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Kushinagar News: दुष्टों के संहार के लिए होगा कल्कि अवतार
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नेदुला में कथा सुनतीं महिलाएं। में कथा सुनतीं महिलाएं।
संतकबीरनगर। नेदुला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार को कथा व्यास मानस जी महाराज ने सती चरित्र तथा ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने भागवत के समस्त अवतारों का वर्णन करते हुए कहा कि राष्ट्र, धर्म तथा समाज को हानि पहुंचाने वाले दुष्टों का संहार करने के लिए कल्कि अवतार होगा।
कथा प्रसंग ने मानस जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण में भगवान विष्णु के अवतारों का विस्तृत वर्णन है। इन सभी अवतारों का उद्देश्य धर्म की स्थापना, भक्तों की रक्षा तथा अधर्म का समूल नाश करना है। इन प्रमुख अवतारों में अब तक मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध का अवतार हो चुका है। अंत में कल्कि अवतार होगा।
कथा प्रसंग में माता सती के चरित्र का वर्णन करते हुए मानस जी ने कहा कि माता सती त्याग, प्रेम और आत्म-सम्मान की प्रतीक हैं। प्रजापति दक्ष की पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था। पिता द्वारा शिव के अपमान से दुखी होकर उन्होंने दक्ष के यज्ञ में अपने योग शक्ति से देह त्याग दिया। देश के सभी 51 शक्तिपीठों की स्थापना माता सती के कथा से जुड़ी हुई है।
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इस अवसर पर मुख्य यजमान रमाशंकर मिश्र, जड़ावती देवी, दुर्गेश मिश्र आदि उपस्थित रहे।
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कथा प्रसंग ने मानस जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण में भगवान विष्णु के अवतारों का विस्तृत वर्णन है। इन सभी अवतारों का उद्देश्य धर्म की स्थापना, भक्तों की रक्षा तथा अधर्म का समूल नाश करना है। इन प्रमुख अवतारों में अब तक मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध का अवतार हो चुका है। अंत में कल्कि अवतार होगा।
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कथा प्रसंग में माता सती के चरित्र का वर्णन करते हुए मानस जी ने कहा कि माता सती त्याग, प्रेम और आत्म-सम्मान की प्रतीक हैं। प्रजापति दक्ष की पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था। पिता द्वारा शिव के अपमान से दुखी होकर उन्होंने दक्ष के यज्ञ में अपने योग शक्ति से देह त्याग दिया। देश के सभी 51 शक्तिपीठों की स्थापना माता सती के कथा से जुड़ी हुई है।
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इस अवसर पर मुख्य यजमान रमाशंकर मिश्र, जड़ावती देवी, दुर्गेश मिश्र आदि उपस्थित रहे।