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Kushinagar News: पति की जान चली गई...टस से मस नहीं हुआ सिस्टम
Thu, 26 Feb 2026 02:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 26 Feb 2026 02:33 AM IST
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-शिक्षक खुदकुशी मामला : पत्नी बोली-अब किसके सहारे पालूंगी मासूमों को, आरोपी बाबू संजीव बीएसए से करता था बात
पडरौना। देवरिया के सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में पत्नी गुड़िया सिंह ने बुधवार को कहा कि प्रताड़ना से तंग आकर पति ने मौत को गले लगा लिया, लेकिन जिस सिस्टम ने उन्हें तिल-तिल मरने को मजबूर किया, वह टस से मस नहीं हुआ। रिश्वत की मेज पर बैठे अधिकारियों के लिए कृष्ण मोहन महज एक फाइल थे लेकिन मेरे लिए तो वे पूरा संसार थे। मेरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब किसके सहारे अपनी दो मासूम संतानों को पालूंगी। आरोपी बाबू ही गोरखपुर आता था और मोबाइल से बीएसए से बात कराने के बाद रुपये की मांग करता था। बाबू रामनाथ देवरिया में बने अपने मकान पर भी कई बार पति को बुलाया था।
देवरिया जिले के गौरी बाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने गोरखपुर स्थित आवास पर पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली थी। पत्नी गुड़िया दहाड़ मारकर रोते हुए कहती हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद सिस्टम में बैठे लोग 16 लाख रुपये वसूल लिए और फिर चार लाख रुपये की और मांग की। पति की मौत के बावजूद तंत्र पर कोई असर नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अब तक महज दिखावे के लिए आरोपियों के खिलाफ मामूली कार्रवाई हुई है। उन्हें न्याय मिलता नहीं दिखाई दे रहा है। गुड़िया के आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे हैं, बदहवास हालत में वह सिस्टम को कोसते हुए कहा कि मेरे पति न्याय के लिए देवरिया बीएसए दफ्तर का चक्कर काटते रहे, लेकिन वहां तो इंसाफ की बोली लगती थी। रिश्वत की मेज पर हर बार हमारा हक बेचा गया। वे अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाते रहे। अपनी लाचारी व मजबूरी के सबूत देते रहे, पर भ्रष्टाचार व रुपये के लालच के चलते पत्थर दिल बीएसए शालिनी श्रीवास्तव व पटल सहायक (लिपिक) संजीव सिंह का जमीर नहीं जागा। कहा कि अब मेरे पति को तो कोई वापस नहीं कर सकता है लेकिन मुझे इंसाफ चाहिए। यह कहते हुए फफक कर बिलख पड़ रही हैं।
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पडरौना। देवरिया के सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में पत्नी गुड़िया सिंह ने बुधवार को कहा कि प्रताड़ना से तंग आकर पति ने मौत को गले लगा लिया, लेकिन जिस सिस्टम ने उन्हें तिल-तिल मरने को मजबूर किया, वह टस से मस नहीं हुआ। रिश्वत की मेज पर बैठे अधिकारियों के लिए कृष्ण मोहन महज एक फाइल थे लेकिन मेरे लिए तो वे पूरा संसार थे। मेरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब किसके सहारे अपनी दो मासूम संतानों को पालूंगी। आरोपी बाबू ही गोरखपुर आता था और मोबाइल से बीएसए से बात कराने के बाद रुपये की मांग करता था। बाबू रामनाथ देवरिया में बने अपने मकान पर भी कई बार पति को बुलाया था।
देवरिया जिले के गौरी बाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने गोरखपुर स्थित आवास पर पंखे से लटककर खुदकुशी कर ली थी। पत्नी गुड़िया दहाड़ मारकर रोते हुए कहती हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद सिस्टम में बैठे लोग 16 लाख रुपये वसूल लिए और फिर चार लाख रुपये की और मांग की। पति की मौत के बावजूद तंत्र पर कोई असर नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अब तक महज दिखावे के लिए आरोपियों के खिलाफ मामूली कार्रवाई हुई है। उन्हें न्याय मिलता नहीं दिखाई दे रहा है। गुड़िया के आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे हैं, बदहवास हालत में वह सिस्टम को कोसते हुए कहा कि मेरे पति न्याय के लिए देवरिया बीएसए दफ्तर का चक्कर काटते रहे, लेकिन वहां तो इंसाफ की बोली लगती थी। रिश्वत की मेज पर हर बार हमारा हक बेचा गया। वे अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाते रहे। अपनी लाचारी व मजबूरी के सबूत देते रहे, पर भ्रष्टाचार व रुपये के लालच के चलते पत्थर दिल बीएसए शालिनी श्रीवास्तव व पटल सहायक (लिपिक) संजीव सिंह का जमीर नहीं जागा। कहा कि अब मेरे पति को तो कोई वापस नहीं कर सकता है लेकिन मुझे इंसाफ चाहिए। यह कहते हुए फफक कर बिलख पड़ रही हैं।
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