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‘नेहरू के जमाने से वामपंथी इतिहासकार बढ़े’
kushinagar
Updated Sun, 16 Oct 2016 10:47 PM IST
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सेमिनार
- फोटो : santosh verma
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कसया। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रोफेसर सतीश चंद्र मित्तल ने कहा कि पंडित नेहरू के जमाने से ही वामपंथी सोच वाले इतिहासकारों का ज्यादा प्रभाव बढ़ा दिखता है। आज उस इतिहास को फिर से लिखने की जरूरत है। वह कुशीनगर में आयोजित मध्यकालीन एवं आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोत विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर रविवार की सुबह बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्हाेंने संवाददाताओं से कहा कि इसकी जरूरत इसलिए है कि जो पाठ्यक्रम चल रहा है, उसमें गलत इतिहास पढ़ाया जा रहा है। इसमें विशेषकर हाईस्कूल स्तर के शिक्षा पाठ्यक्रमों के व्यापक स्तर पर बदलाव की आवश्यकता है। इतिहास बदलने के लिए नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर सही लिखा जाना चाहिए। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। रामजन्म भूमि विवाद के प्रश्न पर उन्होंने कहा मामला न्यायालय में विचाराधीन है। कुछ लोगों ने भगवान श्रीराम की स्मृतियों से जुडे़ विषयों पर आपत्ति की थी, लेकिन कोर्ट ने खुद ही उन विवादित विषयों को नकार दिया था। उन्होंने कहा कि कुशीनगर में आयोजित इतिहासकारों का सम्मेलन काफी हद तक सफल रहा। इसके पहले दो सम्मेलन हो चुके हैं। इसके पूर्व ग्वालियर और बनारस में महिला इतिहासकारों का सम्मेलन हुआ था। उन्होंने कहा कि हम अपने उद्देेश्यों की तरफ से तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका सार्थक परिणाम मिलने वाला है। संगोष्ठी के दौरान इतिहास के स्रोत, विजन और लेखन पर विस्तार से परिचर्चा हुई है। इस दौरान आयोजन कमेटी से जुड़े लोगों के कई अन्य लोग भी उपस्थित थे।
भारत में विद्वानों की कमी नहीं: सुष्मिता
कसया। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना की तरफ से कुशीनगर में आयोजित दो दिवसीय वरिष्ठ इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी रविवार की शाम संपन्न हो गई। इसमें बतौर मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुष्मिता पांडेय ने आयोजकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों में पहुंचने से पता चलता है कि आज भी भारत में विद्वानों की कमी नहीं है। अब समय आ गया है कि हम पुराने इतिहास की समीक्षा करते हुए वास्तविक इतिहास को लिखना प्रारंभ करें।
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प्रोफेसर सतीश चंद्र मित्तल ने कहा कि अब एक्शन का समय आ गया है। इतिहास को बंद कमरे में बहुत समय से लिखा जा रहा है। अब उसे क्रियान्वित करने का समय भी आ गया है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि आज हम एक नया इतिहास लिखने जा रहे हैं, लेकिन उस दिन से आज तक मैं उस इतिहास की प्रतीक्षा कर रहा हूं। अब नए इतिहास को नई पीढ़ी को पढ़ाने की जरूरत है।
इनके अलावा विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर राघवेंद्र तंवर, प्रोफेसर अरविंद जामखेड़कर, अरुण कुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी के समापन सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर सतीश चंद्र मित्तल अध्यक्ष अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना एवं संचालन डॉ.ओम जी उपाध्याय सचिव, भारतीय इतिहास संकलन समिति गोरक्ष प्रांत ने किया। संगोष्ठी के अंत में राष्ट्रीय संगठन सचिव अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने संगठनात्मक विमर्श और मंचासीन अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर सांसद राजेश पांडेय, रजनीकांत मणि त्रिपाठी, भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश शाही, सतीश मणि त्रिपाठी, सुमित त्रिपाठी, सूर्य प्रकाश राय, अंकुर मिश्र सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
देवी गीतों से माहौल हुआ भक्तिमय
कसया। भारतीय इतिहास के स्रोत एवं इतिहास लेखन विषय पर कुशीनगर में आयोजित दो दिवसीय वरिष्ठ इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले शनिवार की शाम सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। इसमें देवी गीत सहित कई कार्यक्रम हुए।
इसकी शुरुआत लोक गायक राकेश उपाध्याय की देवी गीत की प्रस्तुति से हुई। उन्होंनेे नीबिया की डारि मईया, कुइयां का ठंडा पानी, पीपल के छांव रे, अइयो हे परदेसी, सबरे मोरे गांव, झुहुर-झुहुर बहे ला पवन पुरवइया, अमवा के डरिया पर चहके चिरइया, कौने खोतवा में.. आदि की प्रस्तुति से पंडाल में बैठे श्रोता सराबोर हो गए। इसके अलावा उनके मिर्जापुर की कजरी गोरी भूल गई झूला बाजार में, सावन की बहार में पर जमकर तालियां भी बजीं। गायक राकेश उपाध्याय को राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इसके अलावा संरक्षक अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के पीएन पाठक ने उपाध्याय का माल्यार्पण कर स्वागत और अभिनंदन किया।
