संख्या 2.84 लाख है, जबकि ये वर्ष 2021 का है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीवन लाल ने बताया कि जिले में बड़े पैमाने पर बकरी पालन हो रहा है। औद्योगिक स्तर पर बकरी पालन के लिए सात यूनिट को स्वीकृति मिली है, जबकि एक पिग फार्म बनाया जाएगा। विभाग से बकरी पालन का सीमन प्राप्त होगा तो पालकों को सुविधाएं मुहैया कराईं जाएगी।