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अस्पताल बदहाल, स्वास्थ्यकर्मी व तीमारदार परेशान
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अस्पताल बदहाल, स्वास्थ्यकर्मी व तीमारदार परेशान
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के जर्जर भवन में इलाज करने से डरते हैं स्वास्थ्य कर्मी
बोदरवार (कुशीनगर)। न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बोदरवार का भवन जर्जर होने के कारण मरीजों, तीमारदारों व स्वास्थ्यकर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस अस्पताल में असना, महुई, पड़ौली, गंगराई, बनकटा, सोनापकड, पड़ौली, मठिया भलुही, चकिया, शेखपुरवा, अमडीहा आदि गांवों के लोग प्रतिदिन उपचार कराने आते हैं।
असना निवासी विवेक सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम में अस्पताल बड़ी हिम्मत जुटा कर आना पड़ता है, क्योंकि अस्पताल के भवन की छत से पानी टपकता रहता है। चिकित्सकों के साथ ही साथ पहुंचे मरीज डरे रहते हैं, कि कहीं छत ही ऊपर न गिर जाए। बनकटा से पहुंचे इन्द्रजीत ने बताया की रात में इमरजेंसी में उपचार कराने पहुंचने पर अस्पताल में ताला लगा रहता है। खोखिया गांव निवासी कमलावती देवी ने कहा कि इस अस्पताल में जांच की कोई सुविधा नहीं है। बीमारियों की जांच बाहर से निजी केंद्रों में करानी पड़ती है। बोदरवार के राम सागर ने कहा कि इस अस्पताल में सभी दवाइयां मिल जाती हैं। वही भलुही निवासी राजन गुप्ता ने कहा कि अस्पताल में इस समय तो बच्चों के वैक्सीनेशन की दिक्कत हो रही है। स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आवास तो बनाया गया, लेकिन आवास पर जाने के लिए कोई भी रास्ता नहीं है। वहीं भवनों में जंगला, खिड़की, फर्श टूटा हुआ है, जिससे अस्पताल कर्मी बाहर किराए के भवनों में रहने को मजबूर हैं। वहीं अस्पताल परिसर में पानी की व्यवस्था नहीं है। इस अस्पताल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट, एलटी, स्वीपर, स्टाफ नर्स सहित कुल नव कर्मी तैनात हैं। इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संजय भारद्वाज ने बताया कि नए आवास में न तो बिजली, पानी की व्यवस्था है और न ही रास्ते की। अस्पताल भवन के निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के जर्जर भवन में इलाज करने से डरते हैं स्वास्थ्य कर्मी
बोदरवार (कुशीनगर)। न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बोदरवार का भवन जर्जर होने के कारण मरीजों, तीमारदारों व स्वास्थ्यकर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस अस्पताल में असना, महुई, पड़ौली, गंगराई, बनकटा, सोनापकड, पड़ौली, मठिया भलुही, चकिया, शेखपुरवा, अमडीहा आदि गांवों के लोग प्रतिदिन उपचार कराने आते हैं।
असना निवासी विवेक सिंह ने बताया कि बरसात के मौसम में अस्पताल बड़ी हिम्मत जुटा कर आना पड़ता है, क्योंकि अस्पताल के भवन की छत से पानी टपकता रहता है। चिकित्सकों के साथ ही साथ पहुंचे मरीज डरे रहते हैं, कि कहीं छत ही ऊपर न गिर जाए। बनकटा से पहुंचे इन्द्रजीत ने बताया की रात में इमरजेंसी में उपचार कराने पहुंचने पर अस्पताल में ताला लगा रहता है। खोखिया गांव निवासी कमलावती देवी ने कहा कि इस अस्पताल में जांच की कोई सुविधा नहीं है। बीमारियों की जांच बाहर से निजी केंद्रों में करानी पड़ती है। बोदरवार के राम सागर ने कहा कि इस अस्पताल में सभी दवाइयां मिल जाती हैं। वही भलुही निवासी राजन गुप्ता ने कहा कि अस्पताल में इस समय तो बच्चों के वैक्सीनेशन की दिक्कत हो रही है। स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आवास तो बनाया गया, लेकिन आवास पर जाने के लिए कोई भी रास्ता नहीं है। वहीं भवनों में जंगला, खिड़की, फर्श टूटा हुआ है, जिससे अस्पताल कर्मी बाहर किराए के भवनों में रहने को मजबूर हैं। वहीं अस्पताल परिसर में पानी की व्यवस्था नहीं है। इस अस्पताल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट, एलटी, स्वीपर, स्टाफ नर्स सहित कुल नव कर्मी तैनात हैं। इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संजय भारद्वाज ने बताया कि नए आवास में न तो बिजली, पानी की व्यवस्था है और न ही रास्ते की। अस्पताल भवन के निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है।
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