अध्यक्षता ग्वालियर से आए इतिहास संकलन योजना के महासचिव प्रोफेसेर आनंद मिश्र और संचालन इतिहास संकलन योजना के गोरक्षप्रांत के महासचिव डॉ. ओेम उपाध्याय ने किया। इस मौके पर सुरेश प्रसाद गुप्त, विजय दीक्षित, सुमित त्रिपाठी, राकेश गिरि, राजीव नयन द्विवेदी, गुड्डू तिवारी, कुंदन मिश्र, मनीष श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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उन्हाेंने संवाददाताओं से कहा कि इसकी जरूरत इसलिए है कि जो पाठ्यक्रम चल रहा है, उसमें गलत इतिहास पढ़ाया जा रहा है। इसमें विशेषकर हाईस्कूल स्तर के शिक्षा पाठ्यक्रमों के व्यापक स्तर पर बदलाव की आवश्यकता है। इतिहास बदलने के लिए नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर सही लिखा जाना चाहिए। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। रामजन्म भूमि विवाद के प्रश्न पर उन्होंने कहा मामला न्यायालय में विचाराधीन है। कुछ लोगों ने भगवान श्रीराम की स्मृतियों से जुडे़ विषयों पर आपत्ति की थी, लेकिन कोर्ट ने खुद ही उन विवादित विषयों को नकार दिया था। उन्होंने कहा कि कुशीनगर में आयोजित इतिहासकारों का सम्मेलन काफी हद तक सफल रहा। इसके पहले दो सम्मेलन हो चुके हैं। इसके पूर्व ग्वालियर और बनारस में महिला इतिहासकारों का सम्मेलन हुआ था। उन्होंने कहा कि हम अपने उद्देेश्यों की तरफ से तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका सार्थक परिणाम मिलने वाला है। संगोष्ठी के दौरान इतिहास के स्रोत, विजन और लेखन पर विस्तार से परिचर्चा हुई है। इस दौरान आयोजन कमेटी से जुड़े लोगों के कई अन्य लोग भी उपस्थित थे।
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भारत में विद्वानों की कमी नहीं: सुष्मिता
कसया। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना की तरफ से कुशीनगर में आयोजित दो दिवसीय वरिष्ठ इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी रविवार की शाम संपन्न हो गई। इसमें बतौर मुख्य अतिथि प्रोफेसर सुष्मिता पांडेय ने आयोजकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों में पहुंचने से पता चलता है कि आज भी भारत में विद्वानों की कमी नहीं है। अब समय आ गया है कि हम पुराने इतिहास की समीक्षा करते हुए वास्तविक इतिहास को लिखना प्रारंभ करें।
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प्रोफेसर सतीश चंद्र मित्तल ने कहा कि अब एक्शन का समय आ गया है। इतिहास को बंद कमरे में बहुत समय से लिखा जा रहा है। अब उसे क्रियान्वित करने का समय भी आ गया है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि आज हम एक नया इतिहास लिखने जा रहे हैं, लेकिन उस दिन से आज तक मैं उस इतिहास की प्रतीक्षा कर रहा हूं। अब नए इतिहास को नई पीढ़ी को पढ़ाने की जरूरत है।
इनके अलावा विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर राघवेंद्र तंवर, प्रोफेसर अरविंद जामखेड़कर, अरुण कुमार आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी के समापन सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर सतीश चंद्र मित्तल अध्यक्ष अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना एवं संचालन डॉ.ओम जी उपाध्याय सचिव, भारतीय इतिहास संकलन समिति गोरक्ष प्रांत ने किया। संगोष्ठी के अंत में राष्ट्रीय संगठन सचिव अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने संगठनात्मक विमर्श और मंचासीन अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर सांसद राजेश पांडेय, रजनीकांत मणि त्रिपाठी, भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश शाही, सतीश मणि त्रिपाठी, सुमित त्रिपाठी, सूर्य प्रकाश राय, अंकुर मिश्र सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
देवी गीतों से माहौल हुआ भक्तिमय
कसया। भारतीय इतिहास के स्रोत एवं इतिहास लेखन विषय पर कुशीनगर में आयोजित दो दिवसीय वरिष्ठ इतिहासकार राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले शनिवार की शाम सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ। इसमें देवी गीत सहित कई कार्यक्रम हुए।
इसकी शुरुआत लोक गायक राकेश उपाध्याय की देवी गीत की प्रस्तुति से हुई। उन्होंनेे नीबिया की डारि मईया, कुइयां का ठंडा पानी, पीपल के छांव रे, अइयो हे परदेसी, सबरे मोरे गांव, झुहुर-झुहुर बहे ला पवन पुरवइया, अमवा के डरिया पर चहके चिरइया, कौने खोतवा में.. आदि की प्रस्तुति से पंडाल में बैठे श्रोता सराबोर हो गए। इसके अलावा उनके मिर्जापुर की कजरी गोरी भूल गई झूला बाजार में, सावन की बहार में पर जमकर तालियां भी बजीं। गायक राकेश उपाध्याय को राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इसके अलावा संरक्षक अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के पीएन पाठक ने उपाध्याय का माल्यार्पण कर स्वागत और अभिनंदन किया।
अध्यक्षता ग्वालियर से आए इतिहास संकलन योजना के महासचिव प्रोफेसेर आनंद मिश्र और संचालन इतिहास संकलन योजना के गोरक्षप्रांत के महासचिव डॉ. ओेम उपाध्याय ने किया। इस मौके पर सुरेश प्रसाद गुप्त, विजय दीक्षित, सुमित त्रिपाठी, राकेश गिरि, राजीव नयन द्विवेदी, गुड्डू तिवारी, कुंदन मिश्र, मनीष श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।