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Kushinagar News: कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान
Sat, 13 Jun 2026 11:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 13 Jun 2026 11:47 PM IST
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तमकुहीरोड। राजपुर खाश गांव के दुबे टोला में नवनिर्मित मंदिर में श्रीराम भक्त हनुमान की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान शुरू हुआ। शनिवार को मंदिर परिसर क्षेत्र में कलश यात्रा निकाली गई। जयश्रीराम के जयघोष के साथ निकली कलश यात्रा ब्रह्मपुर, पिरोजहा, परसा उर्फ सिरिसिया, जीरो बाजार होते हुए जीरो बंधा पुल पहुंची, वहां वैदिक मंत्रोचचार के बीच कलश में बांसी नदी का जल भरा गया। इसके बाद विभिन्न गांव होते हुए कलश यात्रा पुन: मंदिर परिसर पहुंची, जहां विधिविधान से कलश का पूजन कर यज्ञ मंडप में स्थापित किया गया। इसके बाद प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा के निमित्त अनुष्ठान शुरू हुआ। इस दौरान मुख्य यजमान प्रमोद कुमार दुबे, घनश्याम लाल श्रीवास्तव, सुरेश पांडेय, आमोद दुबे, प्रमोद यादव, अजय चौबे आदि मौजूद रहे। संवाद
लंका दहन की कथा अभिमान के नाश का प्रतीक
पिपराघाट। क्षेत्र के ग्राम सभा मिश्रौली स्थित राम-जानकी मंदिर कुटी परिसर में चल रहे सात दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ में शनिवार को छठवें दिन कथा वाचक ने लंका दहन और रावण बध की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि लंका दहन की कथा अभिमान के नाश की कथा है। कथा वाचक प्रियंका द्विवेदी ने कहा कि सनातन धर्म में, रामायण की यह कथा केवल एक घटना नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक अर्थों का प्रतीक है। लंका की भव्यता और रावण की दस भुजाएं अहंकार और भौतिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसे अपने ज्ञान और भक्ति के बल पर बजरंगबली ने पल भर में नष्ट कर दिया। इसके पूर्व यज्ञाचार्य पंडित उमेशचंद्र शास्त्री, दीपक मणि, आनंद त्रिपाठी, अखिलेश द्विवेदी, रविंद्र उपाध्याय ने हवन-पूजन किया। संवाद
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लंका दहन की कथा अभिमान के नाश का प्रतीक
पिपराघाट। क्षेत्र के ग्राम सभा मिश्रौली स्थित राम-जानकी मंदिर कुटी परिसर में चल रहे सात दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ में शनिवार को छठवें दिन कथा वाचक ने लंका दहन और रावण बध की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि लंका दहन की कथा अभिमान के नाश की कथा है। कथा वाचक प्रियंका द्विवेदी ने कहा कि सनातन धर्म में, रामायण की यह कथा केवल एक घटना नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक अर्थों का प्रतीक है। लंका की भव्यता और रावण की दस भुजाएं अहंकार और भौतिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसे अपने ज्ञान और भक्ति के बल पर बजरंगबली ने पल भर में नष्ट कर दिया। इसके पूर्व यज्ञाचार्य पंडित उमेशचंद्र शास्त्री, दीपक मणि, आनंद त्रिपाठी, अखिलेश द्विवेदी, रविंद्र उपाध्याय ने हवन-पूजन किया। संवाद
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