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पंडित दीनदयाल को भोजन कराने वाले परिवार को 55 वर्ष साल बाद मिला मकान

Wed, 16 Nov 2022 11:30 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 16 Nov 2022 11:30 PM IST
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The family who provided food to Pandit Deendayal got a house after 55 years.
मंगलवार को सुगन्धी देवी को आवास का प्रमाणपत्र सौंपते विधायक विवेकानंद पांडेय। - फोटो : KUSHINAGAR
पंडित दीनदयाल को भोजन कराने वाले परिवार को 55 वर्ष साल बाद मिला मकान
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- वर्ष 1967 में जनसंघ के एक जनसभा में शामिल होने खजुरी पहुंचे थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय
पडरौना/पकड़ियार बाजार। एकात्म मानववाद का नारा बुलंद करने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय को क्षेत्र के जिस गरीब कुनबे ने वर्ष 1967 में भोजन कराया था। उसे अब जाकर आवास योजना का लाभ मिल सका है। मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में गरीब परिवार की मुखिया सुगंधी देवी को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया।
नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के ग्राम सभा खजुरी में वर्ष 1967 में भारती जनसंघ के अखिल भारती महामंत्री रहे पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जनसभा की थी। इस सभा के आयोजक रहे पिपरा बुजुर्ग निवासी जनसंघ से जुड़े रहे वयोवृद्ध नेता रविंद्र पांडेय ने बताया कि अक्तूबर माह में हुई सभा के लिए पंडित दीनदयाल वाराणसी से चलकर यहां पहुंचे थे। लक्ष्मीगंज निवासी जगदंबा के आवास पर उन्होंने रात्रि विश्राम किया। अगले दिन वहां से जलपान करके खजुरी में दोपहर 12 बजे जनसभा करने पहुंचे।
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सभा के बाद उन्हें भोजन भी करना था, लेकिन आयोजक ने कांग्रेस सरकार के उत्पीड़न से तंग आकर उन्हें भोजन कराने से इन्कार कर दिया। इसके बाद संघ के पदाधिकारी भोजन कराने के लिए परेशान हो गए। सभी लोगों को परेशान देख पंडित दीनदयाल उपाध्याय आयोजन स्थल के बगल में ही स्थित रामज्ञा के घर पहुंचे। गरीब परिवार के रामज्ञा की पत्नी सुगंधी देवी ने कोदई का भात ओर बोड़ा का सब्जी बनाकर उन्हें भोजन कराया था। तब इस परिवार को यह पता नहीं था कि वह लोग कौन थे? बाद में मालूम हुआ कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उनके घर पर भोजन किया था। रामज्ञा का निधन होने के बाद इस परिवार की माली हालत बिगड़ती चली गई। रोजी-रोटी में लगा परिवार अपने लिए मकान नहीं बना सका। हालांकि हर वर्ष दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर पार्टी के नेता सुगंधी देवी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित करते हैं।
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मंगलवार को सुगंधी को प्रधानमंत्री आवास की प्रथम किस्त जारी हुई। इसकी खुशी में उनके आंख से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। ग्राम प्रधान ने उम्र के अंतिम पड़ाव में परिवार को आवास की व्यवस्था कर दी। सुगंधी के तीन बेटे हैं, लेकिन वह छोटे बेटे दशरथ के साथ रहती हैं। उनके पास खेती के लिए बहुत कम भूमि है। परिवार को अंत्योदय कार्ड और वृद्धा पेंशन का लाभ मिल रहा है।
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