{"_id":"699b7253df165810490d7047","slug":"the-message-of-understanding-based-education-given-to-the-youth-kushinagar-news-c-205-1-ksh1006-155244-2026-02-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: युवाओं को दिया समझ आधारित शिक्षा का संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: युवाओं को दिया समझ आधारित शिक्षा का संदेश
Mon, 23 Feb 2026 02:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 23 Feb 2026 02:47 AM IST
विज्ञापन
कसया। राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर के पांचवें दिन ‘शिक्षा के बदलते स्वरूप से युवाओं का सामंजस्य’ विषय पर संगोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि अंबुजेश ने युवाओं को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों से अवगत कराते हुए गुरु-शिष्य संबंधों में आई गिरावट पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि आज का युवा पुस्तकों की अपेक्षा मोबाइल की ओर अधिक आकर्षित हो रहा है, जो शिक्षा के स्तर में गिरावट का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने युवाओं को रटने के बजाय समझकर पढ़ने की सलाह दी। कहा कि रटे हुए ज्ञान, समझे हुए ज्ञान और जीवन में उतारे गए ज्ञान में बड़ा अंतर होता है। भारतीय ज्ञान परंपरा में सदैव समझ और आत्मसात करने पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि संस्कार का माध्यम थी। शिक्षा व्यवस्था समाज आधारित और आत्मनिर्भर थी। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे मोबाइल से दूरी बनाकर अध्ययन और आत्मचिंतन में समय दें। कार्यक्रम में परिचय कार्यक्रम अधिकारी डॉ. निगम मौर्य ने कराया, जबकि आभार ज्ञापन डॉ. पारस नाथ ने किया। संचालन स्वयंसेवक अंकित कुशवाहा ने किया।
इससे पूर्व स्वयंसेवकों ने कसया नगर में स्वच्छता जागरूकता रैली निकाली। रैली के दौरान गंदगी फैलाने वाले दुकानदारों को गुलाब भेंट कर स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया गया। स्वच्छता रैली में नगर पालिका के स्वच्छता कर्मियों ने भी सहयोग किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आज का युवा पुस्तकों की अपेक्षा मोबाइल की ओर अधिक आकर्षित हो रहा है, जो शिक्षा के स्तर में गिरावट का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने युवाओं को रटने के बजाय समझकर पढ़ने की सलाह दी। कहा कि रटे हुए ज्ञान, समझे हुए ज्ञान और जीवन में उतारे गए ज्ञान में बड़ा अंतर होता है। भारतीय ज्ञान परंपरा में सदैव समझ और आत्मसात करने पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि संस्कार का माध्यम थी। शिक्षा व्यवस्था समाज आधारित और आत्मनिर्भर थी। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे मोबाइल से दूरी बनाकर अध्ययन और आत्मचिंतन में समय दें। कार्यक्रम में परिचय कार्यक्रम अधिकारी डॉ. निगम मौर्य ने कराया, जबकि आभार ज्ञापन डॉ. पारस नाथ ने किया। संचालन स्वयंसेवक अंकित कुशवाहा ने किया।
विज्ञापन
इससे पूर्व स्वयंसेवकों ने कसया नगर में स्वच्छता जागरूकता रैली निकाली। रैली के दौरान गंदगी फैलाने वाले दुकानदारों को गुलाब भेंट कर स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया गया। स्वच्छता रैली में नगर पालिका के स्वच्छता कर्मियों ने भी सहयोग किया।
विज्ञापन