{"_id":"573767d04f1c1b577991a409","slug":"the-lower-area-of-the-sweetness-of-sugar-cane-cut","type":"story","status":"publish","title_hn":"गन्ने के कम क्षेत्रफल ने घटाई चीनी की मिठास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गन्ने के कम क्षेत्रफल ने घटाई चीनी की मिठास
कुशीनगर
Updated Sat, 14 May 2016 11:30 PM IST
विज्ञापन
sugercane
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राकेश कुमार गौंड़
पडरौना। कभी चीनी का कटोरा कहे जाने वाले जिले में गन्ना और चीनी का उत्पादन निरंतर घटता जा रहा है। गन्ना मूल्य निर्धारण में सरकार का उदासीन रवैया, किसानों की तरफ से उपजाए गए गन्ना लागत के हिसाब से भी मूल्य नहीं मिलना, समय पर सप्लाई टिकट की कमी और चीनी मिलों की ओर से भुगतान में देरी इसकी प्रमुख वजह बताई जा रही है।
शायद यही वजह है कि पेराई सत्र 2014-15 में जिले की चीनी मिलों ने जहां 2233306 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया था, वहीं बीते सत्र 2015-16 में यह घटकर 1964974 पर आ गया। एक वर्ष के भीतर ही चीनी के उत्पादन में 268332 क्विंटल की कमी दर्ज की गई है।
पेराई सत्र 2015-16 में खड्डा चीनी मिल ने 15.64, रामकोला ने 51.81, कप्तानगंज ने 27.24, सेवरही ने 53.86 और ढाढ़ा चीनी मिल ने 43.20 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा था, जिसकी पेराई के बाद क्रमश: 9.34, 9.62. 9.08, 8.38 और 9.00 प्रतिशत चीनी की रिकवरी हुई थी।
विज्ञापन
जबकि विभाग की मानी जाए तो प्रति क्विंटल गन्ना रिकवरी औसतन 10 किलोग्राम होनी चाहिए। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष चीनी की रिकवरी काफी कम रही।
विज्ञापन
पडरौना। कभी चीनी का कटोरा कहे जाने वाले जिले में गन्ना और चीनी का उत्पादन निरंतर घटता जा रहा है। गन्ना मूल्य निर्धारण में सरकार का उदासीन रवैया, किसानों की तरफ से उपजाए गए गन्ना लागत के हिसाब से भी मूल्य नहीं मिलना, समय पर सप्लाई टिकट की कमी और चीनी मिलों की ओर से भुगतान में देरी इसकी प्रमुख वजह बताई जा रही है।
शायद यही वजह है कि पेराई सत्र 2014-15 में जिले की चीनी मिलों ने जहां 2233306 क्विंटल चीनी का उत्पादन किया था, वहीं बीते सत्र 2015-16 में यह घटकर 1964974 पर आ गया। एक वर्ष के भीतर ही चीनी के उत्पादन में 268332 क्विंटल की कमी दर्ज की गई है।
विज्ञापन
पेराई सत्र 2015-16 में खड्डा चीनी मिल ने 15.64, रामकोला ने 51.81, कप्तानगंज ने 27.24, सेवरही ने 53.86 और ढाढ़ा चीनी मिल ने 43.20 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा था, जिसकी पेराई के बाद क्रमश: 9.34, 9.62. 9.08, 8.38 और 9.00 प्रतिशत चीनी की रिकवरी हुई थी।
विज्ञापन
जबकि विभाग की मानी जाए तो प्रति क्विंटल गन्ना रिकवरी औसतन 10 किलोग्राम होनी चाहिए। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष चीनी की रिकवरी काफी कम रही।